भारत की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में एक्सपोर्ट के मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आईटीसी, मारुति सुजुकी और डाबर जैसी दिग्गज कंपनियों ने विदेशी बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करते हुए करोड़ों डॉलर की कमाई की है। इन कंपनियों ने न केवल अपने निर्यात में बढ़ोतरी की, बल्कि नेट फॉरेन करेंसी के मामले में भी एक सकारात्मक स्थिति प्राप्त की है और यह सफलता ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय कंपनियों ने अपनी रणनीतियों के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
निर्यात कमाई में 29 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल
देश की 20 बड़ी पब्लिक लिस्टेड कंपनियों पर की गई एक हालिया स्टडी से पता चला है कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में इन कंपनियों की कुल एक्सपोर्ट फॉरेक्स कमाई में 29 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह पिछले चार सालों में दर्ज की गई सबसे तेज बढ़ोतरी है और इस वृद्धि के साथ ही इन कंपनियों की कुल निर्यात कमाई 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2026 में इन कंपनियों की कुल फॉरेक्स अर्निंग्स 1,08,269 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। इससे पहले वित्त वर्ष 2022 में 55 प्रतिशत का उछाल देखा गया था, लेकिन वह वित्त वर्ष 2021 के कम बेस के कारण था जब महामारी ने व्यापार को प्रभावित किया था।
चुनौतियों के बीच लोकलाइजेशन का सहारा
वित्त वर्ष 2026 में यह शानदार ग्रोथ कई बड़ी चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई है। कंपनियों को अमेरिकी टैरिफ और भारतीय रुपये की कीमत में आई गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रुपये के कमजोर होने से आमतौर पर आयात महंगा हो जाता है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। हालांकि, इन कंपनियों ने लोकलाइजेशन यानी स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाकर इन दबावों का डटकर मुकाबला किया। ज्यादा एक्सपोर्ट और कम आयात निर्भरता की वजह से ये कंपनियां भारी इंपोर्ट बिल के बावजूद कुल मिलाकर नेट फॉरेक्स पॉजिटिव बनी रहीं।
प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन और विदेशी मुद्रा भंडार
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, आईटीसी, मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर इंडिया, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, हीरो मोटोकॉर्प, डाबर, एशियन पेंट्स, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, वोल्टास और यूनाइटेड स्पिरिट्स जैसी कंपनियों ने विदेशी मुद्रा की कमाई में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों का रॉ मटीरियल, कंपोनेंट्स, स्पेयर पार्ट्स और कैपिटल गुड्स के इंपोर्ट पर कुल फॉरेक्स खर्च 1,04,361 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके मुकाबले उनकी कमाई 1,08,269 करोड़ रुपये रही, जो उनके मजबूत निर्यात प्रदर्शन को दर्शाती है।
रेवेन्यू में एक्सपोर्ट का बढ़ता हिस्सा
स्टडी के मुताबिक, मारुति सुजुकी, मैरिको, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, हुंडई, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो और ब्लू स्टार जैसी कंपनियों ने अपने कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट के योगदान को 1 से 5 प्रतिशत अंक तक बढ़ाया है। मारुति सुजुकी की कमाई वित्त वर्ष 2025 में 14 प्रतिशत थी जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई। इसी तरह हुंडई मोटर्स की कमाई 21 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत और बजाज ऑटो की 32 प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई। आईटीसी ने अपनी 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी बरकरार रखी, जबकि मैरिको ने 9 प्रतिशत से 11 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।
कॉर्पोरेट दिग्गजों की रणनीति
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर अतुल खन्ना ने बताया कि रुपये की कीमत घटने और इनपुट कॉस्ट बढ़ने जैसी चुनौतियों के बावजूद कंपनी नए इलाकों और प्रोडक्ट कैटेगरी को जोड़कर अपना एक्सपोर्ट बढ़ाना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि हर साल लोकलाइजेशन 1 से 2 प्रतिशत अंक बढ़ेगा, जिससे मार्जिन में सुधार होगा। वहीं, आईटीसी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वह फॉरेक्स कमाई को प्राथमिकता देती है। कंपनी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को परखने और मुनाफे वाली ग्रोथ के लिए विदेशी बाजारों से जुड़ना अनिवार्य है।
शराब और ऑटो सेक्टर में बड़ी कामयाबी
शराब बनाने वाली कंपनी रैडिको खेतान के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक खेतान ने जानकारी दी कि उनकी कंपनी अब 100 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट कर रही है। वॉल्यूम के हिसाब से यह कुल बिक्री का 5 से 6 प्रतिशत है, लेकिन वैल्यू के मामले में इसकी हिस्सेदारी काफी अधिक है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में रैडिको खेतान की एक्सपोर्ट से होने वाली फॉरेक्स कमाई 25 प्रतिशत बढ़कर 327 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर, हुंडई इंडिया ने लागत कम करने के लिए लोकलाइजेशन पर जोर दिया। कंपनी ने एजीएम बैटरी, फ्रंट कैमरे, फ्यूल डिलीवरी पाइप और स्टैंडर्ड फास्टनर जैसे महंगे पार्ट्स को भारत में ही बनाना शुरू किया है, जिससे उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिली है।