सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग सुरक्षा सम्मेलन के दौरान जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने चीन द्वारा लगाए गए आरोपों का अत्यंत कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है और कोइजुमी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बात रखी कि जापान को नया सैन्यवाद कहना पूरी तरह से गलत और निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जापान की रक्षा नीतियां केवल अपनी सुरक्षा के लिए हैं और जापान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, जो उसे सैन्यवादी कहलाने से अलग करता है।
परमाणु हथियारों का अंतर और चीन की सैन्य शक्ति
रक्षा मंत्री कोइजुमी ने चीन के आरोपों का जवाब देते हुए परमाणु हथियारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बिना सीधे तौर पर चीन का नाम लिए उल्लेख किया कि यह विडंबना है कि जापान को सैन्यवादी कहा जा रहा है, जबकि क्षेत्र में एक ऐसा देश मौजूद है जिसके पास बड़ी संख्या में परमाणु हथियार और रणनीतिक बमवर्षक विमान (स्ट्रेटेजिक बॉम्बर) हैं। विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास वर्तमान में 600 से अधिक परमाणु हथियार मौजूद हैं और उसने इस संख्या को 1000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कोइजुमी ने कहा कि जापान के पास ऐसे कोई हथियार नहीं हैं, फिर भी उस पर सैन्यवाद का आरोप लगाना हैरानी की बात है।
प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व में रक्षा नीति में बदलाव
जापान की वर्तमान सुरक्षा और रक्षा नीति में यह मजबूती प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व में देखी जा रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान ने एक शांतिवादी नीति अपनाई थी, लेकिन अब ताकाइची सरकार देश की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक प्राथमिकता दे रही है। अमेरिका के समर्थन के साथ जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। चीन लगातार जापान की इस नीति की आलोचना करता रहा है और बीजिंग का कहना है कि जापान का यह रुख एशिया में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ताइवान मुद्दा और जापान-चीन के बीच बढ़ता तनाव
जापान और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव पिछले साल नवंबर में उस समय और अधिक बढ़ गया था, जब प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो जापान सैन्य दखल दे सकता है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा मानता है। कोइजुमी ने कहा कि चीन अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है, लेकिन इस बारे में पूरी जानकारी साझा नहीं करता। उन्होंने चीन की सैन्य गतिविधियों को जापान के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
शांगरी-ला डायलॉग का महत्व और चीन की अनुपस्थिति
शांगरी-ला डायलॉग एशिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा सम्मेलन है, जिसमें दुनिया भर के लगभग 45 देशों के मंत्री और विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। इस बार के सम्मेलन में चीन ने एक छोटा प्रतिनिधिमंडल भेजा और लगातार दूसरे साल उसके रक्षा मंत्री डोंग जुन इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। कोइजुमी ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि इस बार चीनी रक्षा मंत्री से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी और उन्होंने अंत में दोहराया कि जापान हमेशा से एक शांति पसंद देश रहा है और दुनिया भर में उसकी यही पहचान है, जिसे कुछ आरोपों से नहीं बदला जा सकता।