तेहरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर स्थित हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया एयरबेस पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस हमले ने न केवल अमेरिका और ब्रिटेन की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, बल्कि इजरायल को भी कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों की तीव्रता में आने वाले दिनों में भारी वृद्धि की जाएगी। यह बयान उस समय आया है जब ईरान की मिसाइल क्षमताओं ने अपनी पहुंच का प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय सैन्य रणनीतिकारों को चौंका दिया है और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, डिएगो गार्सिया बेस पर हुआ यह हमला तेहरान की लंबी दूरी की मारक क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।
नतान्ज परमाणु केंद्र पर जवाबी कार्रवाई और इजरायली चेतावनी
ईरान द्वारा अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की नतान्ज परमाणु संवर्धन सुविधा पर हवाई हमला किया। इजरायली रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को सीमित करने के उद्देश्य से की गई थी। आधिकारिक ईरानी समाचार एजेंसी ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि नतान्ज सुविधा पर हुए प्रहार से किसी भी प्रकार का रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं हुआ है और स्थिति नियंत्रण में है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से स्पष्ट किया कि अगले सप्ताह से इजरायल और अमेरिका ईरान की सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ अपने हमलों का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ाएंगे। उन्होंने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक कदम बताया है।
डिएगो गार्सिया एयरबेस की सामरिक स्थिति और हमले का प्रभाव
डिएगो गार्सिया एयरबेस हिंद महासागर में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र है, जिसका उपयोग अमेरिका और ब्रिटेन संयुक्त रूप से करते हैं। तेहरान से इसकी दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर है, और इस दूरी पर सटीक निशाना लगाना ईरान की उन्नत मिसाइल तकनीक को दर्शाता है। ब्रिटिश सरकार ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करार दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले से यह संकेत मिलता है कि ईरान के पास ऐसी मिसाइलों का भंडार है जो अब तक के अनुमानों से कहीं अधिक दूरी तय कर सकती हैं। अमेरिकी खुफिया विभाग ने पहले भी आशंका जताई थी कि तेहरान वाशिंगटन तक मार करने वाली तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, और इस ताजा हमले ने उन चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
तेल अवीव में नागरिक क्षेत्रों पर मिसाइल के अवशेष
युद्ध की विभीषिका उस समय और स्पष्ट हो गई जब तेल अवीव के पास एक खाली किंडरगार्टन में ईरानी मिसाइल के टुकड़े गिरे। इजरायली सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना का एक वीडियो साझा किया, जिसमें किंडरगार्टन की इमारत को हुए नुकसान को दिखाया गया है। गनीमत यह रही कि हमले के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाना या वहां मिसाइल के मलबे का गिरना ईरान की आक्रामकता का परिणाम है। इस घटना ने इजरायली रक्षा बलों को अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों को और अधिक सक्रिय करने और जवाबी कार्रवाई की योजना को गति देने के लिए प्रेरित किया है।
अमेरिकी सैन्य तैनाती और आर्थिक बाजार पर असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विरोधाभासी संकेत दिए हैं और एक ओर उन्होंने सोशल मीडिया पर मध्य-पूर्व में सैन्य अभियानों को समाप्त करने की इच्छा व्यक्त की है, तो दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा विभाग ने हिंद महासागर क्षेत्र में तीन अतिरिक्त एम्फिबियस असॉल्ट शिप और लगभग 2,500 मरीन सैनिकों को भेजने की पुष्टि की है। इस सैन्य हलचल और युद्ध की आशंकाओं के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता देखी गई है और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। स्थिति को संभालने के लिए ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि वे उन ईरानी तेल जहाजों पर से प्रतिबंध हटा रहे हैं जो पहले से ही समुद्र में लदे हुए हैं, ताकि ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की सैन्य रणनीति
इजरायल और अमेरिका अब ईरान की मिसाइल क्षमताओं का नए सिरे से आकलन कर रहे हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से मिसाइल लॉन्च पैड और अनुसंधान केंद्रों को लक्षित करने की योजना बनाई गई है। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उसके क्षेत्र पर हमले जारी रहे, तो वह दुनिया भर में फैले पश्चिमी हितों और पर्यटन स्थलों को निशाना बना सकता है। क्षेत्र में बढ़ती इस सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी बड़ी चुनौती पेश कर दी है, क्योंकि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।