सरगोधा के बाद स्कार्दू एयरबेस था भारत का निशाना पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा खुलासा

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सरगोधा के बाद स्कार्दू एयरबेस था भारत का निशाना पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा खुलासा
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पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य रणनीति और योजनाबद्ध हमलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा खुलासा किया है। जनरल चौहान ने बताया कि भारतीय वायुसेना और सेना ने सरगोधा को निशाना बनाने के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित स्कार्दू एयरबेस पर हमला करने की एक ठोस योजना तैयार की थी। हालांकि, इस योजना को अंतिम रूप देने के बावजूद, ऐन मौके पर खराब मौसम की स्थिति के कारण भारतीय सेना को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा।

ऑपरेशन सिंदूर और स्कार्दू एयरबेस का लक्ष्य

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की और उन्होंने उस समय को याद किया जब वह सेना की कमान संभाल रहे थे। जनरल चौहान के अनुसार, भारतीय सेनाओं ने गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित स्कार्दू को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संभावित लक्ष्य के रूप में चुना था। यह निर्णय पाकिस्तान की ओर से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का जवाब देने के लिए लिया गया था।

निर्णय प्रक्रिया और लक्ष्यों की पहचान

आतंकवाद विरोधी इस ऑपरेशन के दौरान हुई गतिविधियों को याद करते हुए पूर्व सीडीएस चौहान ने बताया कि एक समय ऐसा आया जब पाकिस्तानियों ने फोन करके कहा कि वे सुबह करीब 10 बजे बात करना चाहते हैं। इसी संवेदनशील समय के दौरान, तत्कालीन एयर चीफ ने जनरल चौहान से संपर्क किया और पूछा कि क्या उन्हें सरगोधा पर हमला करना चाहिए। जनरल चौहान ने बताया कि उन्होंने तुरंत आगे बढ़ने की सहमति दी। इसके साथ ही, उन्होंने एयर चीफ से दो और लक्ष्यों की पहचान करने का अनुरोध किया और वायुसेना द्वारा पहचाने गए इन अतिरिक्त लक्ष्यों में से एक स्कार्दू था। सैन्य कमान ने स्कार्दू पर हमले के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी।

खराब मौसम और भोलाड़ी की ओर बदलाव

योजना पूरी तरह तैयार थी और मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन प्रकृति ने इस मिशन में बाधा डाल दी। जनरल चौहान ने खुलासा किया कि मंजूरी मिलने के कुछ समय बाद ही स्कार्दू क्षेत्र में मौसम अचानक खराब हो गया। खराब दृश्यता और प्रतिकूल वायुमंडलीय स्थितियों के कारण उस समय स्कार्दू पर हमला करना संभव नहीं रह गया था और इस स्थिति को देखते हुए भारतीय वायुसेना को अपना रुख बदलना पड़ा। स्कार्दू के बजाय, मिशन को भोलाड़ी की ओर मोड़ दिया गया ताकि सैन्य उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

किराना हिल्स और परमाणु ठिकानों पर स्पष्टीकरण

अपने संबोधन के दौरान जनरल अनिल चौहान ने किराना हिल्स को लेकर चल रही अटकलों पर भी स्थिति साफ की। किराना हिल्स के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह इलाका पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं से जुड़ा है। जनरल चौहान ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय सेना ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था। उन्होंने तत्कालीन एयर ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल (DGAO) एयर मार्शल एके भारती के बयान का समर्थन किया। एयर मार्शल भारती ने पिछले साल 12 मई को स्पष्ट किया था कि भारत ने किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं किया था। चौहान ने जोर देकर कहा कि भारती का बयान पूरी तरह सही था।

लोइटरिंग म्यूनिशन और सरगोधा का ऑपरेशन

किराना हिल्स के पास हुई सैन्य गतिविधियों की व्याख्या करते हुए पूर्व सीडीएस ने लोइटरिंग म्यूनिशन के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि हमलों से पहले भारतीय सेना ने सरगोधा की ओर कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे और किराना हिल्स भौगोलिक रूप से सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। उन्होंने तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि लोइटरिंग म्यूनिशन उन राडार की तलाश करते हैं जो सरगोधा और उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थित होते हैं। इन म्यूनिशन का एक निश्चित समय होता है, जिसके तहत वे लगभग दो घंटे तक हवा में घूम सकते हैं। यदि इस दौरान उन्हें अपना निर्धारित लक्ष्य नहीं मिलता है, तो वे नीचे आकर किसी स्थान से टकरा जाते हैं और इसी वजह से किराना हिल्स के पास हलचल देखी गई थी, लेकिन वह सीधा हमला नहीं था।

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