ईरान और अमेरिका इस समय महायुद्ध की भीषण तैयारी में जुटे हुए हैं। ईरान परमाणु बम बनाने की जल्दबाजी में है, जिससे एक बड़े हादसे का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान के आम नागरिकों को जंग के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया गया है और ईरान और अमेरिका दोनों देशों की सेनाएं युद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं। जहां एक तरफ ईरान लगातार मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी नेवी लगातार आक्रामक अभ्यास कर रही है। अमेरिका की ओर से खाड़ी देशों को युद्ध की तैयारी से जुड़ा एक संदेश भी जारी किया गया है। ईरान के भीतर परमाणु हमले का बड़ा अलर्ट जारी किया गया है, और ईरान का यही खतरनाक अलर्ट एक बहुत बड़ी प्लानिंग का स्पष्ट संकेत दे रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि ईरान युद्ध के दौरान ही एटमी हथियार बनाने की कोशिश में जुटा है, और यदि इस गुप्त मिशन के दौरान कोई परमाणु हादसा होता है, तो उसका पूरा आरोप सीधे तौर पर अमेरिका पर मढ़ दिया जाएगा।
ईरान के जिन ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को भेदने में बंकर बस्टर बम भी नाकाम साबित हुए हैं, उन्हीं पहाड़ों के भीतर मौजूद रहस्यमयी सुरंगों से तबाही की सुनामी बाहर निकल सकती है और ईरान का एटमी ताकत बनने की यह जल्दबाजी वहां के आम नागरिकों के लिए ही बेहद घातक साबित होने वाली है। अब स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि ईरान जल्द से जल्द परमाणु बम हासिल करने की कोशिश में अंधाधुंध जुटा है। इस अफरातफरी और जल्दबाजी में तमाम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया है।
ईरान में इन दिनों पिकएक्स की सीक्रेट सुरंगों के भीतर क्या कुछ चल रहा है, इसकी पुख्ता जानकारी दुनिया को नहीं है, लेकिन बाहर की गतिविधियों से यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान का नया नेतृत्व जल्द से जल्द परमाणु शक्ति बनने के लिए पूरी तरह बेताब है। खुफिया रिपोर्ट्स में इस बात का दावा किया गया है कि ईरान के आम लोग खाने-पीने का सामान और दवाइयां भारी मात्रा में खरीद रहे हैं। जरूरी सामानों का स्टॉक अब हर घर में जमा किया जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह ईरान का परमाणु आपातकालीन दिशानिर्देश है।
ईरान के लोगों को सीधे तौर पर जंग के लिए तैयार रहने को कहा गया है और अमेरिका की तरफ से परमाणु हमले का आसन्न खतरा बताया जा रहा है। ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पिकएक्स माउंटेन को भेदने के लिए विशेष टैक्टिकल हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। अमेरिका इन गुप्त सुरंगों को नेस्तनाबूद करने के लिए अपने न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। तेहरान शहर को पूरी तरह तबाह करने के लिए भी न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है, लेकिन साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इन्हीं डरावनी खबरों को फैलाकर ईरान खुद पूरी शिद्दत और तेजी से परमाणु बम बनाने के अभियान में जुट गया है।
आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने पूरे देश को न्यूक्लियर तबाही के लिए मानसिक तौर पर तैयार करना शुरू कर दिया है। आईआरजीसी किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश में लगी हुई है। हालांकि, उसे इस बात का भी डर सता रहा है कि इस गुप्त अभियान के दौरान कोई भयानक एटमी ब्लास्ट हो सकता है, और इसके पीछे सुरक्षा प्रोटोकॉल में बरती जा रही भारी लापरवाही मुख्य वजह होगी।
