इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भविष्य में अमेरिका का कोई राष्ट्रपति इजराइल के खिलाफ हो सकता है और ऐसे संभावित हालातों से निपटने और देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ नए और गहरे गठबंधन बनाने पर जोर दिया है। नेतन्याहू का मानना है कि इजराइल को केवल एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया के दूसरे बड़े देशों के साथ भी अपने रणनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करना होगा, ताकि वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति और सुरक्षा हमेशा सुरक्षित बनी रहे। नेतन्याहू ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान अपनी इस नई सुरक्षा नीति को सार्वजनिक किया और देश के सामने भविष्य की चुनौतियों का खाका खींचा। इजराइल में आगामी सत्ता और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से इस बयान को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश में आगामी सत्ताई बदलावों की चर्चाएं जोरों पर हैं।
नेतन्याहू ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए एक कार्यक्रम में अपनी सुरक्षा नीति पेश की और चेतावनी दी कि आने वाले समय में राजनीतिक स्थितियां बदल सकती हैं और उनके इस बयान से ठीक कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का अपना खुला समर्थन जताया था। इसके बावजूद नेतन्याहू की चिंताएं वैश्विक राजनीतिक बदलावों को लेकर स्पष्ट रूप से सामने आईं। नेतन्याहू ने विस्तार से अपनी आशंकाओं को साझा करते हुए कहा कि आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल सकता है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नेतन्याहू ने कहा, दो साल बाद कोई पुरुष या महिला राष्ट्रपति बन सकता है, जो इजराइल का बहुत विरोध करे। उन्होंने यह गंभीर सवाल भी उठाया कि ऐसी कठिन स्थिति में इजराइल अमेरिका के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को कैसे संभालेगा और देश को आगे सुरक्षा के मोर्चे पर क्या ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बचे हुए दो साल में इजराइल को अपनी सामरिक और कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए हरसंभव कोशिश कर लेनी चाहिए। इसके बाद भी अमेरिका के साथ संबंधों में अच्छे और बुरे, दोनों तरह के अप्रत्याशित हालात के लिए देश को हमेशा तैयार रहना होगा।
भारत और लैटिन अमेरिका से दोस्ती बढ़ाने पर जोर
भविष्य के संभावित संकटों से निपटने के लिए नेतन्याहू ने कूटनीतिक दायरा बढ़ाने की वकालत की है। नेतन्याहू ने दो टूक शब्दों में कहा कि इजराइल को पारंपरिक सहयोगियों के अलावा दुनिया के अन्य देशों के साथ भी अपने कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने होंगे। इस दिशा में उन्होंने विशेष रूप से भारत का नाम लेते हुए कहा कि भारत एक बहुत बड़ा देश है और दुनिया में ऐसे कई दूसरे महत्वपूर्ण देश भी हैं, जिनके साथ इजराइल अपने रणनीतिक गठबंधन को और अधिक व्यापक बना सकता है। भारत के साथ इजराइल के रिश्ते पहले से ही काफी मजबूत रहे हैं, और नेतन्याहू ने इसी मजबूत आधार पर भविष्य की सुरक्षा की रूपरेखा तैयार की है।
इसके साथ ही उन्होंने लैटिन अमेरिका में हो रहे बड़े राजनीतिक बदलावों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। नेतन्याहू के मुताबिक, लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में कुछ ही दिनों में बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव हो सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजराइल को अपने सहयोगी देशों की संख्या लगातार बढ़ानी चाहिए और अपनी रक्षात्मक व तकनीकी क्षमताएं ऐसी बनानी चाहिए कि दुनिया के दूसरे देश भी उसे अपने लिए बेहद उपयोगी और अपरिहार्य मानें। नेतन्याहू पहले भी कई मौकों पर भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने प्रगाढ़ और बेहतरीन व्यक्तिगत संबंधों का खुलकर जिक्र करते रहे हैं। इसी साल मई के महीने में उन्होंने भारत को एक बड़ी और उभरती हुई वैश्विक ताकत बताते हुए कहा था कि वहां इजराइल के लिए जबरदस्त समर्थन और आत्मीयता मौजूद है।
इजरायली विपक्ष ने नेतन्याहू की नीति पर उठाए गंभीर सवाल
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इन बयानों और उनकी सुरक्षा नीति के ऐलान के बाद देश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इजराइल के कई प्रमुख राजनीतिक एक्सपर्ट्स और विश्लेषकों का यह मानना है कि अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इजराइल के प्रति समर्थन में जो कमी आई है, उसकी एक बहुत बड़ी वजह नेतन्याहू के पुराने फैसले और नीतियां रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ नेतन्याहू के संबंध ऐतिहासिक रूप से काफी तनावपूर्ण और असहज रहे हैं। एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सामने राजनीतिक रूप से मजबूती दिखाने और अपनी कट्टर छवि बनाए रखने को हमेशा अपनी मुख्य चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा बनाया है।
चुनाव में नेतन्याहू के सबसे प्रमुख और कड़े प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने इस नई सुरक्षा नीति को चुनाव से ठीक पहले की गई एक विशुद्ध राजनीतिक कवायਦ करार दिया है। देश के पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इजराइल की सबसे बड़ी राष्ट्रीय नाकामी और त्रासदी के तीन साल बीत जाने के बाद भी आज युद्ध के सभी मोर्चे पूरी तरह से खुले हुए हैं और देश गंभीर संकट से जूझ रहा है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने देश के सामने सिर्फ दो पन्नों का एक ऐसा दस्तावेज पेश किया है, जिसमें केवल लुभावने नारे लिखे गए हैं, लेकिन देश की सुरक्षा से जुड़े किसी भी असली और गंभीर सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है।
गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर सीधा और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चुनाव से ठीक पहले इजराइल की आम जनता के मन में अनावश्यक डर पैदा कर रहे हैं और अपने राजनीतिक अभियान से जुड़े तमाम विवादों तथा विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं और गौरतलब है कि बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने वाले नेता हैं, और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर देश में बहस तेज हो गई है।