उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता और कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ उत्तर प्रदेश के कई अन्य महत्वपूर्ण नेता भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं और इनमें अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू, पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा और एआईएमआईएम के पूर्व प्रत्याशी डॉक्टर दानिश खान के नाम शामिल हैं। इन नेताओं के शामिल होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
लखनऊ में आयोजित सदस्यता ग्रहण समारोह
समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे। अखिलेश यादव ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि विभिन्न विचारधाराओं और दलों के नेताओं का सपा में आना यह दर्शाता है कि राज्य की जनता बदलाव की ओर देख रही है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ आए नेताओं में अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू का नाम प्रमुख है, जो पीलीभीत क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं और मायावती सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और इसके अलावा, अपना दल (सोनेलाल) से आए राजकुमार पाल और कांग्रेस छोड़कर आए डॉक्टर दानिश खान ने भी समाजवादी पार्टी की नीतियों में विश्वास व्यक्त किया। पार्टी के अनुसार, इन नेताओं के आने से विशेष रूप से मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के बीच सपा की पकड़ और मजबूत होगी।
भाषण के दौरान जुबान फिसलने का वाकया
सदस्यता ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया जब मंच पर भाषण देते समय कुछ नेताओं की जुबान फिसल गई। पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू ने अपने संबोधन के दौरान जोश में आकर बार-बार बहुजन समाज पार्टी का नाम ले लिया। उन्होंने अखिलेश यादव की मौजूदगी में कहा कि भारतीय जनता पार्टी को केवल बहुजन समाज पार्टी ही हरा सकती है। हालांकि, तुरंत अपनी गलती का अहसास होने पर उन्होंने इसे सुधारा और समाजवादी पार्टी का नाम लिया। इसी तरह, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी अपने भाषण की शुरुआत में उन लोगों का जिक्र किया जो आज बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए हैं, लेकिन उन्होंने भी तत्काल अपनी त्रुटि सुधारते हुए समाजवादी पार्टी का नाम लिया। इन घटनाओं को लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा बनी रही।
कांग्रेस छोड़ने की मुख्य वजह
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में 24 जनवरी को कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दिया था। वह कांग्रेस में प्रांतीय अध्यक्ष के पद पर तैनात थे। उनके इस्तीफे के पीछे एक प्रमुख घटनाक्रम बताया जा रहा है जो राहुल गांधी के लखनऊ दौरे से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों जब राहुल गांधी रायबरेली जाने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे थे, तब नसीमुद्दीन सिद्दीकी उन्हें रिसीव करने के लिए वहां गए थे। हालांकि, सुरक्षा कारणों या समन्वय की कमी के चलते उन्हें एयरपोर्ट के भीतर प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें वहीं से वापस लौटना पड़ा। इस घटना को नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने आत्मसम्मान से जोड़कर देखा और इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का निर्णय लिया।
बसपा शासन में नसीमुद्दीन का कद
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह कांशीराम के समय से ही बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए थे और मायावती के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। मायावती के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की चारों सरकारों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पास लोक निर्माण विभाग और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय रहे हैं। हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा की हार के बाद मायावती ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इसके बाद 2018 में वह कांग्रेस में शामिल हुए थे। अब समाजवादी पार्टी में उनका प्रवेश उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।