India Space Station: ISRO वैज्ञानिक ने बताया भारत का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष रोडमैप: 2027 तक मानव मिशन, 2035 तक स्पेस स्टेशन

India Space Station - ISRO वैज्ञानिक ने बताया भारत का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष रोडमैप: 2027 तक मानव मिशन, 2035 तक स्पेस स्टेशन
| Updated on: 12-Jan-2026 05:41 PM IST
इसरो के वैज्ञानिक डॉक्टर एस. वेंकटेश्वर शर्मा ने हाल ही में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम। के भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया है। उनकी चर्चा में PSLV-C62 मिशन की विफलता, EOS-N1 अन्वेषा उपग्रह का रणनीतिक महत्व, और 2035 तक भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल थीं। यह जानकारी भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित। करती है, भले ही हाल ही में एक मिशन को झटका लगा हो।

PSLV-C62 मिशन को लगा झटका

हाल ही में लॉन्च किया गया PSLV-C62 मिशन, जो 2026 का पहला मिशन था, लॉन्च यान में तकनीकी समस्याओं के कारण असफल घोषित कर दिया गया। यह 44. 4 मीटर ऊंचा और 260 टन वजनी चार चरणों वाला रॉकेट था, जिसे EOS-N-1 उपग्रह और कई सहयात्रियों को कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। डॉक्टर शर्मा ने इस झटके के बावजूद, इस वाहन के पीछे की इंजीनियरिंग पर जोर डाला, जिसमें ठोस और तरल चरण के संयोजन का उपयोग किया गया था। यह विफलता इसरो के लिए एक अस्थायी बाधा है, लेकिन यह अंतरिक्ष अन्वेषण की अंतर्निहित चुनौतियों को भी उजागर करती है, जहां जटिल प्रणालियों में छोटी सी भी खराबी बड़े परिणामों का कारण बन सकती है और इसरो ऐसी विफलताओं से सीखता है और भविष्य के मिशनों के लिए अपनी प्रणालियों को और मजबूत करता है।

EOS-N1 (अन्वेषा) उपग्रह का रणनीतिक महत्व

इस असफल मिशन का प्राथमिक पेलोड EOS-N1 (अन्वेषा) उपग्रह था, जो इसरो और डीआरडीओ का एक संयुक्त उद्यम था। इस उपग्रह को रणनीतिक और नागरिक दोनों क्षेत्रों की सेवा के लिए निर्मित किया गया था, जिसे उच्च-रिजॉल्यूशन मानचित्रण, पर्यावरण निगरानी और सर्वेक्षण के लिए डिज़ाइन किया गया था। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि नियंत्रण, विद्युत और मार्गदर्शन सहित प्रणाली का निर्माण इसरो ने। किया था, जबकि विशेष पेलोड का विकास डीआरडीओ ने निजी कंपनियों के सहयोग से किया था। इस उपग्रह को कम से कम पांच सालों तक संचालित करने और रणनीतिक अभियानों के लिए महत्वपूर्ण मौसम और निगरानी डेटा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था, जो भारत की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता।

इसकी क्षमताएं भारत को अपनी सीमाओं की बेहतर निगरानी करने और प्राकृतिक। आपदाओं के लिए अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने में मदद करतीं। इस तकनीकी समस्या से पहले, PSLV ने इसरो के भरोसेमंद वर्कहॉर्स के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली थी, जिसने मंगलयान और चंद्रयान-1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। डॉक्टर शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि 2047 तक अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इसका उत्पादन एचएएल, एल एंड टी और गोदरेज जैसी निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बार-बार किए गए परीक्षण और उपलब्ध मार्जिन पीएसएलवी को बेहद विश्वसनीय बनाते हैं और भारत के बेड़े में GSLV और आगामी SSLV भी शामिल हैं, जो मांग पर छोटे उपग्रहों को लॉन्च कर सकते हैं, जिससे इसरो की बहुमुखी प्रतिभा और विभिन्न प्रकार के मिशनों को पूरा करने की क्षमता प्रदर्शित होती है। यह निजी क्षेत्र की भागीदारी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और गति प्रदान करेगी, जिससे नवाचार और दक्षता बढ़ेगी।

