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: पाकिस्तान बना ईरान का व्यापारिक सहारा: अमेरिकी नाकेबंदी के बीच शुरू हुआ बड़ा ट्रांजिट खेल

- पाकिस्तान बना ईरान का व्यापारिक सहारा: अमेरिकी नाकेबंदी के बीच शुरू हुआ बड़ा ट्रांजिट खेल
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अमेरिकी नाकेबंदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच पाकिस्तान ईरान के लिए एक बड़ी व्यापारिक मदद के रूप में उभरा है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अपने बंदरगाहों और ज़मीन के रास्ते ईरान को माल के ट्रांजिट की अनुमति दे दी है। इस नई व्यापारिक साझेदारी से पाकिस्तान भी मोटी कमाई कर रहा है, विशेष रूप से कराची और ग्वादर बंदरगाहों के माध्यम से होने वाले व्यापार से उसे बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

अमेरिकी नाकेबंदी और क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव

होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाए गए ब्लॉकेड और युद्ध के बाद ईरान के UAE के साथ खराब हुए रिश्तों ने तेहरान के व्यापार को गहरी चोट पहुंचाई है। युद्ध से पहले ईरान अपने व्यापारिक कार्यों के लिए UAE के बंदरगाहों, विशेष रूप से जेबेल अली पोर्ट पर निर्भर था। इन चुनौतियों का समाधान निकालते हुए ईरान ने पाकिस्तान के साथ अपना पुराना द्विपक्षीय समझौता सक्रिय कर दिया है, जिससे दोनों देशों को लाभ हो रहा है।

2008 के द्विपक्षीय समझौते की बहाली

तसनीम न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अपने क्षेत्र और बंदरगाहों के माध्यम से ईरान में सामान के ट्रांजिट को मंजूरी दी है और इस्लामाबाद के कॉमर्स मंत्रालय ने 25 अप्रैल को 'पाकिस्तान के इलाके से सामान के ट्रांजिट का आदेश 2026' जारी किया, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह आदेश 2008 में तेहरान के साथ हुए एक द्विपक्षीय सड़क परिवहन समझौते को सक्रिय करता है, जिसका पहले कभी उपयोग नहीं किया गया था।

प्रमुख व्यापारिक मार्ग और बुनियादी ढांचा

इस नए आदेश के तहत कुल छह जमीनी रास्ते खोले गए हैं। ये रास्ते पाकिस्तान के तीन मुख्य बंदरगाहों—कराची, पोर्ट कासिम और ग्वादर—को बलूचिस्तान के रास्ते ईरान की दो सीमा चौकियों, गब्द और ताफ्तान से जोड़ते हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ महत्वपूर्ण बातचीत के लिए इस्लामाबाद के दौरे पर थे।

लागत में कमी और बंदरगाहों की क्षमता

पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, ग्वादर-गब्द कॉरिडोर इन तय रास्तों में सबसे छोटा है, जो ईरान की सीमा तक पहुंचने के समय को घटाकर मात्र दो से तीन घंटे कर देता है। कराची के रास्ते माल भेजने की तुलना में इस मार्ग से परिवहन लागत में 45 से 55 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में कराची और पोर्ट कासिम मिलकर सालाना लगभग 42 मिलियन टन कार्गो संभालते हैं। आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान की ओर मोड़े गए कार्गो का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अकेले कराची ने संभाला है।

ग्वादर और चाबहार की भौगोलिक स्थिति

ग्वादर बंदरगाह, जिसे 'चाइना ओवरसीज़ पोर्ट होल्डिंग कंपनी' द्वारा 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) के मुख्य केंद्र के रूप में संचालित किया जाता है, ईरान के चाबहार बंदरगाह से लगभग 170 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। भौगोलिक रूप से यह ईरानी क्षेत्र के सबसे करीब है, जो इसे ईरान के वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक गेटवे बनाता है।

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