ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान का ट्रंप को करारा जवाब बोले धमकी दी तो नहीं होगी बात

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ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान का ट्रंप को करारा जवाब बोले धमकी दी तो नहीं होगी बात
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वैश्विक मंच से दुनिया को संबोधित करते हुए एक अत्यंत कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान न केवल अमेरिका और इजराइल की नीतियों की आलोचना की, बल्कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई धमकियों का भी पुरजोर जवाब दिया और पेजेश्कियान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई पक्ष ईरान को धमकाने की कोशिश करेगा, तो ईरान उस पक्ष के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या संवाद में शामिल नहीं होगा। उनका यह बयान ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के संकल्प को प्रदर्शित करता है।

डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों और धमकियों पर पलटवार

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने भाषण में विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए आतंकवादी देश के ठप्पे को खारिज किया। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान स्वयं आतंकवाद का एक बड़ा शिकार रहा है और उसने अपनी धरती पर कई आतंकवादी हमलों का सामना किया है। पेजेश्कियान ने ट्रंप के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने ईरान को दो रास्तों में से एक चुनने की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के पास केवल दो ही विकल्प हैं, या तो वह समझौता करे या फिर नरक में जाए। इसके जवाब में पेजेश्कियान ने कहा कि इस तरह की भाषा और धमकियां किसी भी कूटनीतिक समाधान का हिस्सा नहीं हो सकतीं और ईरान ऐसी धमकियों के आगे कभी नहीं झुकेगा।

मीनाब स्कूल हमले के पीड़ितों का मुद्दा और साक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने मीनाब स्कूल हमले के पीड़ितों की तस्वीरें भी दिखाईं। इन तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने संघर्ष में मारे गए निर्दोष नागरिकों और बच्चों की पीड़ा को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कब्रों और बच्चों की तस्वीरें दिखाते हुए आरोप लगाया कि ये मासूम उन बमों और हथियारों का शिकार हुए जो अमेरिका और इजराइल द्वारा इस्तेमाल किए गए थे। पेजेश्कियान ने भावुक होते हुए कहा कि इन बच्चों का कोई अपराध नहीं था और वे पूरी तरह से निर्दोष थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करके निर्दोषों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ है।

ईरान की रक्षा नीति और सर्वोच्च नेता का जिक्र

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने देश की रक्षात्मक कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा कि ईरान ने हमेशा अपनी रक्षा की है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेनाओं ने कभी भी जानबूझकर आम नागरिकों को अपना निशाना नहीं बनाया है। पेजेश्कियान ने कहा कि हमारे निर्दोष लोग हमारे देश पर किए गए कायरतापूर्ण हमलों का निशाना बने हैं, लेकिन हमने पूरी ताकत के साथ अपनी रक्षा की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या बिना किसी कानूनी ढांचे या वैध कारण के की गई थी। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरानी संस्थानों और नागरिकों पर लगातार हमले करने का आरोप लगाया और कहा कि लेटेस्ट तकनीक से लैस हमलों के बावजूद ईरान ने घुटने नहीं टेके हैं।

बातचीत के लिए ईरान की स्पष्ट शर्त

अपने संबोधन के समापन की ओर बढ़ते हुए पेजेश्कियान ने अमेरिका को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत केवल सम्मानजनक माहौल में ही संभव है। ट्रंप की उस धमकी का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बातचीत से समाधान नहीं हुआ तो उनके पास तेहरान के साथ समझौता करने या इस्लामिक गणराज्य को पूरी तरह से नष्ट करने का विकल्प है, पेजेश्कियान ने इसे अस्वीकार्य बताया और उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी रक्षा करने में सक्षम है और वह किसी भी ऐसी बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगा जो दबाव या विनाश की धमकी के साये में की जा रही हो।

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