पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है क्योंकि ईरान ने जासूसी के आरोपियों को मृत्युदंड देने का सिलसिला तेज कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सोमवार को अपने दो और नागरिकों को इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी पर लटका दिया। यह सजा ऐसे समय में दी गई है जब ईरान पहले से ही कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ओमिद बेहजाद और पूरिया सफवत नामक व्यक्तियों को इस्राइली खुफिया एजेंसी को संवेदनशील जानकारी भेजने का दोषी पाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पिछली गर्मियों में हुई छोटी झड़पों और हालिया संघर्षों के दौरान सैन्य और सुरक्षा ठिकानों की सटीक लोकेशन यानी कोऑर्डिनेट्स के साथ-साथ वहां की तस्वीरें और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की थीं।
चार महीनों में 50 लोगों को दी गई फांसी
ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति और न्यायिक प्रक्रियाओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा 24 जुलाई को जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पिछले 4 महीनों के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अस्पष्ट आरोपों के तहत कम से कम 50 लोगों को फांसी की सजा दी है। चिंताजनक बात यह है कि इन फांसी की सजा पाने वालों में कई 18 और 19 साल के युवा भी शामिल थे। हालांकि जेनेवा में ईरान के स्थायी मिशन ने इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन तेहरान हमेशा से कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के दावों को खारिज करता रहा है। यह घटनाक्रम उस पृष्ठभूमि में हो रहा है जब जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर फिर से हमले किए थे। मार्च में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इस्राइल ने मुखबिरों से मिली खुफिया जानकारी का उपयोग करके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के चेकपॉइंट्स को निशाना बनाया था।
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को अंतिम चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचनी चाहिए। उन्होंने इसे एक सरल प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ट्रंप ने सुझाव दिया कि इसे मंगलवार तक खोल दिया जाना चाहिए, जो समझौते का पहला चरण होगा। इसके बाद दूसरे चरण में परमाणु मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका रुख परमाणु हथियारों को लेकर बेहद सख्त है और ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि ईरान के पास एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का यह आखिरी मौका है।
ईरानी नेतृत्व पर ट्रंप का तीखा हमला
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की आलोचना करते हुए उन्हें दोहरे चरित्र वाला बताया। ट्रंप का आरोप है कि ईरानी अधिकारी एक तरफ तो अमेरिका के साथ बातचीत के लिए उत्सुकता दिखाते हैं और बैठकें तय करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जैसे ही बातचीत की खबरें सार्वजनिक होती हैं, वे खुलेआम इससे इनकार करने लगते हैं। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के दावों को भी खारिज कर दिया और उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण पूरी तरह से बना हुआ है। ट्रंप के अनुसार, जब तक अमेरिका नहीं चाहेगा, तब तक ईरान तक किसी भी प्रकार की आपूर्ति नहीं पहुंच पाएगी, जो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक प्रभुत्व को दर्शाता है।
ईरान का पलटवार और सैन्य रुख
ट्रंप की चेतावनियों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को गंभीरता से लेने से मना कर दिया। रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अपना मार्ग निर्धारित कर लिया है और वह किसी भी अन्य समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने अमेरिका पर इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के उल्लंघन का आरोप लगाया। रेजाई के अनुसार, अमेरिका ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए ईरान की व्यवस्थाओं को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में बिना किसी चर्चा के हमले शुरू कर दिए। उन्होंने बताया कि इस उल्लंघन के बाद 17 दिनों तक चले संघर्ष में ईरान ने अमेरिका को करारा जवाब दिया था। रेजाई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अनधिकृत मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजता है, तो ईरान की मिसाइलें उन्हें निशाना बनाने के लिए तैयार हैं।