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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ डूबे
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 12 मार्च को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को व्यापक वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। 25 के स्तर पर बंद हुआ। 10 पर आ गया। बाजार में इस तीव्र गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹450 लाख करोड़ से घटकर ₹440 लाख करोड़ रह गया, जिससे एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में ₹10 लाख करोड़ की कमी आई। बाजार में यह अस्थिरता वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही निरंतर बिकवाली के कारण उत्पन्न हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आपूर्ति संकट

बाजार में गिरावट का सबसे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 9% की छलांग लगाकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यह वृद्धि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए कथित हमलों की खबरों के बाद देखी गई है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 80% से अधिक हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) द्वारा आपातकालीन तेल भंडार खोलने की घोषणा के बावजूद बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली का दबाव

भारतीय इक्विटी बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बड़े पैमाने पर निकासी जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने ₹39,100 करोड़ से अधिक की राशि बाजार से निकाली है। गुरुवार को भी विदेशी निवेशकों ने ₹6,267 करोड़ के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने खरीदारी के माध्यम से बाजार को सहारा देने का प्रयास किया, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी फंड्स की निकासी का दबाव अधिक प्रभावी रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और डॉलर की मजबूती ने भी उभरते बाजारों से पूंजी निकासी को बढ़ावा दिया है।

अमेरिकी व्यापार नीतियों और टैरिफ का बढ़ता डर

वैश्विक व्यापार परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितता ने भी भारतीय बाजार पर दबाव डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा भारत सहित 16 देशों के खिलाफ 'अनुचित व्यापार' (Unfair Trade) प्रथाओं की नई जांच शुरू करने की घोषणा की गई है। इस कदम को ट्रंप की सख्त टैरिफ नीतियों की वापसी के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका द्वारा व्यापारिक प्रतिबंधों या टैरिफ में वृद्धि की आशंका से निर्यात आधारित क्षेत्रों, विशेष रूप से आईटी और फार्मास्युटिकल कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखी गई। वैश्विक व्यापार युद्ध की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच जोखिम उठाने की क्षमता को कम कर दिया है, जिसका असर घरेलू सूचकांकों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

भारतीय रुपये का ऐतिहासिक स्तर तक अवमूल्यन

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और डॉलर की मांग बढ़ने के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। 34 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। रुपये की इस कमजोरी से आयात महंगा होने की संभावना बढ़ गई है, जो अंततः चालू खाता घाटे (CAD) को प्रभावित कर सकती है। मुद्रा बाजार में इस अस्थिरता ने इक्विटी निवेशकों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में रिटर्न के मूल्य को कम कर देता है।

बाजार में अस्थिरता और इंडिया विक्स में वृद्धि


डिस्क्लेमर

यह समाचार रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है।

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