ईरान के साथ संभावित युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब को बचाने के लिए पाकिस्तान ने अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक दी है। रियाद के साथ हुए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 16 फाइटर जेट, एक आधुनिक डिफेंस सिस्टम, 50 ड्रोन और 8000 सैनिकों की तैनाती कर दी है। पाकिस्तान की योजना यहीं नहीं रुकती है, बल्कि वह सऊदी अरब में कुल 80000 सैनिकों को उतारने की तैयारी कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सऊदी अरब लगातार ईरान के रडार पर बना हुआ है और क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। पाकिस्तान की यह सैन्य तैयारी उस समझौते का हिस्सा है जिसे उसने साल 2025 में सऊदी अरब के साथ किया था।
रक्षा समझौता और सैन्य संसाधनों की तैनाती
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पाकिस्तान सरकार के 5 विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब को ईरान के किसी भी संभावित हमले से बचाने के लिए फिलहाल 8000 सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी है। आने वाले समय में इन सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 80000 की जाएगी। ये सभी जवान युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब की सेना के साथ तालमेल बिठाएंगे और ईरान के हमलों को रोकने का काम करेंगे और सैन्य साजो-सामान की बात करें तो पाकिस्तान ने 16 फाइटर जेट तैनात किए हैं, जिनमें से अधिकांश चीन द्वारा निर्मित जेएफ-17 थंडर जेट हैं। इसके अलावा, चीन में बना एक शक्तिशाली डिफेंस सिस्टम और लगभग 50 ड्रोन भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 2025 का समझौता
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में अपने एक बयान में स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दरअसल, साल 2025 में दोनों देशों के बीच एक विशेष रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते की शर्तों के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा प्रदान करेगा, और इसके बदले में सऊदी अरब पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कर्ज देगा और वहां के विभिन्न क्षेत्रों में भारी निवेश करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है।
ईरान के साथ पाकिस्तान के जटिल संबंध
पाकिस्तान की यह सैन्य तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह खुद को ईरान का करीबी मित्र बताता रहा है। पाकिस्तान वर्तमान में परमाणु समझौते की प्रक्रिया में एक आधिकारिक मध्यस्थ या मैसेंजर की भूमिका निभा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने ईरान के साथ दो बड़े व्यापारिक समझौते भी किए हैं, जिसमें ग्वादर पोर्ट का बिना किसी बाधा के इस्तेमाल शामिल है। इतना ही नहीं, ईरान ने पाकिस्तान के कई तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है और ऐसे में रॉयटर्स की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की दोहरी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सऊदी अरब को ईरान का कट्टर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।
क्षेत्रीय संघर्ष और पाकिस्तान की मध्यस्थता
सऊदी अरब और ईरान के बीच संघर्ष का इतिहास काफी पुराना है। पिछली बार जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था, तब ईरान ने सऊदी अरब पर सीधे हमले किए थे और जवाब में सऊदी अरब ने भी ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके अलावा, सऊदी अरब लगातार ईरान समर्थित प्रॉक्सी संगठनों जैसे कताइब हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है। अप्रैल के महीने में अमेरिका के अनुरोध पर पाकिस्तान को इस जंग में एक आधिकारिक मैसेंजर नियुक्त किया गया था। पाकिस्तान का मुख्य कार्य ईरान के संदेशों को अमेरिका तक और अमेरिका के संदेशों को ईरान तक पहुंचाना है। इस परमाणु समझौते को लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक दौर की बैठक भी हो चुकी है, हालांकि उसमें अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।