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पेंशनभोगियों के लिए अलर्ट: पेंशन और फैमिली पेंशन के टैक्स नियमों में अंतर समझना जरूरी

पेंशनभोगियों के लिए अलर्ट: पेंशन और फैमिली पेंशन के टैक्स नियमों में अंतर समझना जरूरी
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इनकम टैक्स रिटर्न भरने का समय आ गया है और इस दौरान पेंशनभोगियों और फैमिली पेंशन पाने वाले लोगों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि इन दोनों माध्यमों से होने वाली आमदनी पर आयकर के नियम पूरी तरह से अलग-अलग हैं। अक्सर देखा गया है कि बहुत से लोग पेंशन और फैमिली पेंशन की आय को एक ही श्रेणी में मान लेते हैं, जिसके कारण टैक्स कैलकुलेशन में गलती हो जाती है। ऐसी गलतियों की वजह से टैक्स विवाद पैदा हो सकते हैं, विभाग से नोटिस मिल सकता है और रिफंड मिलने में भी काफी देरी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए रिटर्न भरने से पहले इन बारीकियों को समझना जरूरी है।

पेंशन को माना जाता है वेतन से आय

आयकर कानून के प्रावधानों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद किसी कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन को वेतन यानी Salary की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह राशि पूर्व नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को दी जाती है, जो कर्मचारी और नियोक्ता के पुराने रिश्ते को दर्शाती है। इसी वजह से पेंशन से होने वाली आय पर इनकम फ्रॉम सैलरी के तहत टैक्स लगाया जाता है। पेंशनभोगियों को इस श्रेणी में होने के कारण स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी मिलता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत 50,000 रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन लिया जा सकता है। वहीं, नई टैक्स व्यवस्था में इस सीमा को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है, बशर्ते पेंशन की कुल राशि इस कटौती से कम न हो।

फैमिली पेंशन के लिए अलग हैं नियम

किसी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के पश्चात उनके जीवनसाथी या कानूनी वारिस को मिलने वाली राशि को फैमिली पेंशन कहा जाता है और इसके नियम सामान्य पेंशन से अलग हैं। फैमिली पेंशन को वेतन नहीं माना जाता क्योंकि प्राप्तकर्ता और भुगतान करने वाली संस्था के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध नहीं होता। इसे इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज यानी अन्य स्रोतों से आय के तहत वर्गीकृत किया जाता है। इस कारण फैमिली पेंशन पाने वालों को सामान्य स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 57(iia) के तहत उन्हें एक विशेष कटौती दी जाती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में फैमिली पेंशन की कुल राशि का एक-तिहाई हिस्सा या 15,000 रुपये, जो भी कम हो, उसकी कटौती ली जा सकती है। नई टैक्स व्यवस्था में यह सीमा एक-तिहाई राशि या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, निर्धारित की गई है।

वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स में छूट

आयकर अधिनियम की धारा 207(2) के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवासी वरिष्ठ नागरिकों को एक विशेष राहत प्रदान की गई है। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की आय में व्यवसाय या पेशे (Business or Profession) से होने वाली कोई आय शामिल नहीं है, तो उन्हें एडवांस टैक्स जमा करने से छूट दी गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें टैक्स नहीं देना होगा; उन्हें अपने कुल देय टैक्स का भुगतान ITR दाखिल करते समय करना अनिवार्य होता है।

75 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए विशेष सुविधा

धारा 194P के अंतर्गत 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को कुछ विशेष परिस्थितियों में ITR दाखिल करने से भी छूट मिल सकती है। यह छूट तब मिलती है जब उनकी आय का स्रोत केवल पेंशन और उसी बैंक में जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज हो जहां उनकी पेंशन आती है और इसके लिए उन्हें संबंधित बैंक में फॉर्म 12BBA जमा करना होता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपना रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी पेंशनभोगी अपने फॉर्म 16, एआईएस (AIS) और फॉर्म 26AS में दी गई जानकारी का मिलान अवश्य कर लें ताकि किसी भी प्रकार की विसंगति से बचा जा सके।

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