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KKR vs LSG: फिन एलन के कैच पर विवाद, आउट या नॉट आउट?

KKR vs LSG: फिन एलन के कैच पर विवाद, आउट या नॉट आउट?
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ईडन गार्डन्स स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और लखनऊ सुपर जाएंट्स (LSG) के बीच खेले जा रहे इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन के मुकाबले में एक बड़ा विवाद सामने आया है। केकेआर के सलामी बल्लेबाज फिन एलन के कैच आउट होने के फैसले ने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एलन पारी के दूसरे ओवर में मात्र 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए, लेकिन जिस तरह से उनका कैच पकड़ा गया, उसने अंपायरिंग और तकनीक के इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोलकाता की टीम टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी थी और उसे शुरुआती ओवरों में ही यह बड़ा झटका लगा।

मैदान पर घटी घटना का विवरण

यह घटना पारी के दूसरे ओवर की चौथी गेंद पर हुई, जब लखनऊ सुपर जाएंट्स के गेंदबाज प्रिंस यादव गेंदबाजी कर रहे थे। फिन एलन ने एक बड़ा शॉट खेलने का प्रयास किया, लेकिन गेंद उनके बल्ले के ऊपरी किनारे पर लगकर थर्ड मैन की दिशा में हवा में काफी ऊंची चली गई। वहां तैनात फील्डर दिग्वेश सिंह राठी ने गेंद पर नजरें जमाए रखीं और अंततः उसे लपक लिया। हालांकि, कैच पकड़ते समय राठी बाउंड्री लाइन के बेहद करीब थे, जिससे आउट होने के फैसले पर तुरंत संदेह पैदा हो गया।

बाउंड्री लाइन और विज्ञापन कर्टन का विवाद

वीडियो फुटेज और तस्वीरों में देखा गया कि जब दिग्वेश सिंह राठी ने कैच पकड़ा, तब उनका पैर बाउंड्री लाइन के बिल्कुल पास था। कैच के दौरान बाउंड्री पर लगी विज्ञापन की कर्टन में भी थोड़ी हलचल देखी गई, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि क्या फील्डर का पैर बाउंड्री को छू गया था। क्रिकेट के नियमों के अनुसार, यदि कैच पकड़ते समय फील्डर का कोई भी हिस्सा बाउंड्री लाइन या उसके बाहर की जमीन को छूता है, तो उसे छक्का करार दिया जाता है। प्रशंसकों का तर्क है कि कर्टन का हिलना इस बात का संकेत था कि फील्डर का संपर्क बाउंड्री से हुआ था।

अंपायरिंग के फैसले पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मैदानी अंपायरों के फैसले को लेकर हो रही है। आमतौर पर ऐसे करीबी मामलों में मैदानी अंपायर सटीक निर्णय के लिए थर्ड अंपायर की मदद लेते हैं और 'सॉफ्ट सिग्नल' या सीधे रेफरल का उपयोग करते हैं। हालांकि, इस मैच में अंपायरों ने इसे सीधे आउट करार दिया और मामले को टीवी अंपायर के पास भेजने की जरूरत नहीं समझी। बिना किसी तकनीकी जांच के बल्लेबाज को पवेलियन भेजने के फैसले ने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।

खिलाड़ी की प्रतिक्रिया और मैच पर प्रभाव

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