इस्राइल की तुर्किये को चेतावनी: सीरिया में सैन्य विस्तार पर राजदूत बोले- हद पार कर दी गई है

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इस्राइल की तुर्किये को चेतावनी: सीरिया में सैन्य विस्तार पर राजदूत बोले- हद पार कर दी गई है
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अमेरिका में इस्राइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने तुर्किये की सैन्य गतिविधियों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने दावा किया है कि इस्राइल को स्पष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि तुर्किये सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी का बड़े स्तर पर विस्तार करने की योजना बना रहा है। लेइटर के अनुसार, इस कदम को पहले से तय समझौतों का उल्लंघन माना गया और इसे एक ऐसी सीमा बताया गया जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए था और 'द यरूशलम पोस्ट' के साथ एक विशेष बातचीत में लेइटर ने स्पष्ट किया कि इस्राइल तुर्किये या सीरिया के साथ युद्ध या तनाव नहीं चाहता, लेकिन जब समझौतों का उल्लंघन हुआ, तो कार्रवाई करना आवश्यक हो गया।

खुफिया जानकारी और समझौतों का उल्लंघन

राजदूत लेइटर ने बताया कि इस्राइल के पास मौजूद खुफिया जानकारी बहुत सटीक थी। उन्होंने कहा कि तुर्किये की योजना सीरिया में अपने सैन्य प्रभाव को काफी हद तक बढ़ाने की थी। इस गतिविधि को उन समझौतों के विपरीत माना गया जो क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए किए गए थे। लेइटर ने कहा कि जिन पक्षों को इस खुफिया जानकारी के बारे में पता होना चाहिए था, उन्हें सूचित कर दिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्राइल ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि यह कदम समझौतों का उल्लंघन होगा, और इसी के परिणामस्वरूप इस्राइल ने सीरिया में सैन्य कार्रवाई की।

अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला

इस्राइल द्वारा की गई यह कार्रवाई मंगलवार को अलेप्पो के पास सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर किए गए हवाई हमलों के रूप में सामने आई। लेइटर के मुताबिक, यह हमला तब किया गया जब तुर्किये ने इस्राइल की चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया। सीरियाई अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस एयरफील्ड पर कम से कम 8 हमले हुए। बाद में प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चला कि रनवे को काफी नुकसान पहुंचा है। इस घटनाक्रम पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इस्राइल ने अपनी बात साफ कर दी है कि ऐसा दोबारा न किया जाए।

राजनयिक पृष्ठभूमि और पेरिस की बैठक

लेइटर ने विस्तार से बताया कि तुर्किये का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान इस्राइल और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के प्रशासन के बीच बनी आपसी समझ के खिलाफ था। इस समझ का मुख्य उद्देश्य सीरिया में मौजूदा स्थिति को स्थिर रखना था और इन समझौतों की पुष्टि जनवरी 2026 में पेरिस में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भी की गई थी। इस बैठक में सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी, अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत टॉम बैरक, स्वयं येचिएल लेइटर, तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख गिल रीच और नेतन्याहू के सैन्य सचिव रोमन गोफमैन शामिल थे। रोमन गोफमैन वर्तमान में मोसाद के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

क्षेत्रीय नियंत्रण और सैन्य उपस्थिति का तुलनात्मक विवरण

राजदूत ने सीरिया में दोनों देशों की सैन्य उपस्थिति के अंतर को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस्राइल सीरिया में सुरक्षा क्षेत्र के तहत केवल 78 वर्ग मील के छोटे से क्षेत्र में मौजूद है। इसके विपरीत, तुर्किये ने पिछले कुछ वर्षों में उत्तरी सीरिया में धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की है और अब वह लगभग 3500 वर्ग मील क्षेत्र पर कब्जा जमाए हुए है। यह क्षेत्र सीरिया के कुल क्षेत्रफल का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा है। लेइटर ने तर्क दिया कि समझौतों का अर्थ यह था कि जिस तरह तुर्क आगे नहीं बढ़ेंगे, उसी तरह इस्राइल भी आगे नहीं बढ़ेगा और कोई भी पक्ष दूसरे को पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करेगा।

अमेरिकी रुख और ट्रंप की प्रतिक्रिया

अमेरिकी प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हुए लेइटर ने कहा कि अमेरिका के सीरिया मामलों के दूत टॉम बैरक को छोड़कर किसी भी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस्राइली हमले की निंदा नहीं की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रशासन की वर्तमान नीति पहले से तय स्थिति को बनाए रखने की है। यही कारण है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हमले की आलोचना नहीं की। लेइटर ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि सीरियाई सरकार इस्राइल के साथ सीधा टकराव नहीं चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि तुर्किये की नियोजित सैन्य कार्रवाई संभवतः सीरियाई लोगों पर थोपी गई थी।

तुर्किये और सीरिया के बयानों में विरोधाभास

लेइटर ने हमले के बाद तुर्किये और सीरिया द्वारा दिए गए बयानों में मौजूद अंतर की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सीरिया के विदेश मंत्री शैबानी ने स्वीकार किया था कि हमले से कुछ दिन पहले एक तुर्किये प्रतिनिधिमंडल सीरिया आया था, जबकि तुर्किये ने इस तरह की किसी भी यात्रा से इनकार किया। लेइटर ने कहा कि यह इन दोनों देशों का आपसी मामला है जिसे उन्हें सुलझाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो इस्राइल सीरिया के साथ सीधे संवाद को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है और वे पहले हुई आमने-सामने की बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

अंकारा के साथ संबंधों की चुनौतियां

तुर्किये के साथ संबंधों पर लेइटर ने कहा कि इस्राइल अंकारा के साथ बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन तुर्किये के नेताओं के बयान इसमें बड़ी बाधा हैं और उन्होंने तुर्किये के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस्राइल के खिलाफ दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की टिप्पणियों और विदेश मंत्री हाकान फिदान के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने इस्राइल को मानवता पर एक दाग बताया था। लेइटर ने अंत में कहा कि जब तक तुर्किये हमास के नेताओं की मेजबानी कर रहा है और हिजबुल्ला व हमास जैसे संगठनों को धन मुहैया करा रहा है, तब तक उसका लेबनान और सीरिया में प्रभाव बढ़ाना उचित नहीं है और उन्होंने उम्मीद जताई कि काश दोनों देशों के बीच संबंध फिर से दशकों पुराने दौर की तरह बेहतर हो पाते।

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