झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के खिलाफ रांची में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कथित भ्रष्टाचार और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आंदोलन के प्रमुख चेहरा देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज 8वें दिन में प्रवेश कर गई है, जबकि छात्रों का सत्याग्रह पिछले 16 दिनों से लगातार जारी है। आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से अडिग हैं, जिससे राज्य प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
सरकार के साथ बातचीत और गतिरोध
आंदोलन को समाप्त करने और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने पहल की है। इस समिति के चार मंत्रियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो से संपर्क किया और उनसे बातचीत की। मंत्रियों ने महतो के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठा रही है। हालांकि, यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का सत्याग्रह जारी रहेगा।
सरकारी समिति द्वारा दिए गए प्रमुख आश्वासन
देवेंद्र नाथ महतो और उनके समर्थकों के साथ हुई चर्चा के दौरान, सरकारी समिति ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण वादे किए। समिति ने कहा कि सरकार परीक्षा धांधली के मामलों में वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने के लिए तैयार है। इसके अलावा, सरकार ने तीन प्रमुख परीक्षाओं को रद्द करने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं JPSC प्रीलिम्स शामिल हैं। समिति ने यह भी भरोसा दिलाया कि TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाओं की गहन जांच की जाएगी और भविष्य में सुधार के लिए, JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में बदलाव लाने हेतु IIM और XISS जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की सहायता लेने की बात भी कही गई है।
झारखंड विधानसभा घेराव का आह्वान
मंत्रियों की समिति द्वारा दिए गए मौखिक आश्वासनों के बावजूद, आंदोलनकारी छात्र संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने अपने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। छात्रों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का बड़ा आह्वान किया है। आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं ने राज्य भर के छात्रों से अपील की है कि वे सुबह 10 बजे से पहले पुराने विधानसभा भवन के पास एकत्रित हों, जहां से वे नई झारखंड विधानसभा की ओर कूच करेंगे। छात्रों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी भी प्रकार की हुड़दंगई या उत्पात नहीं किया जाना चाहिए। नेतृत्व ने कहा कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन की चर्चा पूरे देश में हो रही है, जिससे सरकार दबाव में है, इसलिए इस छवि को बनाए रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का न्याय का वादा
दूसरी तरफ, रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने आंदोलनरत युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने लोगों की हर बात सुन रही है और युवाओं को धरने पर इसलिए बैठना पड़ा क्योंकि सरकार ने परीक्षाओं में हो रही 'चोरी' को पकड़ लिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सोरेन ने छात्रों से अपील की कि वे इस आंदोलन को राजनीतिक चश्मे से न देखें और सरकार पर भरोसा रखें।
राजनीतिक साजिश से बचने की सलाह
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं को आगाह किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए किसी राजनीतिक छत्रछाया की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कई राजनीतिक दल इस आंदोलन पर नजर गड़ाए हुए हैं ताकि वे छात्रों को भ्रमित कर अपना राजनीतिक हित साध सकें। उन्होंने युवाओं को सीधा संवाद करने का निमंत्रण देते हुए कहा कि यह उनकी अपनी सरकार है और वे घर बैठे भी अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकते हैं। सोरेन ने अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि जहां छात्रों पर लाठियां और पैलेट गन चलाई गईं, वहां के विपरीत झारखंड सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और बाबा भीमराव आंबेडकर के संविधान में विश्वास रखती है, जो सबको अपनी आवाज उठाने की शक्ति देता है।