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होर्मुज संकट के बीच भारत को मिली बड़ी राहत, वेनेजुएला ने 50 प्रतिशत बढ़ाई कच्चे तेल की सप्लाई

होर्मुज संकट के बीच भारत को मिली बड़ी राहत, वेनेजुएला ने 50 प्रतिशत बढ़ाई कच्चे तेल की सप्लाई
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर मंडराते संकट के बीच भारत के लिए वेनेजुएला से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में मचे घमासान के दौरान वेनेजुएला ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए मई महीने में कच्चे तेल की सप्लाई में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी है। खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति में आई गिरावट के बीच वेनेजुएला का यह कदम भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और ईरान युद्ध की आहट और समुद्री रास्तों पर असुरक्षा के कारण कई देशों के सामने तेल का संकट गहराता जा रहा है, लेकिन ऐसे समय में वेनेजुएला भारत के लिए एक मजबूत वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरा है।

वेनेजुएला बना भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

एनर्जी ट्रैकिंग डेटा के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल की तुलना में मई महीने में भारत को वेनेजुएला से मिलने वाले तेल की मात्रा में लगभग 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के साथ ही वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है और यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब होर्मुज संकट के कारण खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए और सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहा है, और वेनेजुएला इस रणनीति में एक प्रमुख स्तंभ साबित हो रहा है।

होर्मुज संकट और भारत की बढ़ती चुनौतियां

भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। देश के कुल कच्चे तेल की लगभग आधी सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से ही होती है। लेकिन ईरान के आसपास जारी संघर्ष और समुद्री सुरक्षा के गिरते स्तर ने इस रास्ते को असुरक्षित बना दिया है। भारत ने अप्रैल में सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान से तेल का आयात दोबारा शुरू किया था, लेकिन अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी और कड़े प्रतिबंधों के कारण इस महीने कोई भी नया ईरानी कार्गो भारत नहीं पहुंच सका है।

सऊदी अरब से सप्लाई में भारी गिरावट

संकट केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि सऊदी अरब से आने वाली तेल की सप्लाई में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में भारत को सऊदी अरब से रोजाना करीब 6 लाख 70 हजार बैरल तेल मिल रहा था, जो अब घटकर केवल 3 लाख 40 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में 13 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। हाल ही में ओमान के तट के पास एक भारतीय झंडे वाला जहाज हमले का शिकार होकर डूब गया, जिसने समुद्री व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी रणनीति और वेनेजुएला का विशाल भंडार

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को एक नए स्वरूप में ढालना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी जरूरतों के लिए ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी और वेनेजुएला के तेल पर निर्भर रहे। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसमें करीब 303 अरब बैरल तेल मौजूद है। हालांकि, लंबे समय तक अमेरिकी प्रतिबंधों और वहां के खराब आर्थिक हालातों के कारण उत्पादन प्रभावित रहा था, लेकिन अब अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला का तेल वैश्विक बाजार में वापस आए ताकि ईरान और रूस पर दुनिया की निर्भरता को कम किया जा सके।

भारत के लिए वेनेजुएला का रणनीतिक महत्व

भारत और वेनेजुएला के बीच तेल का व्यापार काफी पुराना है। साल 2019 से पहले वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक था। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल (Heavy Crude Oil) विशेष रूप से गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की रिफाइनरी के लिए तकनीकी रूप से बहुत उपयुक्त माना जाता है। यही कारण है कि भारत एक बार फिर वहां से आयात बढ़ा रहा है। इस महीने अब तक वेनेजुएला भारत को करीब 4 लाख 17 हजार बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई कर चुका है। यदि होर्मुज संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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