ईरान ने दिया होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का ऑफर, क्या ट्रंप मानेंगे शर्तें

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ईरान ने दिया होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का ऑफर, क्या ट्रंप मानेंगे शर्तें
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ आते हुए ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के सामने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा है। ईरान और कतर के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान यह पेशकश की गई है कि यदि अमेरिका तेहरान की ओर से रखी गई शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को मात्र दो दिनों के भीतर पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाएगा। हालांकि, इस ताज़ा प्रस्ताव पर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है, और इस पर अंतिम निर्णय लेने का पूरा अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास है।

कतरी मध्यस्थों की भूमिका और समय-सीमा में कटौती

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि कतरी मध्यस्थों के साथ लगातार चल रही बातचीत के बाद ही यह सहमति बन पाई है कि अगर अमेरिका तेहरान की शर्तें मान लेता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दो दिनों के भीतर खोला जा सकता है। कतरी मध्यस्थों के साथ यह बातचीत अभी भी सक्रिय रूप से जारी है और विदेश मंत्री अराघची ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दोहा के साथ हुई वार्ताओं की मदद से ही इस प्रस्तावित समय-सीमा को मूल रूप से पांच दिन से घटाकर दो दिन करने में सफलता मिल पाई है।

प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि कतर पक्ष ने मूल रूप से ईरानी प्रस्ताव को लागू करने की अवधि को घटाकर पांच दिन करने का सुझाव दिया था। अब हम कूटनीतिक चर्चाओं के जरिए एक ऐसे प्रस्ताव पर पहुंच गए हैं, जिसमें इसे लागू करने की अवधि घटकर केवल दो दिन रह गई है। आपको बता दें कि कतर में हुई ये तमाम बातचीत, शुक्रवार को तेहरान में ईरानी और कतरी प्रतिनिधियों के बीच आयोजित 12 घंटे लंबी गहन चर्चा के तुरंत बाद संपन्न हुई हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाशिंगटन के साथ भी लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश न रहे।

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी की सख्त चेतावनी

इस कूटनीतिक पहल और बातचीत के दौर से पहले, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा था कि जब तक तेहरान की सभी जायज शर्तें पूरी नहीं कर ली जातीं, तब तक यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद ही रहेगा। उन्होंने अपनी इस चेतावनी को और स्पष्ट करते हुए यह भी कहा था कि यदि इस दौरान ईरान पर किसी भी प्रकार का सैन्य हमला होता है, तो देश नए और उन्नत हथियारों का इस्तेमाल करके हमलावर को बेहद करारा और मुंहतोड़ जवाब देगा। ईरान के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके समाधान के रूप में अब कतरी मध्यस्थता को अहम माना जा रहा है।

तेहरान की मुख्य शर्तें और माँगें

तेहरान की तरफ से रखी गई इन महत्वपूर्ण मांगों और शर्तों का जिक्र करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि इनमें ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ के बाद ईरान पर थोपे गए तमाम प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाना शामिल है। इसके अलावा, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की भारी संख्या को कम करना, तेल छूट को दोबारा से बहाल करना और ईरान की विदेशी बैंकों में फ्रीज की गई धनराशि को तुरंत जारी करना भी इन शर्तों में प्रमुख रूप से शामिल हैं। विदेश मंत्री ने दोहराया कि हम तेल छूट को फिर से बहाल करने और कतर में रखी गई धनराशि सहित अपनी सभी फ्रीज की गई धनराशि को बिना किसी देरी के जारी करने की मांग करते हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

इसके अतिरिक्त, ईरान ओमान के साथ हुई पिछली बातचीत के दौरान विकसित किए गए होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले एक विशिष्ट शिपिंग मार्ग को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की दिशा में भी पुरजोर कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही, तेहरान द्वारा अन्य सभी वैकल्पिक मार्गों को पूरी तरह से बंद करने की मांग भी की जा रही है। इन तमाम आर्थिक और सामरिक मांगों के साथ-साथ, ईरान ने दुनिया भर के सभी मोर्चों पर चल रहे युद्धों को तत्काल खत्म करने की पुरजोर अपील की है, और विशेष रूप से लेबनान पर लगातार हो रहे इजरायली हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है ताकि मानवीय संकट को टाला जा सके।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पत्र और राजनयिक संपर्क

डी. वेंस द्वारा ईरान के शीर्ष अधिकारी मोहसेन रेजाई को भेजे गए एक गोपनीय पत्र के बाद ही शुरू हुई थी। ईरानी पक्ष के सुरक्षा अधिकारी रेजाई ने वाशिंगटन के रुख में आए इस अप्रत्याशित बदलाव को एक बहुत ही सकारात्मक संकेत करार दिया था। डी. वेंस के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का ठोस प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें विशेष रूप से ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को भी बातचीत के मुख्य एजेंडे में शामिल करने की बात कही गई थी ताकि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को तोड़ा जा सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया और धमकी

एक तरफ जहां कूटनीतिक चैनल खुले हुए हैं और बातचीत आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सख्त तेवर बरकरार रखे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरान वास्तव में बातचीत करना चाहता है और इस दिशा में बातचीत की प्रक्रिया आगे भी बढ़ रही है। हालांकि, कूटनीतिक दबाव बनाने की अपनी पुरानी शैली के तहत उन्होंने ईरान के बचे हुए सामरिक परमाणु ठिकानों पर नए सिरे से विध्वंसक हमले करने की खुली धमकी भी दी है। ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ऐसा कोई भी सैन्य ऑपरेशन महज़ 10 मिनट के भीतर सफलतापवूर्क अंजाम दिया जा सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कूटनीतिक वार्ताओं के साथ-साथ सैन्य तनाव के बादल भी पूरी तरह से छंटे नहीं हैं और पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिकी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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