सिंगापुर में नए इंडिया हाउस की नींव: जयशंकर ने भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी को दी नई ऊंचाई

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
सिंगापुर में नए इंडिया हाउस की नींव: जयशंकर ने भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी को दी नई ऊंचाई
विज्ञापन

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी कॉम्प्लेक्स यानी इंडिया हाउस की आधारशिला रखी और इस महत्वपूर्ण अवसर पर सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन भी उनके साथ मौजूद रहे। जयशंकर ने इस कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि यह नया परिसर भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक नए और गौरवशाली दौर का प्रतीक बनेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस नए बुनियादी ढांचे के निर्माण से सिंगापुर में रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय को और भी बेहतर और सुलभ सेवाएं प्रदान करने में बड़ी मदद मिलेगी। यह नया परिसर दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनयिक और सांस्कृतिक संबंधों का एक जीवंत प्रमाण होगा।

मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक और रणनीतिक चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर सिंगापुर की अपनी यात्रा के दौरान चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लेने के लिए वहां पहुंचे हैं। यह उच्च स्तरीय बैठक गुरुवार को आयोजित होने वाली है। इस बैठक से पहले जयशंकर और उनके सिंगापुर के समकक्ष विवियन बालाकृष्णन के बीच एक द्विपक्षीय मुलाकात हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत और सिंगापुर के आपसी रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों और उनके प्रभाव पर भी विस्तार से अपने विचार साझा किए। जयशंकर ने जानकारी दी कि वह गुरुवार को होने वाली मुख्य बैठक में भी सिंगापुर के विदेश मंत्री के साथ इन चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। इस चौथी बैठक में जयशंकर के अलावा भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल होंगे।

भारत-सिंगापुर आर्थिक संबंधों का महत्व

भारत और सिंगापुर ने वर्ष 2015 में अपने द्विपक्षीय रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदला था। तब से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटल तकनीक, रक्षा-सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और नई तकनीकों में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। सिंगापुर आसियान देशों में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वह भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत भी बना हुआ है। इसके अलावा सिंगापुर भारत के बाहरी वाणिज्यिक कर्ज और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बड़े स्रोतों में शामिल है। व्यापारिक आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024-25 में सिंगापुर भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। इस अवधि के दौरान भारत ने सिंगापुर से 21 अरब 20 करोड़ डॉलर का सामान आयात किया और 14 अरब 40 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिंगापुर का भारत में सालाना निवेश 10 अरब से 15 अरब डॉलर के बीच रहा है।

सिंगापुर में भारतीय समुदाय की भूमिका

सिंगापुर की सामाजिक और आर्थिक संरचना में भारतीय समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है। सिंगापुर की 2020 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय मूल के लोग देश की 40 लाख 40 हजार निवासी आबादी का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके अलावा सिंगापुर में करीब 16 लाख 40 हजार विदेशी नागरिक रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों में छात्र और वित्तीय सेवाओं, आईटी, निर्माण और समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर लोग शामिल हैं और एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि तमिल भाषा सिंगापुर की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक है। इसके अलावा अंग्रेजी, मंदारिन चीनी और मलय वहां की आधिकारिक भाषाएं हैं। नया चांसरी कॉम्प्लेक्स इस जीवंत समुदाय की जरूरतों को पूरा करने और भारत-सिंगापुर के बीच जन-जन के संपर्क को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

विज्ञापन