Pakistan Cricket Team: जेसन गिलेस्पी ने पीसीबी पर लगाए गंभीर आरोप, कहा - कोच रहते मुझे किया गया अपमानित
Pakistan Cricket Team - जेसन गिलेस्पी ने पीसीबी पर लगाए गंभीर आरोप, कहा - कोच रहते मुझे किया गया अपमानित
ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व खिलाड़ी और शानदार तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी ने पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच। पद को सिर्फ 8 महीने के अंदर छोड़ने के अपने फैसले को लेकर पहली बार खुलकर बयान दिया है। इस बयान में उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे एक बार फिर पीसीबी के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े हो गए हैं और गिलेस्पी ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल के दौरान पीसीबी ने कई ऐसे फैसले लिए जो उन्हें अपमानित करने वाले थे, जिसके चलते उन्हें यह पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
पीसीबी के अजीबोगरीब फैसले और गिलेस्पी का खुलासा
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अक्सर अपने अजीबोगरीब फैसलों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर चर्चा में रहता है, जिसके कारण उसे अक्सर वैश्विक क्रिकेट समुदाय में आलोचना का सामना करना पड़ता है। अब इसी कड़ी में एक और नया खुलासा सामने आया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व खिलाड़ी और बेहतरीन तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी, जिन्होंने संन्यास के बाद कोचिंग की दुनिया में कदम रखा था, उन्होंने पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच का पद संभालने के सिर्फ 8 महीनों के अंदर ही इस्तीफा दे दिया था। उस समय उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों पर खुलकर बात नहीं की थी, लेकिन अब उन्होंने इस चुप्पी को तोड़ते हुए पीसीबी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और गिलेस्पी के इस बयान से पीसीबी की अंदरूनी खामियां एक बार फिर उजागर हुई हैं।सहायक कोच को हटाने पर नहीं ली सलाह
जेसन गिलेस्पी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फैंस के साथ बातचीत के दौरान अपने इस्तीफे के पीछे के कारणों का खुलासा किया। जब उनसे पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच का पद छोड़ने के पीछे का कारण पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पीसीबी ने सहायक कोच टिम नीलसन को उनके पद से हटाने का फैसला किया था, लेकिन इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले उनसे किसी भी तरह की बातचीत नहीं की गई। गिलेस्पी ने इस बात पर जोर दिया कि हेड कोच के तौर पर उन्हें यह स्थिति बिल्कुल भी सही नहीं लगी। उनका मानना था कि एक हेड कोच होने के नाते ऐसे फैसलों में उनकी राय लेना अनिवार्य था, लेकिन पीसीबी ने उन्हें पूरी तरह से दरकिनार कर दिया।अपमानित महसूस करने के अन्य कारण
गिलेस्पी ने केवल सहायक कोच के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि अन्य कई मुद्दों पर भी अपमानित महसूस करने की बात कही। उन्होंने बताया कि टिम नीलसन के मामले के अलावा भी कई और मुद्दे थे जहां उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। हालांकि, उन्होंने उन अन्य मुद्दों का विस्तृत विवरण नहीं दिया, लेकिन उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि पीसीबी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण थे। इन मुद्दों में संभवतः टीम चयन के दौरान उनके अधिकारों का हनन, कोचिंग स्टाफ से संबंधित अन्य निर्णय, या बोर्ड के साथ संचार की कमी शामिल हो सकती है। इन लगातार अपमानजनक स्थितियों के कारण ही गिलेस्पी ने पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच की पोजीशन को छोड़ने का कठिन फैसला लिया।गिलेस्पी का संक्षिप्त कार्यकाल और टीम का प्रदर्शन
जेसन गिलेस्पी ने पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच के तौर पर सिर्फ 8 महीने का अपना कार्यकाल पूरा किया था। इस संक्षिप्त अवधि के दौरान, पाकिस्तानी टीम को कुछ मिश्रित परिणाम देखने को मिले और उनके कार्यकाल की शुरुआत में, पाकिस्तानी टीम को अपने घर पर बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा था, जो एक निराशाजनक प्रदर्शन था। हालांकि, इसके बाद टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने घर पर खेली गई तीन मैचों की टेस्ट सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया, जो एक उल्लेखनीय वापसी थी। यह दर्शाता है कि गिलेस्पी के मार्गदर्शन में टीम ने कुछ सकारात्मक प्रदर्शन भी किए, लेकिन आंतरिक मुद्दों ने उनके कार्यकाल को छोटा कर दिया।पीसीबी से बिगड़े रिश्ते और चयन के अधिकार
गिलेस्पी के कार्यकाल के दौरान उनके और पीसीबी के बीच रिश्ते कुछ अच्छे नहीं थे। उन्होंने बताया कि चयन के दौरान उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए, जिससे उन्हें टीम के फैसलों में अपनी पूरी भूमिका निभाने में बाधा महसूस हुई और इसके अलावा, कोचिंग स्टाफ को लेकर लिए गए फैसलों में भी उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया, जिससे उन्हें लगातार अपमानित महसूस हुआ। यह स्थिति किसी भी हेड कोच के लिए काम करना मुश्किल बना देती है, खासकर जब उन्हें टीम के प्रदर्शन के लिए जवाबदेह ठहराया जाता है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी बात नहीं सुनी जाती।अजहर महमूद का भी हटना
जेसन गिलेस्पी के पाकिस्तानी टेस्ट टीम के हेड कोच का पद छोड़ने के बाद, पीसीबी ने अपने पूर्व खिलाड़ी अजहर महमूद को टेस्ट टीम का नया हेड कोच नियुक्त किया था। हालांकि, यह नियुक्ति भी ज्यादा समय तक नहीं चली। कुछ ही दिनों पहले, अजहर महमूद को भी उनके पद से हटाने का फैसला लिया गया, जिससे एक बार फिर पीसीबी की अस्थिर और लगातार बदलती हुई कोचिंग नीतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं और यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पीसीबी में कोचिंग स्टाफ को लेकर स्थिरता की कमी है और बोर्ड लगातार अपने फैसलों को बदलता रहता है, जिससे टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गिलेस्पी के खुलासे और महमूद के हटने से पीसीबी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।