भारत और पाकिस्तान के बीच नए विश्व मानचित्र को लेकर कूटनीतिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभु सीमाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'करेक्ट द मैप' (नक्शा सुधारें) नामक प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट किया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित भारत के सभी हिस्सों को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का मतदान और स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है जो 'इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन' (समान क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपण) को बढ़ावा देने की बात करता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका के महाद्वीपीय भू-भाग को उनके वास्तविक आकार के करीब दिखाना है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी विशेष वैश्विक मानचित्र को प्रमाणित नहीं करता है और न ही यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या विवादित क्षेत्रों के राजनीतिक मानचित्रण से संबंधित है।
भारत का आधिकारिक मानचित्र और संप्रभुता
रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत का संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के इलाके शामिल हैं, उन सभी को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का गलत या भ्रामक मानचित्र भारत को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर देश का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है और भारत ने अपने वोट के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह प्रस्ताव किसी खास राष्ट्रीय सीमा के चित्रण का समर्थन नहीं करता है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और दावे
भारत के इस कड़े रुख पर पाकिस्तान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और राजदूत सज्जाद हैदर खान ने भारत के दावों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सज्जाद हैदर ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में भारत के उन दावों को पूरी तरह से खारिज करता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने गए तथ्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की एकतरफा कार्रवाई और अवैध कब्जे से जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानी गई विवादित स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ सकता।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और जनमत संग्रह का जिक्र
पाकिस्तान के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर का विवाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में सबसे पुराने अनसुलझे विवादों में से एक है। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों में यह तय किया गया है कि इसका अंतिम समाधान सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की इच्छा के अनुसार होना चाहिए। पाकिस्तान ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।
मानचित्र विवाद पर पाकिस्तान का तर्क
पाकिस्तान ने अपने बयान में संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक नक्शों का भी हवाला दिया। सज्जाद हैदर खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक नक्शे, जो जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र के रूप में दिखाते हैं, वही इसकी वर्तमान कानूनी स्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने दावा किया कि भारत के आधिकारिक नक्शों और संप्रभुता के एकतरफा दावों का इस क्षेत्र की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह भारत के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को रोकने और कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को पूरा करने के लिए हस्तक्षेप करे।