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भारत का नया 'सुपर फ्रेंड' बना इजरायल, नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया खास न्यौता

भारत का नया 'सुपर फ्रेंड' बना इजरायल, नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया खास न्यौता
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भारत और इजरायल के बीच की दोस्ती अब केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक साझेदारी में बदल चुकी है। रूस के बाद अब इजरायल भारत का सबसे मजबूत और भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री ने दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इसी कड़ी में एक बड़ी खबर सामने आई है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन। नेतन्याहू ने पीएम मोदी को इजरायल आने का आधिकारिक न्यौता भेजा है।

नेतन्याहू का विशेष निमंत्रण और कूटनीतिक हलचल

भारत में इजरायल के राजदूत रेउवेन अज़ार ने इस बात की पुष्टि की है कि पीएम मोदी को इजरायल की यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है और नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मृति दिवस के दौरान उन्होंने बताया कि इस यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि, आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन यह माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और कृषि क्षेत्र में बड़े समझौतों की नींव रखेगा और राजदूत अज़ार ने कहा कि उचित समय पर विशिष्ट तारीखों का ऐलान किया जाएगा, जो वैश्विक राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा।

रूस के बाद सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदार

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक समीकरण तेजी से बदले हैं और जहां रूस ऐतिहासिक रूप से भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है, वहीं इजरायल ने अपनी उन्नत तकनीक और खुफिया सहयोग के जरिए भारत के सुरक्षा तंत्र में एक अनिवार्य जगह बना ली है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल अब भारत के लिए 'ऑल वेदर फ्रेंड' की भूमिका निभा रहा है। सीमा सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक, इजरायली तकनीक भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

2025-26: द्विपक्षीय संबंधों का स्वर्णिम काल

राजदूत अज़ार ने 2025 को भारत-इजरायल संबंधों के लिए एक अत्यंत उत्पादक वर्ष बताया है। इस वर्ष के दौरान कई उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठकें हुई हैं। दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि और महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में भी बड़ी प्रगति हुई है। वित्तीय प्रोटोकॉल और आतंकवाद-रोधी सहयोग को इस साझेदारी का मुख्य स्तंभ माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 तक यह संबंध और भी अधिक प्रगाढ़ होंगे।

आतंकवाद के खिलाफ एक सुर: पहलगाम और इजरायल

आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देश एक ही धरातल पर खड़े नजर आते हैं। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मृति दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की तुलना अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हुए हमास के हमले से की और उन्होंने कहा कि भारत ऐसी 'बेवकूफी भरी क्रूरता' से अच्छी तरह वाकिफ है क्योंकि वह दशकों से सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहा है। यह बयान दर्शाता है कि भारत और इजरायल आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक-दूसरे के दर्द और चुनौतियों को गहराई से समझते हैं।

भारत में यहूदी विरासत और सुरक्षा

इजरायली राजदूत ने भारत की सभ्यतागत सहिष्णुता की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में यहूदियों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, लेकिन भारत एक ऐसा देश है जहां यहूदी समुदाय हमेशा सुरक्षित रहा और फला-फूला। भारत की बहुलवादी संस्कृति ने यहूदियों को अपनी पहचान बनाए रखने और देश के विकास में योगदान देने का पूरा अवसर दिया। होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए 60 लाख यहूदियों की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत की इस महान परंपरा को याद किया गया, जो दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करता है।

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