इंडियन आइडल का सिंगर कैसे बन गया इंटरनेशनल क्रिकेट अंपायर, ऑस्ट्रेलिया से मिला बड़ा बुलावा

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इंडियन आइडल का सिंगर कैसे बन गया इंटरनेशनल क्रिकेट अंपायर, ऑस्ट्रेलिया से मिला बड़ा बुलावा
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क्रिकेट और संगीत दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अपनी पहचान बनाना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन बहुत कम लोग ही इन दोनों ही दुनिया में अपनी एक अलग और अनूठी मिसाल कायम कर पाते हैं। महाराष्ट्र के पुणे शहर के रहने वाले पराशर जोशी की कहानी इन दोनों ही कलाओं और दुनिया के संगम की एक बेहद अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल पेश करती है। जो शख्स कभी देश के सबसे मशहूर और लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल के मंच पर अपनी बेहतरीन गायकी का लोहा मनवा रहा था, वही आज क्रिकेट के मैदान पर अपनी बेहद पैनी और सटीक निगाहों से अहम और बड़े फैसले सुनाने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अब उनके इस शानदार सफर में एक और नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के बीच शुरू किए गए एक खास और महत्वपूर्ण अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलिया की घरेलू धरती पर जाकर अंपायरिंग करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्रिकेट और संगीत का अनूठा संगम है पराशर जोशी का जीवन

मौजूदा रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने आपसी क्रिकेट संबंधों और तकनीकी आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए अंपायरों के इस नए एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस विशेष कार्यक्रम के तहत जहां एक ओर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर भारत की सरजमीं पर आकर रणजी ट्रॉफी के दो महत्वपूर्ण मुकाबलों में अंपायरिंग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत की तरफ से बेहद अनुभवी और कुशल अंपायर पराशर जोशी को ऑस्ट्रेलिया भेजा जा रहा है। पराशर जोशी का संगीत के मंच से लेकर क्रिकेट के मैदान की अंपायरिंग तक का यह पूरा सफर बेहद दिलचस्प, संघर्षपूर्ण और प्रेरणा से भरा हुआ रहा है और पुणे से ताल्लुक रखने वाले पराशर को बचपन से ही संगीत का बहुत गहरा शौक था और वो इसमें अपना भविष्य बनाना चाहते थे।

संगीत के प्रति अपने इसी जुनून के चलते उन्होंने गायकी की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए लगातार और कठिन कोशिशें कीं। लेकिन उनकी इस राह में शुरुआती दौर में मुश्किलें कम नहीं थीं। लगातार शुरुआती तीन सालों तक उन्हें सिंगिंग रियलिटी शो के ऑडिशन के दौरान सिर्फ और सिर्फ रिजेक्शन यानी असफलता का ही सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपनी इन असफलताओं और निराशाओं से कभी भी हार नहीं मानी और अपनी कमियों को सुधारते हुए चौथे साल फिर से पूरी मेहनत के साथ कोशिश की। उनकी इसी जिद्द और लगन का परिणाम यह रहा कि साल 2008 में प्रसारित हुए लोकप्रिय शो इंडियन आइडल सीजन 4 के पियानो राउंड तक वो अपनी मजबूत जगह बनाने में पूरी तरह से कामयाब रहे। हालांकि, कड़े मुकाबले के इस दौर के बाद वो शो से बाहर जरूर हो गए, लेकिन उनका यह सफर उनके जज्बे को बयां करने के लिए काफी था।

संगीत से खेल के मैदान तक का रोमांचक सफर

संगीत के इस सफर के साथ-साथ पराशर जोशी का जुड़ाव खेल, विशेष तौर पर क्रिकेट से भी बहुत गहरा रहा था और उन्होंने शुरुआती जीवन में क्लब लेवल पर क्रिकेट खेला करता था, जिससे उन्हें खेल की बारीकियों को समझने में बहुत मदद मिली। लेकिन बाद में उन्होंने खेल के नियमों में पूरी तरह से महारत हासिल करने का फैसला किया और अंपायरिंग को ही अपने करियर के रूप में चुनने का निर्णय लिया। क्रिकेट अंपायरिंग की इस कठिन दुनिया में कदम रखने के बाद पराशर ने अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर बहुत तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़नी शुरू कर दीं और साल 2015 में देश के सबसे बड़े क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपने आधिकारिक अंपायर पैनल में शामिल कर लिया।

बीसीसीआई के आधिकारिक पैनल में शामिल होने के बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट्स जैसे कि रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी के कुल 19 फर्स्ट क्लास मैचों में अपनी बेहतरीन अंपायरिंग का हुनर दिखाया है। इसके अलावा उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट्स के 32 लिस्ट-ए मैचों और लगभग 40 टी20 मुकाबलों में भी मैदानी अंपायर की बड़ी भूमिका निभाई है। उनके इस लंबे और समृद्ध अनुभव में दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और महिलाओं के बहुप्रतीक्षित टूर्नामेंट महिला प्रीमियर लीग के मुकाबले भी पूरी शान के साथ शामिल हैं। इन सभी बड़े टूर्नामेंट्स में उनके द्वारा किए गए फैसलों की सटीकता ने उन्हें देश के शीर्ष अंपायरों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।

ऑस्ट्रेलियाई धरती पर संभालेंगे इन बड़े मैचों की कमान

इस महत्वपूर्ण इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पराशर जोशी को काफी व्यस्त, चुनौतीपूर्ण और कड़े मुकाबलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके इस ऑस्ट्रेलियाई दौरे का पूरा शेड्यूल बेहद रोमांचक है। सबसे पहले वो 11 नवंबर से 14 नवंबर तक ब्रिस्बेन के ऐतिहासिक मैदान पर क्वींसलैंड और तस्मानिया की टीमों के बीच आयोजित होने वाले शेफील्ड शील्ड के चार दिवसीय मुकाबले में अंपायरिंग की कमान संभालेंगे। इसके बाद, ठीक दो दिन बाद यानी 16 नवंबर को उसी ब्रिस्बेन के मैदान पर आयोजित होने वाले ऑस्ट्रेलिया के घरेलू वनडे कप मुकाबले में भी वो मैदानी अंपायर के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे।

इस दौरे का अंतिम और सबसे ऐतिहासिक चरण 22 नवंबर से 25 नवंबर के बीच देखने को मिलेगा, जब पराशर जोशी दुनिया के सबसे ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड की टीमों के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित शेफील्ड शील्ड मैच में अंपायरिंग की मुख्य कमान संभालेंगे। इस तरह के बड़े और प्रतिष्ठित मुकाबलों में भारत के एक घरेलू अंपायर को जिम्मेदारी मिलना पूरे देश के लिए और विशेष तौर पर भारतीय अंपायरिंग बिरादरी के लिए बहुत ही गर्व का पल है। पराशर जोशी की यह सफलता इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि किसी व्यक्ति के भीतर लगन, मेहनत और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो वह संगीत के मंच से निकलकर क्रिकेट के सबसे बड़े मैदानों तक अपनी एक अलग और अमिट पहचान बना सकता है।

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