जयपुर में बुलडोजर का खौफ: जेडीए के नोटिस के बाद दुकानों पर 60 प्रतिशत तक की सेल

Add as Preferred Source on Google News →
विज्ञापन
जयपुर में बुलडोजर का खौफ: जेडीए के नोटिस के बाद दुकानों पर 60 प्रतिशत तक की सेल
विज्ञापन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों न्यू सांगानेर रोड से लेकर सोडाला तक के व्यापारियों में भारी दहशत का माहौल है और जहां एक ओर पूरा शहर दीपावली के त्योहार की तैयारियों में जुटा है, वहीं इस इलाके के दुकानदार अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यू सांगानेर रोड से सोडाला तक की 260 दुकानों को अतिक्रमण माना है। इस अदालती आदेश के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संबंधित दुकानदारों को तोड़फोड़ का नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस के मिलते ही व्यापारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई है और उन्होंने अपने नुकसान को कम करने के लिए दुकानों पर 30 से 60 प्रतिशत तक की भारी सेल लगा दी है।

जेडीए की कार्रवाई और डिमार्केशन का असर

हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद जेडीए की टीम ने इलाके में सक्रियता बढ़ा दी है। जेडीए ने न केवल 260 दुकानों को तोड़ने का नोटिस जारी किया है, बल्कि मौके पर पहुंचकर डिमार्केशन यानी चिह्नीकरण का कार्य भी पूरा कर लिया है। दुकानों के बाहर लगे लाल निशानों ने व्यापारियों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है। जेडीए की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में यहां बुलडोजर चलना तय है। इसी डर के कारण व्यापारियों ने आनन-फानन में अपना स्टॉक खाली करना शुरू कर दिया है ताकि कम से कम लागत तो वसूली जा सके।

फिक्स रेट वाली दुकानों पर उमड़ी भीड़

न्यू सांगानेर रोड और सोडाला की ये दुकानें आमतौर पर अपने फिक्स रेट यानी तय कीमतों के लिए जानी जाती हैं। यहां सामान्य दिनों में मोलभाव की गुंजाइश बहुत कम होती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जिन दुकानों पर कभी एक रुपये की छूट नहीं मिलती थी, वहां अब 30 से 60 प्रतिशत तक के डिस्काउंट के बोर्ड लटके हुए हैं। त्योहारों से ठीक पहले इतनी भारी सेल देखकर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग सस्ते दामों पर कपड़े और अन्य सामान खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन ग्राहकों की इस भीड़ के बीच दुकानदारों के चेहरों पर छाई मायूसी साफ देखी जा सकती है।

लाखों का स्टॉक और लागत निकालने की चुनौती

व्यापारियों के लिए यह समय दोहरी मार जैसा है। दीपावली के सीजन को देखते हुए दुकानदारों ने लाखों रुपये का नया माल स्टॉक किया था। कपड़े की दुकान के मालिक सोनू कुमार ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने त्योहार के लिए लाखों रुपये का निवेश किया था, लेकिन जेडीए के नोटिस ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। सोनू कुमार के मुताबिक, वह हमेशा फिक्स रेट पर ही माल बेचते थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि मुनाफा कमाना तो दूर, बस किसी तरह लागत निकल जाए वही बहुत है। उन्होंने बताया कि लाखों रुपये के माल को मलबे में दबने से बचाने के लिए उन्होंने 30 प्रतिशत की सेल शुरू की है।

त्योहारी सीजन में कारोबारियों की चिंता

एक अन्य दुकानदार ने बताया कि हर साल वे त्योहार से पहले बड़ी उम्मीद के साथ लाखों रुपये का माल खरीदते थे और वह आसानी से बिक भी जाता था। लेकिन इस बार जेडीए के नोटिस ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। 30 प्रतिशत की सेल लगाने के बावजूद पूरा माल नहीं बिक पा रहा है और समय कम बचा है। व्यापारियों को डर है कि अगर समय रहते माल नहीं बिका, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। बाजार में भीड़ तो है, लेकिन व्यापारियों के मन में केवल अपने भविष्य और उजड़ते कारोबार की चिंता है।

प्रताप सिंह खाचरियावास ने किया विरोध

इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने जेडीए की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जनता के मकानों और दुकानों को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, जो सरासर गलत है। खाचरियावास ने आरोप लगाया कि सरकार इन लोगों को कोई मुआवजा भी नहीं दे रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ खुलकर विरोध करें। खाचरियावास ने कहा कि वह खुद जनता की आवाज उठाएंगे और इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि व्यापारियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए।

विज्ञापन