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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, यूपी के शहरों को लाभ

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, यूपी के शहरों को लाभ
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उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में निर्मित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) अपने परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। यह हवाई अड्डा न केवल दिल्ली-एनसीआर बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों के लिए परिवहन का एक नया केंद्र बनने जा रहा है और अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है और अब यह घरेलू उड़ानों के लिए तैयार है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दुनिया के सबसे आधुनिक और बड़े हवाई अड्डों में से एक के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करना है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से उत्तर प्रदेश के उन जिलों के यात्रियों को सबसे अधिक लाभ होगा, जिन्हें वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय या घरेलू उड़ानें पकड़ने के लिए 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर दिल्ली जाना पड़ता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए सुगम यात्रा

जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से मथुरा, आगरा, बुलंदशहर, खुर्जा और अलीगढ़ जैसे शहरों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में, इन क्षेत्रों के निवासियों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें सड़क मार्ग से काफी समय लगता है। अधिकारियों के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट इन शहरों के काफी करीब स्थित है, जिससे यात्रा के समय में 2 से 3 घंटे की बचत होगी। उदाहरण के लिए, खुर्जा से एयरपोर्ट की दूरी मात्र 37 किलोमीटर है, जबकि ग्रेटर नोएडा से यह केवल 44 किलोमीटर दूर है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रियों के परिवहन खर्च में भी कमी आएगी।

विभिन्न शहरों से जेवर एयरपोर्ट की दूरी का विवरण

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रणनीतिक स्थिति इसे उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों के निकट लाती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न शहरों से एयरपोर्ट की दूरी इस प्रकार है: खुर्जा से 37 किलोमीटर, ग्रेटर नोएडा से 44 किलोमीटर, बुलंदशहर से 53 किलोमीटर, नोएडा से 58 किलोमीटर, गाजियाबाद से 74 किलोमीटर, हापुड़ से 90 किलोमीटर, मथुरा से 92 किलोमीटर, मेरठ से 120 किलोमीटर और आगरा से 140 किलोमीटर। यह कनेक्टिविटी यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के माध्यम से और भी सुगम हो गई है, जिससे इन शहरों से एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हो गया है।

दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर घटेगा दबाव

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा वर्तमान में भारत का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से आईजीआई एयरपोर्ट पर यात्रियों और उड़ानों का बोझ काफी कम होने की उम्मीद है। 20 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। भविष्य में, जब इसके सभी चरण पूरे हो जाएंगे, तो यह प्रति वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्रियों की सेवा करने में सक्षम होगा। इससे दिल्ली के हवाई क्षेत्र में भीड़भाड़ कम होगी और उड़ानों के परिचालन में अधिक दक्षता आएगी।

बुनियादी ढांचा और भविष्य की विस्तार योजनाएं

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कुल 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण कार्य किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह भविष्य में भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा जिसमें 5 रनवे होंगे। वर्तमान में, पहले चरण के तहत एक रनवे और एक टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण पूरा हुआ है। हवाई अड्डे को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है, जिसमें मेट्रो, रैपिड रेल (RRTS) और पॉड टैक्सी शामिल हैं और इसके अलावा, एयरपोर्ट परिसर के भीतर एक विशाल कार्गो हब भी बनाया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश के निर्यात क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ेगा।

आर्थिक विकास और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। आगरा और मथुरा जैसे पर्यटन केंद्रों के करीब होने के कारण, विदेशी पर्यटकों के लिए इन स्थानों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है और अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक पार्क, होटल और वाणिज्यिक केंद्रों का विकास किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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