बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जहां भारत के विदेश मंत्री एस और जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक ने एक-दूसरे से मुलाकात की और गर्मजोशी से हाथ मिलाया। यह मुलाकात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार समारोह में हुई, जहां दोनों नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। इस घटना को भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर मई में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। यह पहली बार है जब इतने उच्च स्तर के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे से। बातचीत की और हाथ मिलाया है, जिससे कूटनीतिक हलकों में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।
कूटनीतिक महत्व और पृष्ठभूमि
यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद। से भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में काफी खिंचाव रहा है। इस ऑपरेशन के बाद, दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क लगभग न के बराबर हो गए थे। ऐसे में, खालिदा जिया के अंतिम संस्कार जैसे एक गैर-राजनीतिक मंच पर दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों का मिलना और हाथ मिलाना, भविष्य में संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यह दर्शाता है कि भले ही राजनीतिक मतभेद गहरे हों, मानवीय संवेदनाएं और साझा दुख के क्षण कूटनीतिक दूरियों को कुछ हद तक कम कर सकते हैं और यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच क्रिकेट के मैदान पर भी तनाव देखा गया था, जिसने इस घटना को और भी प्रतीकात्मक बना दिया है।
क्रिकेट मैदान पर कड़वाहट के बाद सौहार्द
इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे पहले एशिया कप क्रिकेट मैच के दौरान भारतीय टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था और इस घटना पर काफी विवाद हुआ था और इसने दोनों देशों के बीच खेल संबंधों में कड़वाहट को उजागर किया था। इतना ही नहीं, सीरीज जीतने के बाद भी भारतीय टीम ने एसीसी (एशियाई। क्रिकेट परिषद) के प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख होने के साथ-साथ पाकिस्तान सरकार में मंत्री भी हैं। क्रिकेट के मैदान पर दिखी इस कड़वाहट के ठीक बाद, ढाका में जयशंकर और सादिक का हाथ मिलाना एक सुखद बदलाव और कूटनीतिक परिपक्वता का संकेत देता है, जो यह दर्शाता है कि राजनीति और मानवीय संबंध अलग-अलग पटरियों पर चल सकते हैं।
खालिदा जिया का अंतिम संस्कार: एक ऐतिहासिक जनसैलाब
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को मंगलवार सुबह 80 वर्ष की आयु में निधन के बाद, आज शाम 5 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उन्हें संसद परिसर स्थित जिया उद्यान में उनके पति और बांग्लादेश। के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया गया। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पूरे बांग्लादेश से लगभग 10 लाख लोग जुटे, जिसने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा जनाजा बना दिया। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में लोगों का किसी अंतिम संस्कार में शामिल होना पहले कभी नहीं देखा गया था। यह जनसैलाब खालिदा जिया की लोकप्रियता और बांग्लादेश की राजनीति में उनके गहरे प्रभाव को दर्शाता है।
विभिन्न वर्गों की भागीदारी
खालिदा जिया के जनाजे में समाज के हर वर्ग के लोगों ने भाग लिया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार डॉ. मुहम्मद यूनुस, अन्य सलाहकार, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता, अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि और लाखों आम नागरिक इस दुखद अवसर पर एकजुट हुए। यह उनकी राजनीतिक विरासत और देश के प्रति उनके योगदान का प्रमाण। था कि इतने सारे लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए। जनाजे में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग ढाका पहुंचे थे, जिनमें नोआखाली, फेनी, ब्राह्मणबरिया, भोला, बोगुड़ा और मयमनसिंह जैसे जिलों से हजारों की संख्या में लोग शामिल थे। कई लोग काले बैज पहनकर शोक प्रकट करते नजर आए, जो उनके प्रति गहरे सम्मान और दुख का प्रतीक था।
बांग्लादेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय शोक
खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है और इस अवधि के दौरान, पूरे देश में सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे। यह निर्णय खालिदा जिया के सम्मान में लिया गया है, जिन्होंने बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह पिछले करीब 20 दिनों से अस्पताल में वेंटिलेटर पर थीं। और उनके स्वास्थ्य को लेकर देश भर में चिंता का माहौल था। उनके निधन से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।
जयशंकर की तारिक रहमान से मुलाकात
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विशेष रूप से ढाका पहुंचे थे। भारत सरकार का मानना है कि खालिदा जिया की सोच और उनकी राजनीतिक विरासत भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को भविष्य में भी मजबूती देती रहेगी और इसी भावना के तहत, डॉ. जयशंकर को खास तौर पर ढाका भेजा गया ताकि वे इस दुखद अवसर पर। भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें और बांग्लादेश के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त कर सकें। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, डॉ. जयशंकर सुबह करीब 11:30 बजे ढाका पहुंचे। यह यात्रा बहुत कम समय की और अचानक तय की गई थी, जिसका मुख्य मकसद सिर्फ खालिदा जिया को अंतिम सम्मान देना था। ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के। वरिष्ठ अधिकारियों और बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने उनका स्वागत किया।
ढाका पहुंचने के बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से भी मुलाकात की, जो खालिदा जिया के बेटे हैं। जयशंकर ने 'X' पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं और लिखा, "ढाका पहुंचने के बाद, मैंने बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की, जो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे हैं और मैंने उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का एक निजी पत्र सौंपा और भारत सरकार व भारत की जनता की तरफ से संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुझे पूरा विश्वास है कि बेगम खालिदा जिया के विचार और आदर्श, भविष्य में हमारे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने का रास्ता दिखाएंगे। " यह मुलाकात भारत द्वारा बांग्लादेश के आंतरिक राजनीतिक मामलों में सम्मानजनक। भागीदारी और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इच्छा को दर्शाती है।
पाकिस्तानी स्पीकर का आगमन
खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सदार अयाज सादिक बुधवार सुबह ढाका पहुंचे और सदार अयाज सादिक को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त और बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिसीव किया। उनकी उपस्थिति भी इस बात का संकेत देती है कि खालिदा जिया का निधन क्षेत्रीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने पड़ोसी देशों के नेताओं को एक साथ लाया। यह घटनाक्रम क्षेत्रीय सहयोग और मानवीय संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है, भले ही राजनीतिक तनाव मौजूद हों।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
खालिदा जिया का पार्थिव शरीर उनके जनाजे के लिए ढाका के मानिक मिया एवेन्यू लाया गया और इससे पहले, उनका पार्थिव शरीर उनके बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान के गुलशन स्थित आवास से सुबह करीब 11 बजे राजकीय सम्मान और कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ निकाला गया। यह आवास खालिदा जिया के निजी घर फिरोजा के पास ही स्थित है। तारीक रहमान के आवास पर परिवार के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारों और पार्टी नेताओं ने खालिदा जिया को अंतिम श्रद्धांजलि दी और इसके बाद, उनका पार्थिव शरीर मानिक मिया एवेन्यू ले जाया गया, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने उन्हें अंतिम दर्शन किए और नमाज-ए-जनाजा में शामिल हुए। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हुई, जिसमें बांग्लादेश के लोगों ने अपनी प्रिय नेता को भावभीनी विदाई दी।