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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: एसएंडपी ग्लोबल ने किया बड़ा खुलासा

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: एसएंडपी ग्लोबल ने किया बड़ा खुलासा
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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद प्रभावी रणनीति अपनाई है। दिग्गज रेटिंग और विश्लेषण एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया है कि भारत ने एलएनजी और अन्य ईंधनों की खरीद के लिए अपने स्रोतों का विस्तार किया, जिससे उसे इस वैश्विक संकट से निपटने में बड़ी मदद मिली। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आवाजाही बाधित होने के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसका न्यूनतम असर पड़ा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक एलएनजी आपूर्ति

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक स्तर पर एलएनजी की आपूर्ति में लगभग 17 प्रतिशत की बड़ी बाधा उत्पन्न हुई। हालांकि, दुनिया के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार के रूप में भारत ने अपनी स्थिति को मजबूती से संभाला। भारत ने ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों को अपने आपूर्ति नेटवर्क में शामिल कर सफलतापूर्वक अपने स्रोतों का विस्तार किया और इस रणनीतिक कदम के कारण अप्रैल 2026 में भारत के एलएनजी आयात में सालाना आधार पर केवल 5 प्रतिशत और मई 2026 में मात्र 2 प्रतिशत की मामूली कमी देखी गई।

कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए नए रास्ते

एलएनजी के अलावा, भारत ने कच्चे तेल के मामले में भी अपनी निर्भरता को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। भारत ने रूस के अलावा वेनेजुएला और अमेरिका समेत अन्य देशों से भी तेल की खरीद की है। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के प्रधान शोध विश्लेषक जोहान उतामा ने कहा कि भविष्य में आने वाली रुकावटों को कम करने के लिए भारत एलएनजी खरीद के इन अलग-अलग तरीकों को जारी रख सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी क्षेत्र में तरल ईंधन उत्पादन में प्रतिदिन 1 करोड़ 50 लाख बैरल की भारी कमी आई थी। इसके बावजूद, चीन और जापान द्वारा आयात घटाने और अमेरिका से निर्यात बढ़ने के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव सीमित रहा।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और भविष्य की चुनौतियां

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के उपाध्यक्ष जिम बुरखर्ड ने इसे इतिहास में तेल आपूर्ति की सबसे बड़ी बाधा बताया है। उन्होंने कहा कि कीमतों की सीमित प्रतिक्रिया सबसे अधिक आश्चर्यजनक रही है। हालांकि, संकट अभी टला नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति में सुधार होता भी है, तो इसमें काफी समय लगेगा और जून और जुलाई तक दुनिया भर में तेल भंडार में कमी बनी रहने की आशंका है, जिससे कीमतों पर फिर से दबाव बढ़ सकता है।

भारत के लिए रणनीतिक अनिवार्यता

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के कार्यकारी निदेशक निक शर्मा ने कहा कि भारत के लिए तेल खोज और उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र में मजबूती अब एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गई है। अब केवल बड़े पैमाने या लागत कम करने के बजाय स्थिर संसाधनों तक पहुंच और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा अब बुनियादी तौर पर वैश्विक पोर्टफोलियो विविधीकरण से जुड़ गई है, जो भविष्य की किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता से देश को बचाने में सक्षम होगी।

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