वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां भारत अब रूस के लिए एक महत्वपूर्ण ईंधन आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। पिछले दो महीनों के दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने रूस को लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात किया है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब रूस, जो आमतौर पर दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों में से एक है, अपनी घरेलू रिफाइनरियों पर हो रहे हमलों के कारण ईंधन संकट का सामना कर रहा है। भारत से होने वाली यह सप्लाई रूस के घरेलू बाजार को स्थिर करने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों का गहरा असर
रूस द्वारा पेट्रोल आयात करने की मुख्य वजह यूक्रेन के लगातार हो रहे ड्रोन हमले हैं। इन हमलों ने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों के अनुसार, केवल जुलाई और अगस्त के महीनों में रूस की तेल रिफाइनरियों पर 32 हमले हुए हैं। इन हमलों के कारण रूस के घरेलू पेट्रोल उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जो कुछ समय के लिए 70 प्रतिशत तक कम हो गया था। इस उत्पादन घाटे ने रूस के कई हिस्सों में ईंधन की कमी पैदा कर दी है। ऊर्जा सुविधाओं को पहुंचे इस नुकसान ने रूस को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है।
रिकॉर्ड आयात और भारतीय रिफाइनरियों की भूमिका
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस का समुद्र के रास्ते पेट्रोल आयात बढ़कर करीब 1 दशमलव 25 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पूरे अगस्त महीने में यह मात्रा करीब 4 दशमलव 70 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले दो महीनों में रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल भेजा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान गुजरात की वडिनार रिफाइनरी का बताया जा रहा है। इस रिफाइनरी का संचालन नायरा एनर्जी द्वारा किया जाता है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस साझेदारी ने भारत से रूस को होने वाली ईंधन सप्लाई को और आसान बना दिया है।
रूसी कच्चे तेल से पेट्रोल का निर्माण
वर्ष 2022 के बाद से भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों में एक नया मोड़ आया है। भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया है, जिसे भारतीय रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोल और डीजल तैयार किया जाता है और जून और जुलाई के महीनों में भारत ने रूस से रोजाना 26 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। यह आंकड़ा फरवरी के करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी अधिक है। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात के आधे से भी ज्यादा हिस्से के बराबर था। ऐसी प्रबल संभावना है कि रूस को जो पेट्रोल भेजा गया है, वह रूसी कच्चे तेल से ही तैयार किया गया हो, जिससे एक चक्र पूरा होता है।
घरेलू प्रतिबंध और अन्य आपूर्तिकर्ता देश
रूस दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में से एक होने के बावजूद आज पेट्रोल आयात करने की स्थिति में है। घरेलू सप्लाई को बनाए रखने के लिए रूस ने पेट्रोल की बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और पेट्रोल के निर्यात पर लगी रोक को जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया है। डीजल के निर्यात पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू हैं और भारत के अलावा, तुर्की और मोरक्को भी उन देशों में शामिल रहे जिन्होंने अगस्त में रूस को पेट्रोल की सप्लाई की है। रिफाइनरियों पर हमलों के कारण उत्पादन में आई 70 प्रतिशत तक की गिरावट ने रूस को अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर बना दिया है, जहां भारत एक प्रमुख मददगार के रूप में सामने आया है।