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पीएम मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरे: 2014 के बाद बदली देश की किस्मत, प्रधानमंत्री का संबोधन

पीएम मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरे: 2014 के बाद बदली देश की किस्मत, प्रधानमंत्री का संबोधन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 12 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत मंडपम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया और राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया। पीएम मोदी ने इस मौके पर सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अवसर पर उन्हें जो सम्मान और मान दिया गया है, उसके लिए वे सभी के बहुत आभारी हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक 'भारत माता' की सेवा करने का सौभाग्य मिलना केवल ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव हो पाया है।

सेवा को आध्यात्मिक साधना का रूप

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल को केवल एक राजनीतिक पद के रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए देश की जनता ही ईश्वर का रूप है और उनकी सेवा करना एक पवित्र कार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह आध्यात्मिक साधना कभी भी अकेले नहीं रही है, बल्कि यह एक सामूहिक 'यज्ञ' की तरह है। इस यज्ञ में उनके सभी सहयोगियों और देशवासियों ने कर्तव्य की भावना के साथ अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। पीएम मोदी ने भारत की जनता के विवेक की सराहना करते हुए कहा कि देश के लोगों ने हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्थिरता के महत्व को समझा है और यह जनता जनार्दन की परिपक्वता ही है जिसने उन्हें इतने लंबे समय तक इस जिम्मेदारी वाले पद पर बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता एक स्थिर सरकार के काम करने के तरीके को भी देख रही है।

कांग्रेस के कुचक्र से आजादी और विकास की नई गति

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2014 में जब एनडीए की जीत हुई थी, तब देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ था। उस आशा का संरक्षण करना सरकार का सबसे बड़ा दायित्व था। उन्होंने कहा कि आज देश का हर नागरिक विकसित भारत के सपने से भरा हुआ है और यह अब जन-जन का संकल्प बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता यह है कि देश अब कांग्रेस के कुचक्र से आजाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश को लाचारगी और हीन भावना के गर्त में धकेल दिया था और यह धारणा बना दी थी कि भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि धीमी विकास दर को 'हिंदू ग्रोथ रेट' का नाम दिया गया था, जबकि असल में यह 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' थी।

आर्थिक प्रगति और वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री ने आर्थिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि जब नीयत, नीति और निर्णय एक साथ काम करते हैं, तो विकास की गति अद्भुत होती है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं, तब भी 2025-26 में भारत ने 7 दशमलव 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल की है। वहीं, 31 मार्च को समाप्त हुए पिछले क्वार्टर में भारत की ग्रोथ 7 दशमलव 8 प्रतिशत रही है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत 'फ्रेजाइल फाइव' के कटघरे से बाहर निकलकर आज दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है। यह सफलता कड़ी मेहनत और सही दिशा में लिए गए फैसलों का परिणाम है।

बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव

प्रधानमंत्री ने 2014 और 2026 के बीच के विकास कार्यों का तुलनात्मक विवरण भी पेश किया। उन्होंने बताया कि 2014 में देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, जिनकी संख्या 2026 तक 160 से ज्यादा हो जाएगी। इसी तरह, 2014 में केवल 1,000 किलोमीटर एक्सप्रेसवे थे, जो 2026 तक बढ़कर 6,700 किलोमीटर हो जाएंगे। मेट्रो सेवा के विस्तार पर उन्होंने कहा कि 2014 में सिर्फ पांच शहरों में मेट्रो थी, जो 2026 तक 20 से ज्यादा शहरों में पहुंच जाएगी। रक्षा क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है; 2014 में डिफेंस एक्सपोर्ट केवल 700 करोड़ रुपये का था, जो 2026 तक 23,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 में 25 करोड़ इंटरनेट यूजर थे, जो आज 100 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। भारत आज डिजिटल ट्रांजेक्शन में दुनिया में नंबर वन है। पीएम मोदी ने अंत में कहा कि आज के आकांक्षी भारत के गर्भ में ही विकसित भारत पल रहा है और हमारा मध्यम वर्ग इन आकांक्षाओं का मुख्य वाहक है।

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