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मध्य पूर्व तनाव: राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान

मध्य पूर्व तनाव: राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों पर भारत सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उभरते हुए घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विदेश मंत्री के अनुसार, विभिन्न संबंधित मंत्रालय एक प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आपस में निरंतर समन्वय कर रहे हैं। भारत ने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री द्वारा स्थिति की निरंतर निगरानी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा को सूचित किया कि भारत सरकार मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर अत्यंत गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। सरकार ने 20 फरवरी को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। जयशंकर के अनुसार, भारत ने सभी संबंधित पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने का आग्रह किया है। सरकार का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है, न कि सैन्य संघर्ष से।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और हताहतों का विवरण

सुरक्षा स्थिति पर विवरण देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि इस संघर्ष का प्रभाव भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। उन्होंने दुखद जानकारी साझा की कि एक व्यापारिक जहाज पर तैनात दो भारतीय नाविकों की इस संघर्ष के दौरान मृत्यु हो गई है, जबकि एक अन्य नाविक अभी भी लापता है। जयशंकर ने कहा कि सरकार लापता नागरिक का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके अतिरिक्त, ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और श्रमिक मौजूद हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव पर चिंता

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिरता को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत के लिए तेल और गैस का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होने की आशंका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। जयशंकर के अनुसार, अस्थिरता का यह माहौल न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों और सामान्य आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

तेहरान से छात्रों की सुरक्षित निकासी

ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए जयशंकर ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है। दूतावास ने ईरान में पढ़ रहे कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जानकारी दी कि इन छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते भारत वापस लाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। दूतावास वर्तमान में हाई अलर्ट मोड पर है और भारतीय समुदाय की सहायता के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और संघर्ष का विस्तार

विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि मध्य पूर्व में संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जो अब अन्य देशों तक भी फैल गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा हालातों में आई इस गिरावट से विनाश बढ़ रहा है और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और भारत एक पड़ोसी क्षेत्र होने के नाते इस अस्थिरता को लेकर चिंतित है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपील जारी रखेगा और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

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