अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा ने क्रिकेट जगत में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार को जब टीम का ऐलान हुआ, तो चयनकर्ताओं के कुछ फैसलों ने प्रशंसकों और विशेषज्ञों को पूरी तरह से हैरान कर दिया। भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर अक्सर चर्चाएं होती हैं, लेकिन इस बार 5 ऐसे बड़े फैसले लिए गए हैं जिन पर सोशल मीडिया से लेकर खेल के गलियारों तक बवाल मचा हुआ है। फैंस मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की सोच और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कई खिलाड़ियों के साथ हुई इस कथित नाइंसाफी को लेकर इंटरनेट पर लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं और चयनकर्ताओं से जवाब मांगा जा रहा है। टीम के चयन में निरंतरता की कमी और कुछ प्रमुख खिलाड़ियों की अनदेखी ने इस विवाद को और हवा दी है।
ऋषभ पंत की उपकप्तानी पर बड़ा फैसला
ऋषभ पंत को लेकर लिए गए फैसले ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। आईपीएल के दौरान ही इस बात की चर्चा थी कि पंत को वनडे टीम से बाहर किया जा सकता है और चयनकर्ताओं ने ठीक वैसा ही किया। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्हें टेस्ट टीम की उपकप्तानी से भी हटा दिया गया है। ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे बड़े मैच विनर माने जाते हैं और उन्हें पहले शुभमन गिल का डिप्टी यानी उपकप्तान बनाया गया था। अब अचानक उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर केएल राहुल को उपकप्तान बना दिया गया है। केएल राहुल की उम्र 34 साल है, ऐसे में भविष्य की टीम तैयार करने के दावे पर फैंस सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक युवा और सफल खिलाड़ी की जगह 34 साल के खिलाड़ी को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई।
अक्षर पटेल बाहर और वॉशिंगटन सुंदर की एंट्री
टीम इंडिया को 3 आईसीसी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले अक्षर पटेल के साथ हुआ फैसला भी काफी हैरान करने वाला है। अक्षर पटेल को न तो वनडे टीम में जगह मिली और न ही टेस्ट टीम में उन्हें शामिल किया गया और यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को टेस्ट और वनडे दोनों ही टीमों में चुन लिया गया है। अक्षर पटेल जैसे अनुभवी और फॉर्म में चल रहे ऑलराउंडर को पूरी तरह नजरअंदाज करना फैंस के गले नहीं उतर रहा है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद अक्षर को टीम से बाहर क्यों रखा गया है। एक ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना जिसने हाल के वर्षों में टीम की सफलता में बड़ा योगदान दिया है, चयनकर्ताओं की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
आकिब नबी की अनदेखी पर उठे सवाल
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की अनदेखी का आरोप भी इस चयन पर लग रहा है। जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी में चैंपियन बनाने वाले तेज गेंदबाज आकिब नबी को टेस्ट टीम में जगह नहीं दी गई है। आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी धारदार गेंदबाजी से 60 विकेट चटकाए थे। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि अगर रणजी ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बाद भी किसी खिलाड़ी को टेस्ट टीम में मौका नहीं मिलेगा, तो फिर चयन का आधार क्या होगा? हैरानी की बात यह है कि 60 विकेट लेने वाले नबी को छोड़कर गुरनूर बराड़ को टेस्ट टीम में शामिल कर लिया गया है, जिससे चयनकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। घरेलू क्रिकेट के सितारों की इस तरह की अनदेखी से युवा खिलाड़ियों के मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।
यशस्वी जायसवाल के साथ क्या गलत हुआ?
यशस्वी जायसवाल मौजूदा समय में भारतीय टीम के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं जो टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों फॉर्मेट में फिट बैठते हैं। उन्होंने हर मौके पर खुद को साबित किया है और पिछली वनडे सीरीज में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शानदार शतक भी जड़ा था। इसके बावजूद, इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को वनडे टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें टी20 टीम में भी जगह नहीं मिली है और अब वह केवल टेस्ट फॉर्मेट के लिए ही चुने गए हैं। एक ऐसे खिलाड़ी को जो हर फॉर्मेट में रन बना रहा है, उसे सीमित ओवरों की क्रिकेट से बाहर रखना फैंस को समझ नहीं आ रहा है। जायसवाल जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को केवल एक फॉर्मेट तक सीमित रखना टीम इंडिया के भविष्य के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है।
मोहम्मद शमी और चयनकर्ताओं का रुख
अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की टेस्ट टीम में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे फैंस को भी निराशा हाथ लगी है। शमी ने रणजी ट्रॉफी और आईपीएल में अपनी फिटनेस और फॉर्म का परिचय दिया था, लेकिन उन्हें टेस्ट और वनडे टीम में जगह नहीं मिली। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के एक बयान ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। अगरकर ने स्पष्ट किया कि टेस्ट और वनडे टीम के चयन के दौरान शमी के नाम पर चर्चा तक नहीं की गई। चयनकर्ताओं का मानना है कि शमी फिलहाल केवल टी20 फॉर्मेट के लिए ही फिट हैं। एक अनुभवी और विश्व स्तरीय गेंदबाज को इस तरह से नजरअंदाज किए जाने पर क्रिकेट फैंस काफी नाराज नजर आ रहे हैं और वे चयनकर्ताओं से अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।