0 के लिए 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह निर्णय देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए लिया गया है। 0 के लिए पहले से निर्धारित किए गए 76 हजार करोड़ रुपये के आवंटन की तुलना में बहुत बड़ी वृद्धि है। व्यय वित्त समिति ने 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के इस खर्च को मंजूरी दे दी है और अब इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
बजट घोषणा और मिशन के मुख्य उद्देश्य
फरवरी में पेश किए गए बजट में देश की विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई बड़े उपायों की घोषणा की गई थी। 0 का खाका तैयार किया गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही एक संपूर्ण चिप विनिर्माण परिवेश (इकोसिस्टम) को विकसित करना है। इसमें चिप बनाने के लिए आवश्यक उपकरण, कच्चा माल, स्वदेशी डिज़ाइन और अन्य संबंधित कलपुर्जों के उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी। 0 चिप विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की गहरी और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
चिप डिज़ाइन और उत्पादन पर विशेष ध्यान
0 के अंतर्गत देश में ही चिप डिज़ाइन और उत्पादन को बढ़ाने पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाएगा। अब तक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली 12 महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं के विवरण के अनुसार, इनमें एक मुख्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई (फैब), दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयां और नौ अत्याधुनिक पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं, जो भारत की तकनीकी क्षमता को नई दिशा देंगी।
औद्योगिक प्रभाव और लाभान्वित होने वाली कंपनियां
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरातल पर भी तेजी से आकार ले रहा है। देश में एक सफल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने के लिए फैब्रिकेशन प्लांट्स के साथ-साथ स्पेशियलिटी केमिकल्स, इंडस्ट्रियल गैस, फ्लोरोकेमिकल्स और हाई-परफॉर्मेंस मटेरियल्स की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि इस पूरी वैल्यू चेन में सक्रिय कुछ प्रमुख केमिकल कंपनियां अब निवेशकों और बाजार की नजर में हैं और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में विकास के अपार अवसर पैदा हो रहे हैं। लिंडे इंडिया, नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल और गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स जैसी कंपनियां इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशियलिटी केमिकल्स और फ्लोरोपॉलिमर के माध्यम से इस औद्योगिक विकास का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।