नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले के बाद उपजे विवादों के बीच, भारत सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को बहाल करने के उद्देश्य से, सरकार ने एनटीए में चार वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इन नियुक्तियों को एनटीए के परीक्षा संचालन तंत्र को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
एनटीए में नई नियुक्तियां और जिम्मेदारियां
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत एनटीए में दो नए संयुक्त निदेशक और दो संयुक्त सचिवों की तैनाती को मंजूरी दी है। भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2013 बैच के अधिकारी आकाश जैन को एनटीए में संयुक्त निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति लेटरल शिफ्ट के माध्यम से की गई है, जिसका अर्थ है कि उन्हें एक सरकारी विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित किया गया है। आदेश के अनुसार, आकाश जैन का कार्यकाल 4 दिसंबर 2029 तक रहेगा।
आकाश जैन के साथ ही, इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस (IA&AS) के 2013 बैच के अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगढ़िया को भी संयुक्त निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें भी लेटरल शिफ्ट के जरिए एनटीए में लाया गया है और उनका कार्यकाल 16 मई 2028 तक निर्धारित किया गया है। ये दोनों अधिकारी एनटीए के प्रशासनिक और ऑडिट संबंधी कार्यों में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देंगे। एनटीए देशभर में नीट, जेईई मेन और सीयूईटी जैसी प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है, इसलिए इन नियुक्तियों का महत्व और बढ़ जाता है।
संयुक्त सचिवों की भूमिका
प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को बेहतर बनाने के लिए दो संयुक्त सचिवों की भी नियुक्ति की गई है और 1998 बैच की भारतीय सांख्यिकीय सेवा (ISS) की अधिकारी अनुजा बापट को 5 साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। उनके साथ ही, 2004 बैच की आईआरएस अधिकारी रुचिता विज को भी संयुक्त सचिव के पद पर 5 साल के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की नियुक्ति से एनटीए के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में तेजी आने की उम्मीद है।
नीट विवाद और आगामी परीक्षाएं
यह प्रशासनिक फेरबदल 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक आरोपों के बाद किया गया है। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी रोष देखा गया था, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 21 जून को फिर से इन परीक्षाओं के आयोजन का निर्णय लिया है। एनटीए के प्रशासनिक ढांचे को दुरुस्त करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इन नई नियुक्तियों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रबंधन, डेटा सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में उच्च स्तर की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। नए अधिकारियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार करेंगे ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्रों का भरोसा इस संस्था पर बना रहे। उच्च शिक्षा विभाग इन नए अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षा प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर काम कर रहा है।