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: नेतन्याहू की खुली चेतावनी: ईरान का परमाणु खतरा बरकरार, सीजफायर के बाद भी जंग संभव

- नेतन्याहू की खुली चेतावनी: ईरान का परमाणु खतरा बरकरार, सीजफायर के बाद भी जंग संभव
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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि हालिया सीजफायर के बावजूद ईरान की ओर से उत्पन्न परमाणु खतरा अभी टला नहीं है। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित (enriched) यूरेनियम का विशाल भंडार मौजूद है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो इजराइल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी बाहरी समर्थन के बिना अकेले भी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्धविराम के बावजूद मध्य-पूर्व में तनाव की लपटें एक बार फिर तेज हो गई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी टीवी शो में एक विस्फोटक इंटरव्यू देते हुए साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु खतरा टला नहीं है। नेतन्याहू का यह संदेश न केवल ईरान, बल्कि जो बाइडन के बाद सत्ता में आए ट्रंप प्रशासन और पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

परमाणु भंडार और नेतन्याहू की सख्त चेतावनी

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सीबीएस (CBS) के प्रसिद्ध पत्रकार स्कॉट पेली को दिए गए 18 मिनट के विस्तृत साक्षात्कार में पहली बार ईरान के परमाणु भंडार का सटीक विवरण साझा किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अभी भी 440 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम का भंडार सुरक्षित है। नेतन्याहू ने अत्यंत सख्त लहजे में कहा कि युद्धविराम अपनी जगह है, लेकिन परमाणु खतरा खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आप वहां जाएंगे और उसे हटा देते हैं, लेकिन अभी काम पूरा होना बाकी है (The work is not over)। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि इजराइल ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करने के अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटा है।

इजराइल की सैन्य आत्मनिर्भरता और अमेरिकी सहायता

इस साक्षात्कार के दौरान नेतन्याहू ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक बयान देते हुए कहा कि इजराइल को अब अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। 8 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता प्राप्त होती है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह ‘स्वतंत्र’ (Independent) होने की योजना पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इजराइल बिना किसी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की चिंता किए स्वतंत्र रूप से सैन्य कार्रवाई कर सके। यह बयान इजराइल की रक्षा नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

ट्रंप का समर्थन और पाकिस्तान की मध्यस्थता का खंडन

नेतन्याहू के इस इंटरव्यू के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी है और ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि वे इजराइल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू को एक महान नेता बताया और कहा कि वे दोनों एक ही पेज पर हैं। इससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और इजराइल की ईरान के प्रति नीति और भी अधिक आक्रामक हो सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए जो शांति प्रस्ताव भेजा था, उसे इजराइल ने पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है। इजराइल का स्पष्ट स्टैंड है कि जब तक सारा एनरिच्ड यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाता, तब तक कोई भी समझौता संभव नहीं होगा।

महत्वपूर्ण आंकड़े और जमीनी हकीकत

नेतन्याहू के इस साक्षात्कार ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि इजराइल ‘एकतरफा कार्रवाई’ (Unilateral Action) के विकल्प को खुला रखे हुए है और जहाँ एक तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की उम्मीद कर रहा है, वहीं नेतन्याहू का “Work is not over” वाला बयान यह संकेत दे रहा है कि आने वाले कुछ हफ्ते पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब यरुशलम के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या यह केवल एक कूटनीतिक दबाव है या इजराइल वास्तव में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की दहलीज पर खड़ा है।

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