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भारत ने छठी बार जीता अंडर-19 वर्ल्ड कप, इंग्लैंड को दी शिकस्त

भारत ने छठी बार जीता अंडर-19 वर्ल्ड कप, इंग्लैंड को दी शिकस्त
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भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 100 रनों के बड़े अंतर से हराकर छठी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। शुक्रवार को खेले गए इस निर्णायक मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट खोकर 411 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 2 ओवरों में 311 रनों पर सिमट गई। इस जीत के साथ ही भारत ने अंडर-19 विश्व कप के इतिहास में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर लिया है।

वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक और आक्रामक शतक

भारत की इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक 14 वर्षीय सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे। बाएं हाथ के इस युवा बल्लेबाज ने इंग्लिश गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए मात्र 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी खेली। सूर्यवंशी की इस पारी में 15 गगनचुंबी छक्के और 15 शानदार चौके शामिल थे। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के दौरान मैदान के हर कोने में शॉट लगाए और महज 55 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। विश्लेषकों के अनुसार, वैभव की यह पारी अंडर-19 विश्व कप के इतिहास की सबसे प्रभावशाली पारियों में से एक मानी जा रही है। उन्होंने कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की, जिसने भारत के लिए एक बड़े स्कोर की नींव रखी।

भारतीय बल्लेबाजी का सामूहिक प्रदर्शन और विशाल स्कोर

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे का फैसला सही साबित हुआ। हालांकि सलामी बल्लेबाज एरॉन जॉर्ज मात्र 9 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए, लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी और आयुष म्हात्रे ने मोर्चा संभाला। कप्तान म्हात्रे ने धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी करते हुए 51 गेंदों में 53 रनों का योगदान दिया। सूर्यवंशी के आउट होने के बाद मध्यक्रम में विहान मल्होत्रा, अभिज्ञान कुंडू और कनिष्क चौहान ने छोटी लेकिन उपयोगी पारियां खेलीं, जिससे भारतीय टीम 411 रनों के रिकॉर्ड स्कोर तक पहुंचने में सफल रही। इंग्लैंड की ओर से सेबेस्टियन मॉर्गन और एलेक्स ग्रीन ने 2-2 विकेट लिए, लेकिन वे भारतीय रनों की गति पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल रहे।

इंग्लैंड की जवाबी पारी और भारतीय गेंदबाजी का दबदबा

412 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने आक्रामक शुरुआत की। सलामी बल्लेबाज बेन डॉकिंस ने 66 और बेन मायस ने 45 रन बनाकर टीम को अच्छी स्थिति में लाने का प्रयास किया। मध्यक्रम में कैलेब फॉल्कनर ने जुझारू बल्लेबाजी करते हुए 115 रनों की पारी खेली और एक छोर संभाले रखा। हालांकि, भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर इंग्लैंड पर दबाव बनाए रखा। आरएस अंबरीश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके। इंग्लैंड की टीम एक समय मजबूत दिख रही थी, लेकिन भारतीय स्पिनरों और तेज गेंदबाजों के संयुक्त आक्रमण के सामने उनकी पारी 311 रनों पर लड़खड़ा गई। इंग्लैंड ने अपने अंतिम 4 विकेट मात्र 8 गेंदों के भीतर गंवा दिए, जिसने भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।

टूर्नामेंट में भारत का अजेय सफर और सांख्यिकीय विश्लेषण

पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन असाधारण रहा और भारत ने 2026 के इस विश्व कप में एक भी मैच नहीं हारा और अजेय रहते हुए ट्रॉफी पर कब्जा किया। सांख्यिकीय आंकड़ों पर नजर डालें तो वैभव सूर्यवंशी टूर्नामेंट के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, जिन्होंने कुल 439 रन बनाए और सर्वाधिक 30 छक्के जड़े। गेंदबाजी विभाग में हेनिल पटेल ने भारत के लिए सबसे ज्यादा 11 विकेट लिए। यह भारत का छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब है; इससे पहले टीम इंडिया ने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में यह उपलब्धि हासिल की थी। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय टीम की इस सफलता के पीछे उनकी मजबूत घरेलू क्रिकेट संरचना और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) का महत्वपूर्ण योगदान है।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और भविष्य की राह

क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार, इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत की युवा प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हैं। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के उदय ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 411 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करना टीम के मानसिक संतुलन और आक्रामक रणनीति को दर्शाता है। हालांकि इंग्लैंड ने 311 रन बनाकर कड़ी टक्कर देने की कोशिश की, लेकिन दबाव के क्षणों में भारतीय गेंदबाजों का संयम जीत का मुख्य कारण बना। यह जीत न केवल खिलाड़ियों के व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आगामी सीनियर टीम के लिए भी प्रतिभा का एक नया पूल तैयार करती है।

निष्कर्ष के तौर पर, भारत की यह जीत उनके निरंतर सुधार और युवा स्तर पर किए जा रहे निवेश का परिणाम है। हरारे में मिली यह 100 रनों की जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है। अब सभी की निगाहें इन युवा सितारों के भविष्य के प्रदर्शन पर टिकी होंगी, जो आने वाले समय में सीनियर राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

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