इजराइली सेना के भीतर संसाधनों की भारी कमी को लेकर चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं, जिससे देश की सैन्य क्षमताओं पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। इजराइली मीडिया संस्थान चैनल 12 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेना अमेरिका की प्रसिद्ध कंपनी बोइंग से 12 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने के अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई है। इस महत्वपूर्ण रक्षा सौदे के रुकने का मुख्य कारण सेना के हथियार खरीद बजट में आई कमी को बताया गया है। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब इजराइली रक्षा बल (आईडीएफ) कई मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ रहे हैं, जिससे हथियारों और उपकरणों की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है।
बजट पर राजनीतिक गतिरोध और खरीद में बाधा
सैन्य बजट को लेकर इजराइल के भीतर राजनीतिक स्तर पर भी खींचतान जारी है। अपाचे हेलिकॉप्टर सौदे के अटकने की खबर से एक दिन पहले, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी नेता यायर लैपिड से मुलाकात की थी। नेतन्याहू ने लैपिड से सेना के खरीद बजट को बढ़ाने के लिए समर्थन मांगा था ताकि रक्षा जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके। हालांकि, इस बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई, जिसके कारण सेना की भविष्य की खरीद योजनाएं अधर में लटक गई हैं। बजट की इस कमी का सीधा असर न केवल नए सौदों पर, बल्कि मौजूदा सैन्य साजो-सामान के रखरखाव पर भी पड़ने की संभावना है।
टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की कमी
इजराइली अखबार मारिव ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि सेना के पास वर्तमान में पर्याप्त संख्या में टैंक और बख्तरबंद वाहन उपलब्ध नहीं हैं। पिछले लगभग तीन वर्षों से जारी निरंतर युद्ध के दौरान सैकड़ों सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना अब सैनिकों की छुट्टियां रोकने पर भी विचार कर रही है ताकि युद्ध के मैदान में सैनिकों की संख्या कम न हो। चैनल 12 के अनुसार, यदि सेना को जल्द ही अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया, तो क्षतिग्रस्त टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की मरम्मत का काम रुक सकता है। इसके अलावा, गोला-बारूद बनाने वाली कुछ स्थानीय फैक्ट्रियों के कामकाज पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।
क्या यह रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है?
हथियारों की कमी की इन खबरों के बीच कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति उतनी भी खराब नहीं है जितनी दिखाई जा रही है और डिफेंस एनालिस्ट हमजे अत्तार ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि इन खबरों का यह मतलब कतई नहीं है कि इजराइली सेना के पास हथियार पूरी तरह खत्म हो रहे हैं। अत्तार के अनुसार, इजराइल अक्सर हथियारों की कमी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है ताकि अमेरिका और यूरोपीय देशों से हथियारों की आपूर्ति को तेज कराया जा सके। इजराइल आमतौर पर अन्य देशों की तुलना में हथियारों का बहुत बड़ा भंडार सुरक्षित रखता है। ऐसे में जिस मात्रा को कोई दूसरा देश युद्ध के लिए पर्याप्त मान सकता है, उसे इजराइल अपनी सुरक्षा मानकों के हिसाब से कम मान सकता है।
इजराइल अपने हथियारों के कुल भंडार के आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं करता है, इसलिए वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करना कठिन है। अत्तार का कहना है कि अमेरिका में इजराइल के प्रति बदलते राजनीतिक रुख को देखते हुए, इजराइल सरकार चाहती है कि भविष्य की किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले सभी महत्वपूर्ण हथियार सौदे पूरे कर लिए जाएं। इसी कड़ी में अमेरिका से इजराइल को 60000 बम बेचने के एक संभावित सौदे की चर्चा भी हो रही है, जिसमें प्रत्येक बम का वजन 2000 पाउंड यानी लगभग 907 किलो है।
सैनिकों की संख्या और भर्ती की चुनौतियां
सैनिकों की संख्या को लेकर भी इजराइल के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) की मिलिट्री बैलेंस 2023 रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल के पास 1 लाख 69 हजार सक्रिय सैन्यकर्मी और लगभग 4 लाख 65 हजार रिजर्व सैनिक थे। इसके अलावा, करीब 8000 लोग अर्धसैनिक बलों में कार्यरत थे। इजराइल में 18 साल की उम्र से यहूदी, द्रूज और सर्कसियन युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, जबकि अरब इजराइलियों को इससे छूट दी गई है। जुलाई 2026 तक प्रभावी एक अस्थायी कानून के तहत पुरुषों के लिए सेवा की अवधि 32 महीने तय की गई है, जिसे 2029 में फिर से 30 महीने किया जाना है। महिलाओं के लिए यह अवधि 24 महीने है। हालांकि, सेना प्रमुख एयाल जमीर ने पुरुषों की सेवा अवधि को बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की है।
सेना में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यानी हरेदी यहूदियों की भर्ती का मुद्दा भी काफी गरमाया हुआ है। साल 1948 से धार्मिक शिक्षा लेने वाले हरेदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट मिलती रही थी, लेकिन 1998 में हाई कोर्ट ने इसे गैरकानूनी करार दिया था। 2024 में अदालत ने फिर से सरकार को उनकी भर्ती शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद सेना ने हजारों भर्ती नोटिस जारी किए, लेकिन उनका रिस्पॉन्स बहुत कम रहा। जुलाई 2025 में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भेजे गए 24000 नोटिसों में से केवल 1200 लोगों ने ही जवाब दिया था।
तीन साल से जारी बहु-मोर्चीय युद्ध
इजराइल पिछले तीन वर्षों से गाजा, लेबनान और ईरान के साथ सीधे या परोक्ष युद्ध में उलझा हुआ है। इसके साथ ही वेस्ट बैंक और सीरिया में भी उसकी सैन्य कार्रवाइयां लगातार जारी हैं। विशेषज्ञ हमजे अत्तार के अनुसार, वर्तमान संघर्ष को जारी रखने के लिए इजराइल के पास पर्याप्त हथियार भंडार मौजूद है, लेकिन भविष्य में किसी नए मोर्चे पर युद्ध की स्थिति में उसे और अधिक हथियारों और संसाधनों की आवश्यकता होगी।