लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद: पीएनसी इंफ्राटेक ने ब्लैकलिस्ट होने की खबरों को नकारा

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लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद: पीएनसी इंफ्राटेक ने ब्लैकलिस्ट होने की खबरों को नकारा
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के तुरंत बाद सड़क में दरारें आने और कई हिस्सों के धंसने की घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना में आई इन खामियों के कारण निर्माण करने वाली दिग्गज कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। जहां एक ओर सड़क की बदहाली की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनी और प्राधिकरण के दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है।

एनएचएआई की तकनीकी जांच और निष्कर्ष

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे पर हुई क्षति की तकनीकी जांच कराई है। एनएचएआई के दावों के अनुसार, सड़क खराब होने की मुख्य वजह घटिया निर्माण और डामर की लेयर का ठीक से न बैठना है और जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण सड़क जगह-जगह से धंस गई और उसमें गड्ढे हो गए। इन निष्कर्षों के आधार पर यह खबर सामने आई थी कि एनएचएआई ने पीएनसी इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कदम किसी भी निर्माण कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाता है क्योंकि इससे भविष्य के सरकारी ठेकों पर असर पड़ता है।

पीएनसी इंफ्राटेक की शेयर बाजार को सफाई

ब्लैकलिस्ट किए जाने और नॉन-परफॉर्मर घोषित होने की खबरों के बीच पीएनसी इंफ्राटेक ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और कंपनी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे न तो ब्लैकलिस्ट किया गया है और न ही अभी तक नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया है। कंपनी का तर्क है कि एनएचएआई की ओर से उन्हें केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसका वे जवाब दे रहे हैं। कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि अभी तक कोई अंतिम दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

क्षति का विवरण और कंपनी का बचाव

रिपोर्टों के अनुसार, 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लगभग 600 से 700 मीटर हिस्से में सड़क धंसने या उखड़ने की गंभीर समस्या देखी गई है। तकनीकी जांच में करीब 84 ऐसी जगहों की पहचान की गई है जहां निर्माण में गड़बड़ी पाई गई है। पीएनसी इंफ्राटेक ने इस नुकसान के लिए लगातार हो रही बारिश को जिम्मेदार ठहराया है। कंपनी का कहना है कि भारी बारिश के कारण एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, 84 अलग-अलग स्थानों पर खराबी मिलने के बाद केवल बारिश को दोष देना विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रहा है और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल बरकरार हैं।

शेयर बाजार पर असर और पुराना विवाद

इस पूरे विवाद का सीधा असर पीएनसी इंफ्राटेक के वित्तीय प्रदर्शन पर भी पड़ा है। विवाद और एनएचएआई की संभावित कार्रवाई की खबरों के चलते कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, कंपनी का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2024 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत के मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें कंपनी और उसके अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। इन पुराने मामलों ने वर्तमान विवाद में कंपनी की साख को और अधिक प्रभावित किया है।

निगरानी और जवाबदेही पर सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक्सप्रेसवे की इस बदहाली के लिए वास्तव में जिम्मेदार कौन है। क्या यह केवल घटिया निर्माण का मामला है या फिर निर्माण के दौरान निगरानी में भी बड़ी चूक हुई है? एनएचएआई की कार्रवाई और कंपनी की सफाई के बीच जनता और निवेशक अब अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। 63 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट में 84 जगहों पर गड़बड़ी मिलना एक गंभीर विषय है, जो भविष्य में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक धन के सही उपयोग पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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