ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है और कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद यह घोषणा की गई है कि वाशिंगटन और तेहरान 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमत हो गए हैं। स्विट्जरलैंड में हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के पहले दिन को उत्साहजनक बताया गया है। यह प्रगति 17 जून को हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद हुई है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का एक ढांचा तैयार किया था। लेक ल्यूसर्न में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चली 18 घंटे की लंबी बैठक के बाद इस सफलता की पुष्टि की गई है।
अमेरिकी राजनीति में समझौते पर विवाद
इस शांति प्रक्रिया को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं और अमेरिकी हाउस की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति होने से पहले ही तेहरान को प्रतिबंधों से बड़ी राहत दे दी है। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में डेमोक्रेट्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के ये कदम उनके अपने पिछले बयानों के विपरीत हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रशासन ने पहले कहा था कि प्रतिबंधों में ढील तभी दी जाएगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और आतंकवादी सहयोगियों के मुद्दे को हल करेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।
ईरान का आंतरिक बचाव और क्षेत्रीय स्थिति
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ ने उन घरेलू आलोचकों को कड़ा जवाब दिया है जो अमेरिका के साथ बातचीत का विरोध कर रहे थे। ग़ालिबाफ़ ने उन टिप्पणियों का जिक्र किया जिनमें कहा गया था कि मेहराबाद एयरपोर्ट को बंद कर देना चाहिए था ताकि ईरानी टीम स्विट्जरलैंड न जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिनिधिमंडल लेबनान में इजरायल द्वारा किए जा रहे रक्तपात को रोकने के उद्देश्य से वहां गया था। उन्होंने कहा कि यदि वे स्विट्जरलैंड नहीं जाते, तो लेबनान में मुसलमानों और शियाओं का और अधिक खून बहता। इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जिन्हें शांति प्रस्ताव में एक संभावित बाधा के रूप में देखा जा रहा है।
सैन्य खर्च और पेंटागन की मांग
तनाव के बीच वित्तीय आंकड़ों का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। पेंटागन ने अमेरिकी सीनेटरों को सूचित किया है कि उसे ईरान के खिलाफ सैन्य खर्च और युद्ध की तैयारियों के लिए लगभग 80 अरब डॉलर की आवश्यकता है। यह राशि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले से मांगे गए भारी-भरकम सैन्य बजट के अतिरिक्त है। हालांकि व्हाइट हाउस के प्रबंधन और बजट कार्यालय ने अभी तक कांग्रेस को औपचारिक अनुरोध नहीं भेजा है, लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ लगातार कैपिटल हिल में बैठकें कर रहे हैं ताकि इस भारी-भरकम राशि के लिए समर्थन जुटाया जा सके।
ट्रंप की चेतावनी और परमाणु निरीक्षण पर भ्रम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर जहां बातचीत का रास्ता खुला रखा है, वहीं दूसरी ओर तेहरान को कड़ी चेतावनी भी दी है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि अगर ईरान शांति समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं करता है या उसका व्यवहार ठीक नहीं रहता है, तो वे वह सब करेंगे जो उन्हें करना होगा। इसी बीच, परमाणु निरीक्षण को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया था कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने पर सहमत हो गया है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। बकाई ने कहा कि परमाणु एजेंसी के साथ सहयोग केवल मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत ही होगा।
संपत्ति की बहाली और तेल निर्यात पर समझौता
मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ ने समझौते के आर्थिक पहलुओं, विशेष रूप से आर्टिकल 10 और 11 पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्टिकल 11 के तहत ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति में से 6 अरब डॉलर की दो अलग-अलग किश्तें जारी की जानी हैं। इसके लिए शुरुआती इंतजाम कतर यात्रा के दौरान किए गए थे और स्विट्जरलैंड में इस पर अंतिम मुहर लगी। आर्टिकल 10 के बारे में उन्होंने बताया कि यह कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल्स और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि अंतिम समझौता होने तक तेल पर लगी पाबंदियां हटा दी गई हैं, जिसे उन्होंने ईरान के लिए एक बड़ी और तत्काल जीत के रूप में पेश किया।