सुरक्षा रिपोर्ट्स में यह बड़ा दावा किया गया है कि ईरान की सुरक्षा करने वाली आईआरजीसी ही अब अपने ही देश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है, क्योंकि बिना किसी विशेषज्ञ और सही तरीके के परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से भयंकर रेडिएशन और तबाही का तूफान आ सकता है। हालांकि, इस संभावित एटमी हादसे के बाद का प्लान भी ईरान ने पहले से तैयार कर रखा है। किसी भी हादसे की स्थिति में ईरान तुरंत अमेरिका पर एटमी हमले का झूठा आरोप लगाएगा और अपने नागरिकों की मौत का मुख्य कसूरवार अमेरिका को ही ठहराएगा।
इससे पहले कि ईरान का यह नापाक मकसद कामयाब हो, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक बड़े और निर्णायक हमले की योजना तैयार कर ली है। बड़े-बड़े अमेरिकी कार्गो विमान पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के साथ खाड़ी देशों की तरफ रवाना किए जा चुके हैं। अमेरिका ने खाड़ी देशों को स्पष्ट संदेश भेजते हुए सभी देशों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा है। क्षेत्र में अमेरिकी सेना और हथियारों की भारी तैनाती भी शुरू कर दी गई है, और यह हमला अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के बाद अंजाम दिए जाने की योजना है।
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने बेहद कम समय में बेहद तेज रफ्तार से हमले की सुनियोजित योजना बनाई है। ईरान पर सटीक हमले के लिए अमेरिका मुख्य रूप से एफ-35 जेट का इस्तेमाल करता है, क्योंकि ये स्टेल्थ फाइटर जेट्स ईरान के रडारों को आसानी से चकमा दे देते हैं। लेकिन अब ईरान के पास थ्री फिफ्टी ऐट नाम की एक खतरनाक मिसाइल मौजूद है, जो पैसिव इन्फ्रारेड सेंसर तकनीक का इस्तेमाल करती है। यह मिसाइल टारगेट को लॉक करने की बजाय सीधे जेट के एग्जॉस्ट की भयंकर गर्मी का पीछा करती है और एफ-35 के रडार को चकमा देने में पूरी तरह सक्षम है। जब यह मिसाइल बेहद करीब आ जाती है, तभी इसे ट्रैक किया जा सकता है, जिससे अमेरिकी पायलट के पास जेट को बचाने का मौका बेहद कम बचता है। आखिरी वक्त में अमेरिकी जेट इस मिसाइल से बचने के लिए केवल फ्लेयर्स फायर कर सकते हैं। इस मिसाइल का वॉरहेड 10 किलो वजनी है, जिसे फ्लेयर्स से भ्रमित किया जा सकता है। मिसाइल के फटने से कई बुलेट जैसे तेज छर्रे निकलते हैं, जो अत्यधिक उच्च रफ्तार में एफ-35 फाइटर जेट को भेदने की पूरी ताकत रखते हैं। इस मिसाइल से अचानक होने वाला हमला ही सबसे बड़ा और गंभीर खतरा है। इस मिसाइल की रफ्तार 640 किलोमीटर प्रतिघंटे है। थ्री फिफ्टी ऐट मिसाइल फायर होने के बाद लगातार 60 मिनट तक हवा में ही घूमती रहती है। इसे किसी भी प्रकार के रडार गाइडेंस की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आती है। यह पूरी तरह से थर्मल सिग्नेचर के आधार पर अपना टारगेट तय करती है। हवा में लगातार घूम रही यह मिसाइल किसी घातक हवाई बारूदी सुरंग की तरह काम करती है।
सेंटकॉम के युद्धाभ्यास से इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस बार ईरान पर होने वाला हमला बिल्कुल अलग और अनोखी रणनीति के तहत होगा। अब सेंटकॉम ने हाथ से लड़ाई यानी क्लोज कॉम्बैट के अभ्यास की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं। इस बात को लेकर बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिकी कमांडो सीधे सुरंगों के भीतर उतरेंगे, क्या सुरंग के अंदर आमने-सामने की खूनी जंग होगी, या फिर देश के यूरेनियम भंडार को जब्त करने के लिए यह बड़ा हमला किया जाएगा? होर्मुज जलडमरूमध्य के किनारे सुनियोजित हमले के लिए अमेरिकी फौज युद्धक हेलिकॉप्टर्स के जरिए भी लगातार अभ्यास कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में बयान देते हुए कहा है कि लंबे समय के फायदों के लिए यह थोड़े समय की तकलीफ है, और जनता जल्द ही कहेगी कि पेट्रोल को आखिर क्या हो गया, यह तो बहुत सस्ता