भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन राहत भरे हो सकते हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई हैं। वैश्विक बाजार में आई इस गिरावट का असर भारत में भी दिखने लगा है और देश की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेलर कंपनी नयारा एनर्जी ने अपनी कीमतों में कटौती कर दी है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक अपने रेट नहीं घटाए हैं लेकिन बाजार विशेषज्ञों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जल्द ही सरकारी पंपों पर भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 रुपये प्रति लीटर तक की कमी देखी जा सकती है। यह संभावित कटौती उस समय हो रही है जब कच्चे तेल की कीमतें अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं।
नयारा ने की पहल, सरकारी कंपनियों का इंतजार
7000 से अधिक फ्यूल स्टेशन चलाने वाली नयारा एनर्जी पिछले दो वर्षों में ईंधन की कीमतें कम करने वाली पहली कंपनी बन गई है। कंपनी ने 1 जुलाई से पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती लागू की है। इस फैसले के जरिए कंपनी ने मार्च में की गई उस बढ़ोतरी को वापस ले लिया है जो पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर की गई थी और दूसरी ओर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों ने अभी तक अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। ये सरकारी कंपनियां भारत के 90 प्रतिशत से अधिक फ्यूल स्टेशनों का संचालन करती हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि आम ग्राहकों तक इस राहत को पहुंचने में अभी कुछ हफ्तों का समय और लग सकता है।
एलपीजी और एटीएफ की कीमतों में मिली राहत
पेट्रोल और डीजल के अलावा अन्य ईंधन श्रेणियों में भी बदलाव देखने को मिले हैं। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 जुलाई से बड़े शहरों में कमर्शियल 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में लगभग 173 रुपये से 184 रुपये तक की कटौती की है। यह कटौती तब की गई जब सरकार ने होटलों, रेस्तरां और उद्योगों को एलपीजी की सप्लाई फिर से सुचारू कर दी। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3113 रुपये 50 पैसे से घटकर 2930 रुपये हो गई है। 2 किलोग्राम) वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही घरेलू एयरलाइंस के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में भी 5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है जिससे अब यह 110 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर आ गया है।
कीमतों में कटौती में देरी का मुख्य कारण
वीटी मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल के अनुसार भारत अब ईंधन की कीमतें कम करने की बेहतर स्थिति में है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें रिफाइनिंग की लागत, ढुलाई का खर्च, एक्सचेंज रेट, टैक्स और तेल कंपनियों का कमीशन भी शामिल होता है। भारत कच्चे तेल की खरीद हफ्तों पहले किए गए कॉन्ट्रैक्ट के जरिए करता है इसलिए रिफाइनर अभी भी उस महंगे तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं जो कीमतें गिरने से पहले खरीदा गया था। मैक्सवेल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी और रिफाइनरी की इनपुट कॉस्ट में उसका असर दिखने के बीच लगभग दो से चार हफ्ते का अंतर होता है। इसी वजह से जुलाई के दूसरे हिस्से या अगस्त की शुरुआत में खुदरा कीमतों में कमी की संभावना अधिक है।
तेल कंपनियों का घाटा और सरकारी हस्तक्षेप
कच्चे तेल की इंडियन बास्केट की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2026 के संघर्ष के दौरान यह 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। फरवरी 2026 में जब इंडियन बास्केट की कीमत 69 डॉलर 1 सेंट प्रति बैरल थी तब दिल्ली में पेट्रोल 94 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर बिक रहा था। अप्रैल तक तनाव बढ़ने से यह कीमत 114 डॉलर 48 सेंट्स तक पहुंच गई थी। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने ग्राहकों पर बोझ नहीं डाला और मार्च से मई के बीच लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाया। 8 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। वर्तमान में जब कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर 86 सेंट्स प्रति बैरल के आसपास है तो कंपनियां अपने पुराने घाटे और कर्ज की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।
वैश्विक परिदृश्य और भारतीय रुपये की मजबूती
केपीएमजी इंटरनेशनल के अनीश डे का मानना है कि तेल की कीमतें अब स्थिर रहेंगी। उनके अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक आरामदायक स्तर है। कच्चे तेल की कीमतों में इस नरमी से भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ है। 20 मई को डॉलर के मुकाबले 97 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रुपया सुधरकर अब 94 रुपये 50 पैसे के स्तर पर आ गया है। पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत ने कहा कि हालांकि उपभोक्ता तुरंत कटौती चाहते हैं लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की अनिश्चितता को देखते हुए सरकार का सतर्क रुख सही है। उन्होंने संकट के दौरान 40 से अधिक देशों से तेल आयात बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।