गगनयान: भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की महत्वाकांक्षाएं

भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए, डॉक्टर शर्मा ने गगनयान कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इसरो का लक्ष्य 2026 की शुरुआत में पहली मानवरहित उड़ान का प्रक्षेपण करना है। तीन सफल मानवरहित मिशनों के बाद, भारत को 2027 में अंतरिक्ष यात्रियों को प्रक्षेपण करने की उम्मीद है। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि LVM3 प्रक्षेपण यान का 'मानव परीक्षण' किया जा रहा है, जिसके लिए काफी उच्च विश्वसनीयता और आपातकालीन प्रणालियों की आवश्यकता होती है और उन्होंने अंतरिक्ष यात्री सुभांशु शुक्ला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 14 दिनों के प्रवास के दौरान प्राप्त अनुभव को कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यह मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करेगी जिनके पास यह उन्नत तकनीक है, जो देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का एक प्रमाण है।

2035 तक भारत अंतरिक्ष स्टेशन (BSS)

जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) 2030 के आसपास सेवानिवृत्त होने वाला है, डॉक्टर शर्मा ने पुष्टि की कि भारत अंतरिक्ष स्टेशन (BSS) 2035 तक पूरा होने की राह पर है। उन्होंने अंतरिक्ष मलबे की बढ़ती चिंताओं और अंतरिक्ष के 'युद्धक्षेत्र' बनने की संभावना पर भी बात की, यह कहते हुए कि अंतरिक्ष संपत्तियां अब नेविगेशन, इमेजिंग और रणनीतिक सुरक्षा के अभिन्न अंग हैं। एक स्वतंत्र अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण भारत को अंतरिक्ष में अपनी दीर्घकालिक उपस्थिति स्थापित करने और वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और पृथ्वी अवलोकन के लिए एक स्थायी मंच प्रदान करने में सक्षम करेगा। यह कदम भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने। में मदद करेगा और अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करेगा।

अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता

डॉक्टर शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत निम्न कक्षा निगरानी में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। 2035 तक बीएसएस और नियोजित चंद्र लैंडिंग के साथ, देश पूरी तरह से एक अलग कक्षा में होगा। यह आत्मनिर्भरता न केवल भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उसे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करेगी। अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं का विकास करके, भारत अन्य देशों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। और अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम देने की क्षमता प्राप्त कर रहा है। यह दीर्घकालिक दृष्टि भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग के भविष्य को। आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार करती है।

युवा पीढ़ी को प्रेरणा: अंतरिक्ष में करियर

करियर पर विचार करते हुए, डॉक्टर शर्मा ने कई गौरवपूर्ण क्षणों का उल्लेख किया, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को परिभाषित किया है। इनमें आर्यभट (1975) शामिल है, जो भारत का पहला उपग्रह था जिसे 100 इंजीनियरों की एक छोटी टीम द्वारा बनाया गया था। चंद्रयान-1 (2008) चंद्रमा पर पानी की खोज करने वाला पहला मिशन था, जबकि मार्स ऑर्बिटर मिशन (2014) प्रति किलोमीटर मात्र आठ रुपये की लागत से पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचा। हाल ही में, चंद्रयान-3 (2024) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक और मानक स्तर की लैंडिंग की। युवा भारतीयों को सलाह देते हुए, डॉक्टर शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को केवल इंजीनियरों से कहीं अधिक लोगों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'चाहे आप विज्ञान, वाणिज्य या कला की पढ़ाई करें, तकनीशियन और प्रशासक से लेकर गृहकार्य तक, हर भूमिका अंतरिक्ष क्षेत्र का हिस्सा है। अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करें, अपने जुनून का अनुसरण करें और एक अच्छे नागरिक बनें। ' यह संदेश युवाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में विविध अवसरों का पता लगाने और देश के भविष्य में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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