सर्जियो गोर के बयान पर भारत का पलटवार: डोनाल्ड ट्रंप को बताया अप्रत्याशित

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सर्जियो गोर के बयान पर भारत का पलटवार: डोनाल्ड ट्रंप को बताया अप्रत्याशित
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भारत ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक बैठक के संबंध में दिए गए बयानों पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकारी सूत्रों के माध्यम से भारत ने डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्याशित करार दिया है और कहा है कि वह ट्रंप के इस तरह के व्यवहार के प्रति हमेशा सतर्क रहता है। यह प्रतिक्रिया सर्जियो गोर की उस टिप्पणी के बाद आई है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत ने ट्रंप के साथ बैठक के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने और सवाल न पूछने का अनुरोध किया था।

सर्जियो गोर का दावा और इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रविवार को इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए सर्जियो गोर ने एक बड़ा खुलासा किया। गोर ने बताया कि इस साल जून में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई थी। गोर के अनुसार, इस बैठक से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से केवल एक ही प्रमुख मांग रखी गई थी। वह मांग यह थी कि मीडिया को जानकारी देने के लिए आने दिया जाए, लेकिन कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित न की जाए और पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति न दी जाए।

गोर ने उस समय की बातचीत का विवरण देते हुए कहा कि वह और राष्ट्रपति ट्रंप पर्दे के पीछे अकेले थे। उस समय ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल कौन से मुद्दे उठाएगा। कुछ विषयों पर चर्चा करने के बाद ट्रंप ने फिर पूछा कि क्या उनकी कोई विशेष मांग है। गोर ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति को स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय पक्ष कोई सवाल नहीं चाहता है। हालांकि ट्रंप ने उस समय इस बात को मान लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इस अनुरोध को दरकिनार करते हुए पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।

भारत का पलटवार: ट्रंप के व्यवहार पर सतर्कता

सर्जियो गोर के इन दावों पर भारतीय सरकारी सूत्रों ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि किसी भी बड़े वैश्विक नेता के दौरे या बैठक से पहले सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था और मीडिया प्रोटोकॉल पर चर्चा करना एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है। भारत ने ऐसे दौरों के लिए अपनी निर्धारित सामान्य प्रक्रिया का ही पालन किया था। हालांकि, सूत्रों ने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत करते समय भारतीय डेलिगेशन उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहता है।

भारत ने अपने इस सतर्क रवैये को सही ठहराते हुए अन्य देशों का उदाहरण भी दिया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूक्रेन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ ट्रंप की पिछली बातचीत में भी उनका अप्रत्याशित व्यवहार साफ तौर पर देखा गया है और इसी अनुभव के आधार पर भारत का मानना है कि ट्रंप के साथ व्यवहार करते समय सावधानी बरतना पूरी तरह से उचित और आवश्यक है।

विपक्ष का हमला: प्रधानमंत्री पद की गरिमा पर सवाल

सर्जियो गोर की इस टिप्पणी के बाद भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की बातों से देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा को कम किया जा रहा है और यह पद का अपमान है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बहुत हल्के में लिया जाने लगा है।

पवन खेड़ा ने आगे सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी मीडिया का सामना करने से इतना क्यों कतराते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रधानमंत्री के गौरवशाली पद की अवमानना है। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर प्रधानमंत्री के डर पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश के साथ-साथ विदेश में भी मीडिया से दूरी बनाना चिंताजनक है।

17 जून की मुलाकात का संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यह चर्चित मुलाकात 17 जून को G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान एवियन-लेस-बैंस में हुई थी। इस द्विपक्षीय वार्ता को भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की एक कोशिश के रूप में देखा गया था। पिछले एक साल के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखा गया था, जिसे दूर करने के लिए यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। अब इस बैठक के पीछे की मीडिया व्यवस्थाओं को लेकर हुए खुलासे ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

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