यूरिया और डीएपी की नहीं होगी कमी, उर्वरक सप्लाई पर सरकार का बड़ा अपडेट

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यूरिया और डीएपी की नहीं होगी कमी, उर्वरक सप्लाई पर सरकार का बड़ा अपडेट
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भारत सरकार ने यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। सरकार ने देश भर के किसानों को आश्वस्त किया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बावजूद देश में खाद की कोई कमी नहीं होगी और रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। घरेलू उत्पादन ने निर्धारित लक्ष्यों को पार कर लिया है और अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट भी बिना किसी बड़ी बाधा के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं।

उर्वरक जहाजों की सुरक्षित और समयबद्ध आवाजाही

पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर चिंताएं बढ़ गई थीं, लेकिन भारत के उर्वरक आयात पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। मंत्रालय के अनुसार, भारत के लिए उर्वरक और कच्चा माल लेकर आ रहे 20 जहाजों में से 15 जहाजों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है। ये सभी जहाज अब अपनी निर्धारित समय सारणी के अनुसार भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। 11 लाख टन सल्फर लदा हुआ है। यह सफल पारगमन कठिन परिस्थितियों में भी भारत के मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को दर्शाता है।

आगामी शिपमेंट और सरकार की रणनीतिक योजना

मंत्रालय ने आगे विस्तार से बताया कि पांच और जहाज वर्तमान में पाइपलाइन में हैं और जल्द ही भारत पहुंचने की उम्मीद है। 45 लाख टन यूरिया लेकर आएगा। इसके अतिरिक्त, दो और यूरिया जहाजों और एक सल्फर जहाज पर वर्तमान में उनके संबंधित बंदरगाहों पर माल लोड किया जा रहा है। सरकार को पूरा भरोसा है कि ये सभी शिपमेंट भी तय समय पर भारत पहुंच जाएंगे, जिससे कृषि क्षेत्र के लिए पोषक तत्वों का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की चुनौतियों के बावजूद समय पर योजना बनाने और निरंतर निगरानी ने किसी भी बड़ी रुकावट को रोकने में मदद की है।

विविध देशों से आपूर्ति और वैश्विक समन्वय

पश्चिम एशिया संकट से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए भारत सरकार ने अपनी सोर्सिंग रणनीति में विविधता लाई है। यूरिया के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड जैसे कई देशों के साथ व्यवस्था की गई है। वहीं, डीएपी और एनपीके उर्वरकों के लिए भारत ने रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के जरिए आपूर्ति सुरक्षित की है। यह बहु-देशीय दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर न रहे।

रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन और मजबूत स्टॉक की स्थिति

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि हालांकि पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया और डिलीवरी के समय व लागत में वृद्धि की, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए हैं। संकट के दौरान उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 65 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन अब यह पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। इसके परिणामस्वरूप, देश के सभी यूरिया संयंत्र अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। 86 लाख टन के लक्ष्य से अधिक है। 84 लाख टन तक पहुंच गया। 50 लाख टन दर्ज किया गया। 56 लाख टन उर्वरकों का भंडार पहले ही तैयार कर लिया है, जो कुल जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक है।

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