ओपनएआई की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां एआई टूल्स का सबसे अधिक उपयोग किया जा रहा है। भारतीय छात्र, प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप्स एआई तकनीक को अपनाने और उसे डेली यूज में इंटीग्रेट करने में ग्लोबल लेवल पर सबसे आगे हैं। ओपनएआई ने बुधवार को भारत के लिए अपनी फ्रेश रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) मार्केट्स में से एक है।
कोडिंग और डेटा विश्लेषण में भारत का दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, खासतौर से कोडिंग, डेटा विश्लेषण और जटिल तर्क के मामले में भारत काफी आगे है। ओपनएआई के अनुसार, प्रति व्यक्ति सोचने की क्षमता के उपयोग के मामले में भारत विश्व स्तर पर शीर्ष पांच देशों में शामिल है। यहां के उपयोगकर्ता नियमित रूप से जटिल समस्याओं को हल करने के लिए एआई के साथ संवाद कर रहे हैं। फरवरी, 2026 में ओपनएआई के कोडेक्स ऐप (एआई कोडिंग टूल) की पेशकश के महज दो सप्ताह के भीतर भारत में इसके उपयोगकर्ताओं में चार गुना वृद्धि देखी गई। कोडिंग और डेटा विश्लेषण के उपयोग में भी भारत की रैंकिंग काफी मजबूत है।
शहरी केंद्रों में एआई उपयोग की उच्च एकाग्रता
ओपनएआई ने बताया कि यह क्षमता समान रूप से वितरित नहीं है। भारत में एआई का यूज कुछ शहरों तक ही सीमित है। भारत के शीर्ष 10 शहरों में कुल एआई उपयोगकर्ताओं का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। कुल मिलाकर, ये शहर आबादी के 10 फीसदी से भी कम हिस्से का लीड करते हैं, जिससे भारत में AI को अपनाने की दर अमेरिका, UK, ब्राजील और जर्मनी जैसे तुलनात्मक देशों की तुलना में लगभग 3 गुना ज्यादा केंद्रित हो जाती है। एडवांस्ड इस्तेमाल के मामलों में यह फर्क काफी बढ़ जाता है- डेटा एनालिसिस का इस्तेमाल आगे चल रहे शहरों में पीछे चल रहे शहरों की तुलना में 30 गुना ज़्यादा है, कोडिंग का इस्तेमाल 4 गुना ज़्यादा है, और AI डेवलपर (Codex) के इस्तेमाल में 9 गुना का अंतर दिखता है।
क्षेत्रीय रुझान: शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि भारत के सबसे बड़े फ़ायदे कुछ ही शहरी केंद्रों में सिमटे हुए हैं, जिनमें बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और चेन्नई शामिल हैं और हालांकि, शीर्ष शहरों से परे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सार्थक इस्तेमाल के मामले उभर रहे हैं। शिक्षा और सीखने के क्षेत्र में, पूर्वी राज्यों में विशेष रूप से मजबूत जुड़ाव देखने को मिल रहा है। इसका एक उदाहरण असम है, जहां सभी संदेशों में से 22 प्रतिशत शिक्षा और सीखने से संबंधित हैं, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 20 प्रतिशत ज़्यादा है। ओडिशा, मणिपुर, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिलते हैं। स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के क्षेत्र में, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे क्षेत्रों में ज़्यादा जुड़ाव देखने को मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर में, लगभग हर 10 में से 1 मैसेज हेल्थ से जुड़ा होता है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 32 प्रतिशत ज़्यादा है।
ओपनएआई का भविष्य का दृष्टिकोण
ओपनएआई के मैनेजिंग डायरेक्टर – इंटरनेशनल, ओलिवर जे ने कहा कि अब मुख्य सवाल यह है कि AI के फ़ायदे शुरुआती अपनाने वालों और अग्रणी शहरों से आगे बढ़कर व्यापक आबादी तक कितनी तेज़ी से पहुंच सकते हैं। ओलिवर जे ने कहा कि इस अंतर को पाटने के लिए पहुंच का विस्तार करना, स्किल्स डेवलप करना और पूरे देश में ज्यादा इजी यूज को सक्षम बनाना ज़रूरी होगा। यह एक ऐसी कोशिश है जिसे बड़े पैमाने पर भारत की युवा और तेज़ी से नई चीज़ों को अपनाने वाली आबादी द्वारा आकार दिया जाएगा। भारत की AI यात्रा का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि यह क्षमता तकनीक के लोकतंत्रीकरण (भाषा, सामर्थ्य, बुनियादी ढाँचा) के माध्यम से कितनी व्यापक रूप से फैलती है।