झारखंड में सुरक्षाबलों और पुलिस को माओवादियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। राज्य के धनबाद जिले से पुलिस ने 1 करोड़ रुपये से अधिक के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड पुलिस एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है, क्योंकि वह माओवादी संगठन के शीर्ष स्तर के नेताओं में शामिल था। इस गिरफ्तारी से माओवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
धनबाद जिले से हुई महत्वपूर्ण गिरफ्तारी
पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी झारखंड के धनबाद जिले से सुनिश्चित की गई है। पुलिस लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी और गुप्त सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मिसिर बेसरा जैसे बड़े माओवादी का पकड़ा जाना सुरक्षाबलों के लिए एक रणनीतिक जीत है। झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में माओवादियों के खिलाफ लगातार सघन अभियान चलाए जा रहे हैं और इसी कड़ी में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
सुरक्षाबलों का निरंतर जारी अभियान
झारखंड में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि माओवादियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। मिसिर बेसरा पर 1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम इस बात का प्रमाण है कि वह संगठन के लिए कितना महत्वपूर्ण था और सुरक्षाबलों के लिए उसकी गिरफ्तारी कितनी बड़ी प्राथमिकता थी। पुलिस अब उससे पूछताछ कर संगठन के अन्य सदस्यों और उनकी योजनाओं के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी।
जनवरी 2026 की बड़ी कार्रवाई का संदर्भ
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से पहले, जनवरी 2026 में भी झारखंड में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की थी। उस समय 1 करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर अनल दा उर्फ तूफान एक मुठभेड़ में मारा गया था। यह मुठभेड़ झारखंड के प्रसिद्ध सारंडा जंगलों में हुई थी, जहां सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई थी। उस समय कोबरा और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में कुल 8 माओवादी ढेर हुए थे, जिसे सुरक्षाबलों ने अपनी एक बहुत बड़ी सफलता के रूप में दर्ज किया था।
कौन था अनल दा उर्फ तूफान
अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश था। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) यानी CPI (माओ) की सेंट्रल कमिटी का सदस्य (CCM) था। अनल दा को माओवादियों का एक बड़ा रणनीतिकार माना जाता था और वह संगठन की भविष्य की योजनाओं और रणनीतियों को तैयार करने में माहिर था और उस पर भी 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उसकी अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है। सारंडा के जंगलों में उसकी मौत माओवादी संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
माओवादी संगठन को लगा बड़ा झटका
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और पूर्व में अनल दा जैसे कमांडरों का खात्मा माओवादी संगठन की कमर तोड़ने जैसा है। ये नेता न केवल संगठन का संचालन करते थे, बल्कि नए कैडरों की भर्ती और रणनीतिक हमलों की योजना बनाने में भी मुख्य भूमिका निभाते थे। 1 करोड़ रुपये के इनामी अपराधियों का पकड़ा जाना या मारा जाना यह दर्शाता है कि सुरक्षाबल अब माओवादियों के सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने में सफल हो रहे हैं। झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों का समन्वय इस दिशा में प्रभावी साबित हो रहा है और आने वाले समय में इस तरह के अभियानों में और तेजी आने की संभावना है।