ईरान से हॉर्मुज पर क्यों नहीं हो पाई डील? जेडी वेंस ने बताई अंदर की बात

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ईरान से हॉर्मुज पर क्यों नहीं हो पाई डील? जेडी वेंस ने बताई अंदर की बात
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ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों के बीच फिर से शुरू हुई गोलाबारी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन कारणों का खुलासा किया है जिनकी वजह से शांति समझौता सिरे नहीं चढ़ सका। वेंस के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई और इस विफलता के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है और दोनों ओर से सैन्य कार्रवाइयां शुरू हो गई हैं। ईरान द्वारा हॉर्मुज में जहाजों पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका ने भी पलटवार करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर हवाई हमले किए हैं।

शांति समझौते की शर्तें और विफलता का कारण

जेडी वेंस ने बताया कि ईरान के साथ प्रस्तावित डील बहुत ही स्पष्ट और सीधी थी और उन्होंने दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पहले ही खत्म हो चुका है और उनकी पारंपरिक सेना की क्षमता को भी काफी हद तक कम कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से दी गई डील की मुख्य शर्त यह थी कि यदि ईरान जहाजों पर गोलाबारी करना बंद कर देता है, तो अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा लेगा। वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि वे जहाजों पर बम और गोले दागना जारी रखेंगे, तो अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा जोरदार पलटवार करेगा। हालांकि, इस बातचीत के बीच ही 24 घंटे पहले ईरान ने फिर से जहाजों पर गोलाबारी शुरू कर दी, जिससे पूरी डील विफल हो गई।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने ईरान को बहुत साफ शब्दों में संदेश दिया है कि Strait of Hormuz हर हाल में खुला रहना चाहिए। यह रास्ता न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। विश्व की ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता है। वेंस ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने हॉर्मुज को बंद करने का कोई भी प्रयास किया, तो अमेरिकी फौज इसका कड़ा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि ईरानियों को यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि उनके पास केवल दो विकल्प हैं: या तो वे शांति की शर्तों को मानें या फिर उस सैन्य कार्रवाई का सामना करें जो हाल ही में उनके खिलाफ की गई है।

ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कार्रवाई

यूएस सेंट्रल कमांड फोर्सेस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना प्रमुख के निर्देशों पर ईरान के खिलाफ नए सिरे से हमले शुरू कर दिए गए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिसके जरिए वह हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही को खतरे में डालता है और अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर स्वतंत्र रूप से चल रहे जहाजों पर किए गए हालिया हमलों के लिए ईरान पूरी तरह जिम्मेदार है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड अब उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जहां से ईरान अपनी आक्रामक गतिविधियों को अंजाम देता है। वेंस के अनुसार, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों और समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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