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इजराइल ने ईरान के तेल डिपो पर किए हमले, 30 फ्यूल टैंकों और तेल डिपो को निशाना बनाया

इजराइल ने ईरान के तेल डिपो पर किए हमले, 30 फ्यूल टैंकों और तेल डिपो को निशाना बनाया
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इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अपने नौवें दिन में प्रवेश कर गया है, जिसमें तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। इजराइली मीडिया आउटलेट 'वाइनेट' की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली वायु सेना ने ईरान के भीतर रणनीतिक तेल भंडारों और ईंधन डिपो को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान के लगभग 30 फ्यूल टैंकों और कई महत्वपूर्ण तेल डिपो को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। यह कार्रवाई ईरान की आर्थिक और सैन्य रसद श्रृंखला को बाधित करने के उद्देश्य से की गई मानी जा रही है।

तेल बुनियादी ढांचे पर भीषण हवाई हमले

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, शनिवार को तेहरान स्थित एक प्रमुख तेल डिपो पर इजराइली और अमेरिकी हवाई हमले हुए। यह पहली बार है जब ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर साझा की गई फुटेज में तेल भंडारण टैंकों से आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का विशाल गुब्बार उठता हुआ देखा गया है। हालांकि अभी तक इन हमलों से हुए कुल वित्तीय और भौतिक नुकसान का सटीक आकलन नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने इसे तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करार दिया है और तेल डिपो पर हुए इन हमलों का सीधा असर ईरान की घरेलू ईंधन आपूर्ति और सैन्य गतिशीलता पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

डोनाल्ड ट्रम्प का कड़ा रुख और अमेरिकी बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को एक सार्वजनिक संबोधन में ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाया। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दे। उन्होंने कहा कि ईरान को ऐसी स्थिति में लाया जाना चाहिए जहां वह युद्ध जारी रखने में सक्षम न रहे और ट्रम्प के अनुसार, या तो ईरान को स्वयं हार मान लेनी चाहिए या उसकी सैन्य क्षमताओं को इतना कमजोर कर दिया जाना चाहिए कि वह भविष्य में किसी भी प्रकार के संघर्ष के लायक न बचे। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेज सकती है, जो आमतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं।

फारस की खाड़ी में तनाव और ईरान की चेतावनी

इजराइली हमलों और अमेरिकी बयानों के जवाब में ईरानी सेना ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने शनिवार को अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी युद्धपोत फारस की खाड़ी में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तेहरान में तेल सुविधाओं पर हुए हमलों के प्रतिशोध में इजराइल के हाइफ़ा स्थित एक रिफाइनरी पर हमला करने का दावा किया है और ईरान इन हमलों को 'आतंकवाद' और 'युद्ध की कार्रवाई' (Act of War) के रूप में देख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, अब इस संघर्ष का नया केंद्र बनता दिख रहा है।

नागरिक क्षेत्रों और मानवीय सहायता केंद्रों पर प्रभाव

युद्ध की विभीषिका का असर ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6668 नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है, जिसमें 5535 घर और 1041 दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके अतिरिक्त, 14 मेडिकल सेंटर और 65 स्कूलों पर भी हमले की खबरें हैं। रेड क्रिसेंट के 13 केंद्र भी इन हमलों की चपेट में आए हैं। मानवीय दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत गंभीर होती जा रही है क्योंकि ईंधन डिपो पर हमलों से आम नागरिकों के लिए दैनिक आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस त्रिकोणीय संघर्ष में अब तक कुल 1483 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि इजराइल में 1765 लोग घायल हुए हैं।

क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार और ड्रोन हमले

ईरान और इजराइल के बीच यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। युद्ध के आठवें और नौवें दिन ईरान ने दुबई, सऊदी अरब और इजराइल के विभिन्न हिस्सों पर ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे और लेबनान की ओर से हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर ड्रोन दागने की पुष्टि की है। इजराइल ने इससे पहले यमन में भी तेल डिपो और आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाया था। हाल ही में एक स्कूल पर हुए हमले में 100 से अधिक बच्चों की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरानी मीडिया 'फार्स न्यूज' ने यह भी बताया कि हमलों के दौरान एक एम्बुलेंस भी पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है।

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