पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जारी भारी बवाल और हिंसक प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। क्षेत्र में बिगड़ते हालात के बीच पाकिस्तान पुलिस के अधिकांश जवानों ने वहां ड्यूटी करने से साफ इनकार कर दिया है। इस चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज से हुआ है। पुलिसकर्मियों के इस रुख ने सरकार के सामने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसके बाद अब प्रशासन ऐसे जवानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि पीओके में असंतोष केवल जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा बलों के भीतर भी गहरा चुका है।
पुलिसकर्मियों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू
डॉन अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को पीओके में ड्यूटी पर जाने से मना करने वाले एक पुलिसकर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। सरकार अब उन सभी पुलिसकर्मियों की एक विस्तृत सूची तैयार कर रही है जिन्होंने पीओके और गिलगित में तैनाती मिलने के बावजूद अपनी ड्यूटी ज्वॉइन नहीं की है और सरकार आने वाले समय में एक नया कानून बनाने पर भी विचार कर रही है, जिसके तहत ऐसे पुलिसकर्मियों को एक साथ नौकरी से निकालने का प्रावधान होगा। यह कदम सुरक्षा बलों के भीतर बढ़ते अनुशासनहीनता और असंतोष को दबाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, ताकि अन्य जवानों को कड़ा संदेश दिया जा सके।
ड्यूटी से इनकार के पीछे जान का खतरा
पुलिस जवानों द्वारा पीओके से दूरी बनाने का सबसे बड़ा कारण वहां उनकी जान को होने वाला खतरा है। वर्तमान में पीओके पूरी तरह से सुलग रहा है और लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालिया हिंसा में 4 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई है, जबकि 7 आम नागरिक भी मारे गए हैं। इस संघर्ष में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। पिछले 2 साल में यह तीसरा मौका है जब पीओके में इस तरह का बड़ा बवाल देखा जा रहा है, जिससे सुरक्षाकर्मियों के मन में डर बैठ गया है। जवानों का मानना है कि हिंसक भीड़ के सामने उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में है।
वेतन और भत्तों में भारी विसंगति
सुरक्षा खतरों के अलावा, आर्थिक कारण भी पुलिसकर्मियों के असंतोष की एक मुख्य वजह हैं। पीओके और गिलगित में तैनात पुलिसकर्मियों को पाकिस्तान के अन्य प्रांतों की तुलना में बहुत कम वेतन और भत्ते दिए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सितंबर 2025 में लगभग 11000 पुलिसकर्मी सड़कों पर उतरे थे। इन जवानों का कहना है कि सरकार ने 2022 का वेतनमान लागू तो कर दिया है, लेकिन उन्हें अभी भी 2012 के पुराने मॉडल के आधार पर ही भुगतान किया जा रहा है। यह आर्थिक भेदभाव जवानों के मनोबल को पूरी तरह से तोड़ चुका है।
वेतन का तुलनात्मक विवरण
कश्मीर अंग्रेजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों और पीओके के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक कांस्टेबल की मासिक सैलरी 73000 पाकिस्तानी रुपये है। इसी तरह, सिंध प्रांत में एक कांस्टेबल को प्रतिमाह 69000 रुपये मिलते हैं। इसके विपरीत, पीओके में तैनात एक कांस्टेबल को हर महीने केवल 15899 पाकिस्तानी रुपये ही वेतन के रूप में दिए जाते हैं। इतनी कम सैलरी में जान जोखिम में डालकर काम करना जवानों के लिए नामुमकिन हो रहा है, जिसके कारण वे तैनाती से बच रहे हैं।
पीओके का इतिहास और वर्तमान विवाद
ऐतिहासिक रूप से, 1947-48 के दौरान कश्मीर के जिन हिस्सों पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया था, उसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है। लगभग 13300 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र को पाकिस्तान ने केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे रखा है, जहां वर्तमान में पीपुल्स पार्टी की सरकार है। वर्तमान में वहां चुनाव कराने की तैयारी चल रही है, जिसका स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि पीओके विधानसभा में शरणार्थी कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म किया जाए। इसी राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता ने पूरे क्षेत्र को अशांत बना दिया है।