विज्ञापन

होर्मुज नाकेबंदी पर रुबियो की सख्त चेतावनी और भारतीय नाविकों की मौत पर जयशंकर का कड़ा रुख

होर्मुज नाकेबंदी पर रुबियो की सख्त चेतावनी और भारतीय नाविकों की मौत पर जयशंकर का कड़ा रुख
विज्ञापन

ओमान के तट के पास हाल ही में हुई समुद्री घटनाओं के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत पर भारत की गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकेबंदी को और सख्त कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरानी तेल के कथित अवैध परिवहन को रोकना है।

होर्मुज नाकेबंदी पर अमेरिका का कड़ा रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों को लागू करने के संबंध में एक बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, रुबियो ने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका होर्मुज क्षेत्र में नाकेबंदी के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिकी प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि ईरानी तेल की अवैध तस्करी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सीधी चुनौती है और रुबियो ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना द्वारा जारी किए गए आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। वाशिंगटन का मानना है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह अनुपालन अनिवार्य है।

भारत का कड़ा कूटनीतिक विरोध

भारतीय नागरिकों की मौत का कारण बनने वाली सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को सचिव रुबियो के साथ अपनी बातचीत के दौरान औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराया और भारतीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित है। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इन परिस्थितियों में घातक बल का प्रयोग भारत सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत उन कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही की उम्मीद करता है जिनके कारण ये दुखद मौतें हुई हैं।

समुद्री घटनाओं का विस्तृत विवरण

यह तनाव एक ही सप्ताह के भीतर ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों से जुड़ी विशिष्ट घटनाओं से उत्पन्न हुआ है। पहली घटना 8 जून को हुई थी, जिसमें मारिवेक्स नामक जहाज शामिल था। यह जहाज पलाऊ का ध्वज लेकर चल रहा था और इसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। इसे अमेरिकी बलों द्वारा निष्क्रिय कर दिया गया था, हालांकि सौभाग्य से चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था। दूसरी और सबसे दुखद घटना 10 जून को हुई, जिसमें सेटेबेलो नामक एक अन्य पलाऊ-ध्वज वाला टैंकर शामिल था। इस जहाज पर भी 24 भारतीय चालक दल के सदस्य थे, लेकिन अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। तीसरी घटना जालवीर नामक जहाज से जुड़ी थी, जो गिनी-बिसाऊ का ध्वज लेकर चल रहा था। इस जहाज पर 20 भारतीय नागरिक सवार थे और इस पर गुरुवार को हमला किया गया था।

अमेरिकी अधिकारियों को तलब करना

इन घातक हमलों के बाद, विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मीक्स को तलब करने का निर्णायक कदम उठाया। बैठक के दौरान, भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि भारतीय नाविकों से जुड़े अमेरिकी सैन्य हमले अस्वीकार्य हैं। विदेश मंत्रालय ने भारत के कड़े विरोध को और मजबूत करने के लिए शुक्रवार को दोबारा मीक्स को तलब किया। मंत्रालय ने नागरिक वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ अमेरिकी नौसेना द्वारा घातक बल के प्रयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की और जीवन की हानि के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की। यह पहली बार है जब भारत ने सार्वजनिक रूप से इस क्षेत्र में अपने नागरिकों की मौत का कारण बनने वाली अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई को स्वीकार किया है और उसका विरोध किया है।

विज्ञापन