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: भारत में सोना-कॉपर उत्पादन: 5 साल के आंकड़े और पीएम मोदी की बड़ी अपील

- भारत में सोना-कॉपर उत्पादन: 5 साल के आंकड़े और पीएम मोदी की बड़ी अपील
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश की आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वर्तमान में दुनिया में सोने का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है। इस भारी आयात के कारण सरकार को सोने की खरीद के लिए बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का भुगतान करना पड़ता है। पीएम मोदी ने खाड़ी संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हो रही चुनौतियों का हवाला देते हुए लोगों से चीजों के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि देशवासियों को कम से कम एक साल के लिए सोने की खरीदारी की योजना को टाल देना चाहिए। ऐसा करने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है और अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

सोने के उत्पादन में पिछले 5 वर्षों का रुझान

भारत में सोने की घरेलू पैदावार को लेकर सरकार ने संसद में विस्तृत जानकारी साझा की है। इसी साल फरवरी में बीजेपी सांसद डॉक्टर हेमंत विष्णु सावरा द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों के उत्पादन आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में सोने के उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2020-21 में भारत में सोने का कुल उत्पादन 1127 किलोग्राम था। इसके अगले वर्ष यानी 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 1407 किलोग्राम तक पहुंच गया। साल 2022-23 में उत्पादन में 26 किलो की मामूली वृद्धि हुई और यह 1433 किलोग्राम रहा। इसके बाद 2023-24 में उत्पादन ने 1500 किलो का स्तर पार करते हुए 1586 किलोग्राम की ऊंचाई छुई। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में सोने का उत्पादन बढ़कर 1627 किलोग्राम हो गया है।

कॉपर: भविष्य का सोना और उत्पादन की स्थिति

प्रधानमंत्री मोदी ने कॉपर (तांबा) को 'भविष्य का सोना' करार दिया है और उन्होंने इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) और सोलर पैनलों के निर्माण में कॉपर एक अनिवार्य घटक है। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि हमें विदेश से कॉपर खरीदने के बजाय स्वदेशी खनन और उत्पादन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हालांकि, कॉपर के उत्पादन आंकड़ों में पिछले पांच वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। साल 2020-21 में कॉपर का उत्पादन 108718 टन था, जो 2021-22 में बढ़कर 115313 टन हो गया। 2022-23 में यह गिरकर 112745 टन पर आ गया, लेकिन 2023-24 में फिर से बढ़कर 125230 टन तक पहुंच गया। हालांकि, साल 2024-25 के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई और उत्पादन 105012 टन ही रह गया।

घरेलू खनन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रयास

केंद्र सरकार ने देश में सोना, तांबा और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। सरकार ने अन्वेषण लाइसेंस (Exploration Licence) की एक नई व्यवस्था शुरू की है, जो गहराई वाले क्षेत्रों में खनिजों के शुरुआती सर्वेक्षण और खोज की अनुमति देती है। इस पूरी प्रक्रिया का वित्तपोषण राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (NMEDT) द्वारा किया जाता है और यह कार्य अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों (NPEAs) के माध्यम से संपन्न होता है और सरकार ने जानकारी दी है कि साल 2015 से अब तक कुल 28 गोल्ड ब्लॉकों और 11 कॉपर ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की जा चुकी है।

मुख्य आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी

खान मंत्रालय के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई 'हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड' (HCL) वर्तमान में देश में कॉपर के खनन कार्य का नेतृत्व कर रही है। कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई आधुनिक उपाय अपनाए हैं। सरकार ने इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया है कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) के विनिवेश (Disinvestment) का फिलहाल कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान वर्तमान में घरेलू संसाधनों के अधिकतम उपयोग और विदेशी निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सके।

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