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ईरान का अमेरिकी विमान गिराने का दावा, अमेरिका ने नकारा; क्या टल जाएगा संघर्ष विराम समझौता?

ईरान का अमेरिकी विमान गिराने का दावा, अमेरिका ने नकारा; क्या टल जाएगा संघर्ष विराम समझौता?
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मध्य पूर्व के क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति एक बार फिर गहराती नजर आ रही है, जहां एक ओर शांति समझौते की सुगबुगाहट है, वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव के दावे किए जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी गहन बातचीत के बीच ईरान के सरकारी टेलीविजन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, बुशेहर के जाम प्रांत में एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट को मार गिराया गया है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह दावा ऐसे समय में आया है जब दोनों देश एक महत्वपूर्ण संघर्ष विराम समझौते के बेहद करीब माने जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरानी मीडिया के इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है और अपनी सभी संपत्तियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की है।

विमान गिराने के दावे और अमेरिकी सेना का खंडन

ईरानी सरकारी टीवी ने शुक्रवार की सुबह अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि बुशेहर के जाम प्रांत में अमेरिकी विमान को निशाना बनाया गया है। इस रिपोर्ट में वहां के स्थानीय गवर्नर मसूद तंगेस्तानी के हवाले से जानकारी दी गई थी। जैसे ही यह खबर फैली, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का सहारा लिया और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट नहीं गिराया गया है। सेना ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी हवाई संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस खंडन के बाद क्षेत्र में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि एक तरफ ईरान सैन्य सफलता का दावा कर रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका इसे सिरे से नकार रहा है।

60 दिनों के संघर्ष विराम पर चल रही है चर्चा

इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों से सकारात्मक खबरें भी आ रही हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि अमेरिका और ईरान गुरुवार को अपने संघर्ष विराम को बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों को हटाने पर मोटे तौर पर राजी हो गए हैं। इस मामले से परिचित चार सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते के तहत संघर्ष विराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ाया जाएगा। इस अवधि के दौरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी, जबकि दोनों पक्षों के वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल और कठिन मुद्दों को सुलझाने के लिए काम करेंगे और हालांकि, इस समझौते को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार है।

शांति की दिशा में बड़ा कदम और ट्रंप की मंजूरी

यदि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व इस समझौते को अपनी अंतिम मंजूरी दे देते हैं, तो यह 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद शांति की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कदम होगा। समाचार एजेंसी एपी ने भी दावा किया है कि दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच 60 दिनों के लिए संघर्ष विराम बढ़ाने और परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत शुरू करने के लिए सहमति बन गई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि इस सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी है। जानकारों का मानना है कि यह सहमति ऐसे समय में बनी है जब अमेरिका और ईरान के बीच का नाजुक संघर्ष विराम डगमगाता हुआ दिखाई दे रहा था। इस महत्वपूर्ण खबर की जानकारी सबसे पहले समाचार आउटलेट एक्सियोस द्वारा सार्वजनिक की गई थी।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान और वर्तमान स्थिति

समझौते की प्रगति को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वाशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए सकारात्मक संकेत दिए हैं। " जेडी वेंस ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि वह इस बात की गारंटी तो नहीं दे सकते कि समझौता निश्चित रूप से हो ही जाएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर वह काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान की तस्नीम (Tasnim) न्यूज एजेंसी ने बातचीत करने वाली टीम के एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया है कि समझौते का मसौदा अभी तक न तो फाइनल हुआ है और न ही उसकी आधिकारिक पुष्टि हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि दोनों पक्ष सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं और अंतिम समझौते से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

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