हो गया है। इस बार अमेरिका ने ईरान के बेहद करीब मरीन कॉर्प्स टास्क फोर्स की भी भारी तैनाती कर दी है और इतिहास में यह पहला मौका है जब अमेरिका ने ईरान के समुद्री तटों के करीब मरीन एक्स-पिडिशनरी यूनिट को रवाना किया है। अमेरिका की यह विशेष यूनिट एयर-ग्राउंड टास्क फोर्स की तरह बेहद प्रभावी ढंग से काम करती है। अमेरिका की यह यूनिट जमीनी युद्ध कला में पूरी तरह माहिर है, इसलिए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार ईरान के रणनीतिक द्वीपों पर भीषण हमला किया जा सकता है। यह यूनिट बहुत तेज रफ्तार के साथ लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के जरिए सटीक हमला करने की पूरी क्षमता रखती है।
दूसरी ओर, ईरान के भीतर लगातार मिसाइलों का परीक्षण युद्धस्तर पर जारी है। अब उसने मशहद शहर के पास एक और नया मिसाइल परीक्षण किया है। ईरान लगातार जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है, ताकि आने वाले समय में अमेरिकी फाइटर जेट्स को आसानी से आसमान में गिराया जा सके। ईरान लगभग हर दिन नई और उन्नत मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है, और मशहद, क़ज़वीन तथा यज़्द जैसे शहरों से ऐसे परीक्षणों को अंजाम दिया जा चुका है। युद्ध की आहट से पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में फैली भीषण दहशत के कारण तेल और अन्य जरूरी सामानों का बड़ा स्टॉक फारस की खाड़ी में ही बुरी तरह फंस गया है।
अकेले होर्मुज क्षेत्र में इस महीने 28 टैंकर-जहाजों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। होर्मुज में इस महीने अब तक के सबसे भीषण और खतरनाक हमले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर का महीना हमलों के मामले में सबसे भयावह रहा है, जिसमें इस महीने कुल 28 टैंकर-जहाजों को निशाना बनाया गया। कई बड़े तेल टैंकर समुद्र के भीतर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। होर्मुज क्षेत्र में अब तक कुल 113 जहाज जलकर तबाह हो चुके हैं। ईरान की तरफ से लगातार किए जा रहे इन हमलों की वजह से पूरे इलाके में भयंकर दहशत का माहौल है। इसी खौफ के कारण फारस की खाड़ी में मालवाहक जहाजों की लंबी कतारें लग चुकी हैं। इस समय कुल 115 जहाज खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं और कोई भी जहाज होर्मुज को पार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, क्योंकि सभी जहाज इसे पार करने से बुरी तरह डर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का इस तरह पूरी तरह बंद होना भी इस आसन्न युद्ध की एक बहुत बड़ी वजह बन चुका है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान पर सैन्य हमला करने का एक पुख्ता बहाना भी मिल गया है। आंकड़ों के जरिए दुनिया के सामने यह बात पूरी तरह साबित कर दी गई है कि होर्मुज का यह रास्ता किसी निर्णायक युद्ध के बिना खुलने वाला नहीं है और ट्रंप फिलहाल अमेरिकी नागरिकों के सामने यह मजबूत दलील दे रहे हैं कि ईरान को कूटनीतिक समझौतों के लिए काफी लंबा वक्त दिया जा चुका है। कतर और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थों की तमाम कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। होर्मुज को जबरन बंद करके ईरान पूरी दुनिया की मुश्किलें और आर्थिक संकट लगातार बढ़ा रहा है। ईरान से किसी भी प्रकार के समझौते की उम्मीद करना अब केवल समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है। ट्रंप बार-बार इन तर्कों को साबित कर रहे हैं कि ईरान को पूरी तरह तबाह करके ही इस जटिल समस्या का स्थाई हल निकाला जा सकता है, इसलिए इस बार के अमेरिकी सैन्य हमले में ईरान के भीतर अभूतपूर्व और बहुत बड़ी तबाही मचने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।